आंध्र प्रदेश में टीडीपी के साथ है जन सेना पार्टी का गठबंधन लेकिन तेलंगाना में क्‍यों नहीं ?

तेलंगाना विधानसभा चुनाव 2023 में भारतीय जनता पार्टी पवन कल्‍याण की जन सेना पार्टी के साथ चुनाव लड़ने के लिए आतुर है। हालांकि 30 नवंबर को मतदान होने वाले है लेकिन अभी तक दोनों के बीच सीटों के बंटवारे और अन्‍य मुद्दों पर चर्चा चल रही है। भाजपा-जेएसपी जो एनडीए गठबंधन में साथ हैं और तेलंगाना चुनाव में संभवत: साथ रहेंगे लेकिन एक दिलचस्‍प बात ये है कि ये गठबंधन तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) समीकरण में फिट नहीं बैठता है।

pawan and reddy

बता दें आंध्र प्रदेश में जेएसपी और टीडीपी के साथ है वहीं तेलंगाना में भाजपा के साथ पवन कल्‍याण की पार्टी का गठबंधन है। तेलंगाना के आगामी चुनाव में भाजपा पवन कल्‍याण की पार्टी जेएसपी का समर्थन चाहती है, साथ ही टीडीपी से दूरी बनाए रखना चाहती है। शायद भाजपा ऐसा करके एनडीए से अलग हुई टीडीपी को सजा देना चाहती है।

भाजपा के लिए जेएसपी का समर्थन अप्रत्याशित नहीं है, पवन कल्‍याण की जेएसपी केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल है। वहीं तेलंगाना टीडीपी प्रमुख कसानी ज्ञानेश्वर ने कुछ समय पहले साथ चुनाव लड़ने की घोषणा की थी लेकिन साथ ही कहा था कि अंतिम निर्णय नायडू द्वारा लिया जाएगा।

याद रहे चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश 'कौशल विकास' घोटाले में जेल में बंद है। नाम ना उजागर करने के शर्त पर टीडीपी के एक नेता ने कहा कि उनकी पार्टी अंततः एनडीए में वापस चली जाएगी, लेकिन यह 2024 के आंध्र प्रदेश विधानसभा और लोकसभा चुनावों के करीब होगा।

गौरतलब है कि वर्ष 2014 में तेलंगाना राज्‍य के गठन से पहले टीडीपी और भाजपा ने कल्‍याण के समर्थन से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में साथ में चुनाव लड़ा था। आंध्र प्रदेश में टीडीपी सत्ता में आई थी, वहीं नवगठित राज्‍य तेलंगाना में 119 में से 15 सीटों पर जीत हासिल की थी। चंद्रबाबू नायडू की दोनों राज्‍यों में पकड़ थी।

हालांकि केंद्र सरकार ने जब 2018 में आंध्र प्रदेश को विशेष श्रेणी का दर्जा देने से इनकार कर दिया था तब टीडीपी ने एनडीए से नाराज होकर नाता तोड़ दिया था। जिसके बाद एक्‍टर से राजनेता बने पवन कल्‍याण ने खुलेआम चंद्रबाबू नायडू की निंदा की थी।

एनडीए से अलग होने के बाद 2019 के चुनावों में टीपीपी ने आंध्र प्रदेश में 175 सीटों में से 23 सीटों पर जीत हासिल की थी और टीडीपी से अधिक सीटें जीतकर जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) सत्ता में आ गई।

वहीं तेलंगाना में, नायडू ने 2018 के राज्य चुनावों के लिए कांग्रेस से हाथ मिलाया था जो उसके लिए बड़ा घातक साबित हुआ। टीडीपी चुनाव में केवल हारी ही नहीं बल्कि कांग्रेस और टीडीपी को केवल कुल 19 सीटें मिली थी जबकि भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने 119 में से 88 सीटें हासिल कीं। भाजपा ने 2014 में पांच विधानसभा सीटें जीती थीं और इस चुनाव में महज एक सीट जीती थी।

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