सोनिया गांधी के पास किसके लिखे लेटर हैं? मोदी सरकार ने वापस मांगते हुए कहा- 'ये आपकी निजी संपत्ति नहीं है'
Jawahar Lal Nehru Letter Row: केंद्र सरकार ने ये स्पष्ट कर दिया है कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के लेटर और उनसे संबंधित कोई भी दस्तावेज प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (PMML) से लापता नहीं हुए हैं। विपक्षी दलों के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए संस्कृति मंत्रालय ने बताया कि आखिर नेहरू जी द्वारा लिखे गए लेटर कहां हैं?
संस्कृति मंत्रालय ने खुलासा किया कि नेहरू जी के पत्र और नोट्स वास्तव में 'लापता' नहीं हुए है बल्कि कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी के पास हैं। उन्हें बताया कि ये कैसे सोनिया गांधी के पास पहुंचे? साथ ही खुलासा किया कि केंद्र सरकार ने सोनिया गांधी से ये लेटर और दस्तावेज वापस मांग रही है। यह स्पष्टीकरण एक दिन बाद आया जब कांग्रेस ने पहले प्रधानमंत्री से संबंधित दस्तावेजों पर लोकसभा में केंद्र के जवाब को लेकर सरकार पर निशाना साधा था।

Where is Nehru's documents? नेहरू के दस्तावेज कहां हैं?
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्पष्ट किया है कि नेहरू से जुड़े ये दस्तावेज "लापता" नहीं हैं। उन्होंने कहा कि लापता होने का अर्थ है कि दस्तावेजों का ठिकाना अज्ञात हो, जबकि इन 51 कार्टन दस्तावेजों का स्थान ज्ञात है। उनके अनुसार, वर्ष 2008 में तत्कालीन नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी से परिवार के अनुरोध पर इन दस्तावेजों को विधिवत वापस सौंपा गया था और इसका पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है।
मंत्री ने किया सवाल- कागजातों को वापस क्यों नहीं किया गया है?
मंत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा, "जिस बात का जवाब देना जरूरी है, वह यह है: पी एमएमएल से कई बार याद दिलाने के बावजूद, जिसमें जनवरी और जुलाई 2025 के हालिया अनुस्मारक भी शामिल हैं, इन कागजातों को वापस क्यों नहीं किया गया है? राष्ट्र स्पष्टता का हकदार है।"
'सोनिया गांधी जी ये आपकी निजी संपत्ति नहीं है'
मंत्री ने आगे लिखा "मैं आदर सहित सोनिया गांधी जी से देश को यह बताने के लिए कहता हूं: क्या रोका जा रहा है? क्या छिपाया जा रहा है? श्रीमती सोनिया गांधी द्वारा इन कागजातों को वापस न करने के लिए दिए गए बहाने मान्य नहीं हैं। मुद्दा यह है कि महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज अभी भी सार्वजनिक अभिलेखागार से बाहर क्यों हैं? ये निजी पारिवारिक कागजात नहीं हैं। ये भारत के पहले प्रधानमंत्री से संबंधित हैं और हमारे राष्ट्रीय ऐतिहासिक अभिलेख का हिस्सा हैं। ऐसे कागजात सार्वजनिक अभिलेखागार में होने चाहिए, न कि बंद दरवाजों के पीछे।"
केंद्र सरकार लगातार कर रही मांग
केंद्र सरकार के मंत्री ने खुलासा किया कि PMML सोनिया गांधी से देश के पहले प्रधानमंत्री के लिखे दस्तावेज वापस लेने के लिए उनके आफिस से लगातार संपर्क कर रहा है जनवरी और जुलाई 2025 में इसके लिए सरकार की ओर से पत्र भी भेजा गया है।
केंद्र सरकार ने नेहरू के लेटर और दस्तावेज वापस मांगे
प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (PMML) ने सोनिया गांधी पर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के "कागजातों को वापस सौंपने की मांग की है। केंद्र सरकार का आरोप है कि ये ऐतिहासिक अभिलेख कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के पास हैं और इन्हें प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय को वापस सौंपा जाना चाहिए, ताकि विद्वान, शोधकर्ता और संसद नेहरूवादी युग से जुड़े मूल दस्तावेजों तक पहुंच प्राप्त कर सकें। सरकार का कहना है कि ये दस्तावेज "जनता के अभिलेखागार में होने चाहिए, न कि बंद दरवाजों के पीछे।"
क्या है पूरा मामला?
बता दें, पंडित जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद मध्य दिल्ली स्थित तीन मूर्ति भवन को नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी में परिवर्तित किया गया था, जहां पुस्तकों और दुर्लभ ऐतिहासिक अभिलेखों का समृद्ध संग्रह मौजूद था। वर्ष 2023 में इसका नाम बदलकर प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय कर दिया गया। सरकार के अनुसार, 29 अप्रैल 2008 को सोनिया गांधी के प्रतिनिधि द्वारा पत्र लिखकर नेहरू के ये दस्तावेज मांगे गए थे।
प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय
प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते हैं, जबकि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इसके उपाध्यक्ष हैं। संस्कृति मंत्रालय का कहना है कि इन दस्तावेजों की सुरक्षा और शोध के लिए सार्वजनिक अभिलेखागार में इनकी मौजूदगी अत्यंत आवश्यक है।
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