डोनाल्‍ड ट्रंप के दौरे के शुरू होने से पहले लिया गया जम्‍मू कश्‍मीर पर यह बड़ा फैसला

श्रीनगर। जम्‍मू कश्‍मीर में जो पंचायत चुनाव होने वाले थे उन्‍हें अचानक ही टाल दिया गया है। इंग्लिश डेली हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स ने सरकारी सूत्रों के हवाले से इस बात की जानकारी दी है। प्रशासन को डर है कि चुनावों की वजह से घाटी में हिंसा हो सकती है। ऐसे समय में जब अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप पहली आधिकारिक यात्रा पर भारत आ रहे हैं तो सरकार और स्‍थानीय प्रशासन किसी भी तरह का रिस्‍क नहीं लेना चाहता था। डोनाल्‍ड ट्रंप 24 फरवरी को अहमदाबाद पहुंचेंगे और 25 फरवरी को रात 10 बजे अमेरिका रवाना हो जाएंगे।

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हिंसा के डर की वजह से टले चुनाव

मंगलवार रात को चुनावों के टाले जाने का नोटिफिकेशन जारी हुआ है। इस नोटिफिकेशन को मुख्‍य चुनाव अधिकारी (सीईओ) शैलेंद्र कुमार की तरफ से जारी किया गया है। इस नोटिफिकेशन में एजेंसियों के हवाले से बताया गया है कि है, 'विश्‍वसनीय सूचना' के आधार पर चुनावों को आगे के लिए टाल दिया गया है। जम्‍मू कश्‍मीर में 13 फरवरी को पंचायत चुनावों का ऐलान किया गया था। घाटी में दो चरणों में पंचायत चुनाव के लिए वोट डाले जाने वाले थे। इन चुनावों की शुरुआत पांच मार्च से होनी थी और इन्‍हें आठ चरणों में पूरा किया जाना था। पांच अगस्‍त 2019 को केंद्र सरकार ने घाटी से आर्टिकल 370 हटाने का फैसला किया था। इसके बाद 31 अक्‍टूबर को जम्‍मू कश्‍मीर संघ श‍ासित प्रदेश बन गया था। इस घटनाक्रम के बाद यह पहले चुनाव थे जिनका इंतजार सरकार और प्रशासन को था। इन चुनावों के तहत करीब 12,000 खाली पड़ी स्‍थानीय निकाय की सीटों के लिए प्रतिनिधियों को चुना जाना था। एक अधिकारी की ओर से बताया गया, 'इस बात का डर था कि आतंकी भावी उम्‍मीदवारों की हत्‍याओं को अंजाम दे सकते हैं और ऐसे समय में जबकि ट्रंप भारत आ रहे हैं, यह एक शर्मनाक घटनाक्रम हो सकता था।'

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    गिलानी का स्‍वास्‍थ्‍य भी बड़ी चिंता

    नोटिफिकेशन के तहत 22 फरवरी को उम्‍मीदवारों को नामांकन दर्ज कराना था। इसके बाद 24 और 26 फरवरी को नामांकन की जांच होनी थी। एक और अधिकारी ने बताया कि तारीखें, अमेरिकी राष्‍ट्रपति के दौरे से टकरा रही थीं और हिंसा की आशंका थी। एक और सीनियर अधिकारी ने बताया कि चुनाव आयोग ने भी इसी तरह की वजहें बताई हैं। पूर्व में भी अमेरिकी राष्‍ट्रपति के दौरे पर घाटी में हिंसा देखी गई है। इस बात की भी आशंका थी कि अगर एक उम्‍मीदवार को भी आतंकियों ने निशाना बनाया तो फिर कश्‍मीर का मुद्दा हावी हो सकता है। घाटी में पंचायत चुनावों का सभी दलों की ओर से विरोध किया जा रहा है। सिर्फ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ही इनका समर्थन कर रही है। नेशनल कॉन्‍फ्रेंस और पीपुल्‍स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के अलावा कांग्रेस ने भी साफ कर दिया है कि वह अपना कोई भी उम्‍मीदवार इन चुनावों में नहीं खड़ा करेगी। अधिकारियों को हालांकि अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की गिरते हुए स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर भी खासी चिंता है।

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