JK Delimitation : जम्मू-कश्मीर में अब 90 विधानसभा सीटें, परिसीमन आयोग ने ECI को सौंपा फाइनल ऑर्डर
जम्मू कश्मीर से अगस्त, 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद परिसीमन कराया गय। गत दो साल से अधिक समय से केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में परिसीमन हो चुका है। गुरुवार को फाइनल ऑर्डर साइन किया गया।
श्रीनगर : भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा की मौजूदगी में जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग ने गुरुवार को डिलिमिटेशन के फाइनल ऑर्डर पर साइन किए। कमीशन के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।
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बता दें कि भारत सरकार ने मार्च 2020 में जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) में विधानसभा और संसदीय क्षेत्रों को फिर से तैयार करने का फैसला लिया था। इसके लिए डिलिमिटेशन कमीशन का गठन किया गया था। गुरुवार को डिलिमिटेशन कमीशन ने चुनाव आयोग (ECI) को अपनी अंतिम मसौदा रिपोर्ट सौंपी।अंतिम परिसीमन आदेश के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित की जाने वाली तारीख से जम्मू कश्मीर में कुल 90 विधानसभा सीटें होंगी।
जम्मू-कश्मीर में परिसीमन के बाद कुल 90 विधानसभा सीटों में 43 जम्मू क्षेत्र और 47 कश्मीर क्षेत्र का हिस्सा होंगे। डिलिमिटेशन के लिए एसोसिएट सदस्यों, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, नागरिकों और नागरिक समाज समूहों से परामर्श किया गया। इसके बाद, 9 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित की गई हैं। इनमें से 6 सीटें जम्मू क्षेत्र में और 3 विधानसभा सीटें कश्मीर घाटी में हैं। बता दें कि इस क्षेत्र में पांच संसदीय सीटें आती हैं।
फाइनल डिलिमिटेशन ऑर्डर के मुताबिक परिसीमन आयोग ने जम्मू और कश्मीर क्षेत्र को एकल केंद्र शासित प्रदेश के रूप में देखा है। इस आधार पर कश्मीर घाटी में अनंतनाग क्षेत्र और जम्मू क्षेत्र के राजौरी और पुंछ को मिलाकर एक संसदीय सीट (Parliamentary Constituency) बनाई गई है।
बता दें कि डिलिमिटेशन कमीशन को दो महीने का कार्यकाल विस्तार भी दिया गया था। शुक्रवार को इसका कार्यकाल समाप्त होने वाला था। एक दिन पहले डिलिमिटेशन कमीशन ने फाइनल ऑर्डर साइन किए।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के गृह विभाग के एक अधिकारी ने गोपनीयता की अपील करते हुए बताया, आयोग का कार्यकाल 6 मई (शुक्रवार) को समाप्त हो रहा है। संभावना है कि डिलिमिटेशन कमीशन केंद्रीय निर्वाचन आयोग को जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंप देगा। बता दें कि परिसीमन के लिए गठित पैनल को 2021 में एक साल का विस्तार दिया गया था। इसी साल मार्च (2022) में इसे दो और महीने दिए गए थे।
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में जून, 2018 से ही कोई निर्वाचित सरकार नहीं है। परिसीमन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद विधानसभा चुनाव का ऐलान किए जाने की उम्मीद है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जम्मू कश्मीर में चुनाव के बाद पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा कर चुके हैं।
बता दें कि अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से पूर्ण राज्य का दर्जा उस समय छिन गया था जब केंद्र सरकार ने संसद में विधेयक पारित कराए थे। इसके बाद जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दो हिस्सों में बंटने के बाद लद्दाख अलग केंद्र शासित प्रदेश के रूप में अस्तित्व में है। यह फैसले संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद लिए गए।












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