क्या है मोसाद ? रॉ को उसी के जैसा बनाने की मोदी सरकार को JDU ने दी है सलाह
नई दिल्ली, 28 जून: जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की ओर से बीते दो दिनों में दो दफे बहुत ही खौफनाक साजिश को अंजाम दिया गया है। रविवार तड़के जम्मू एयरबेस पर दो ड्रोन से हमला किया गया और आज तड़के एक ड्रोन को कालूचक मिलिट्री स्टेशन के पास मंडराते देखा गया है। जम्मू एयरबेस पर तो निशाना चूक गया नहीं तो वायुसेना को काफी नुकसान पहुंच सकता था। इस तरह से इस हमले की तुलना- पठानकोट, उरी और पुलवामा में हुए आतंकी हमलों से ही की जा रही है। अब केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी की सहयोगी पार्टी जेडीयू के नेता भी पाकिस्तान में घुसकर उसे उसी की भाषा में जवाब देने की मांग कर रहे हैं। वो तो अब इंटेलिजेंस एजेंसी रॉ को भी इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद जैसा बनाने की वकालत करने लगे हैं।

जदयू नेता ने की रॉ को मोसाद जैसा बनाने की मांग
जम्मू-कश्मीर और पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन से भारत में छिपे बैठे आतंकियों के लिए हथियार गिराने का सिलसिला पिछले कुछ वर्षों से चल रहा है। लेकिन, बीते दो दिनों में जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना और वायुसेना के ठिकानों को जिस तरह से ड्रोन से टारगेट किया गया है, वह बहुत ही भयावह खतरे की घंटी है। मोदी सरकार उरी के बाद पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा के बाद एयर स्ट्राइक कर चुकी है। लेकिन, इसके बावजूद पाकिस्तानी सेना समर्थित आतंकी संगठनों के मंसूबे शांत नहीं हुए हैं। अब भाजपा की सहयोगी जदयू के नेताओं की ओर से भी पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देने की मांग उठने लगी है। अब नीतीश कुमार के सहयोगी और पार्टी नेता अजय आलोक ने केंद्र सरकार से इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद की तरह ऐक्शन लेने की मांग कर दी है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा है, "ड्रोन से हमला जब वायु सेना स्टेशन जम्मू पे हो सकता है तो उसी ड्रोन से दाऊद और हाफिज सईद को भी उड़ाया जा सकता है, अब जरूरत है रॉ को मोसाद जैसा बनने की। अमित शाह जी, इन पाकिस्तानियों को इन्हीं की भाषा में जवाब देना आप से बेहतर कोई नहीं जानता।"

रॉ क्या है ?
रॉ यानी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग भारत की मुख्य बाहरी खुफिया एजेंसी है। इसकी जिम्मेदारी दूसरे देशों में भारत को लेकर चल रही गतिविधियों (आतंकवाद, काउंटर-प्रोलिफरेशन) की जानकारियां जुटाना है और उसी के मुताबिक पॉलिसी बनाने वालों को सलाह देना है। इसका गठन 1968 में हुआ था और तब इसका मुख्य फोकस चीन को लेकर था। इसके गठन के पीछे की वजह यह रही कि भारत-चीन और भारत-पाकिस्तान के बीच हुई जंग के दौरान खुफिया जानकारी की कमी महसूस की गई थी। इसी के मद्देनजर सरकार ने एक ऐसी खुफिया एजेंसी गठित की जो, स्पेशलाइज्ड और स्वतंत्र हो। (ऊपर की तस्वीर-स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स)

क्या है मोसाद ?
मोसाद इजरायल की बहुत ही चर्चित खुफिया और सुरक्षा एजेंसी है, जिसपर इंसानी खुफिया जानकारी जुटाने, बहुत ही गुप्त तरीके से ऐक्शन लेने और आतंकवाद का अचूक मुकाबला करने की जिम्मेदारी है। इसका गठन 1949 में किया गया था। इसका फोकस मुख्य रूप से दुनिया भर के अरब देशों और उनके संगठनों पर है। मोसाद के एजेंट पूर्व कम्युनिस्ट देशों, पश्चिम के देशों और यूनाइटेड नेशन में भी सक्रिय हैं। इसके अलावा दुनियाभर में खासकर सीरिया, ईरान और इथियोपिया जैसे देशों में यहूदियों की चिंता करने के लिए भी यह संगठन जिम्मेदार है। मोसाद का हेडक्वार्टर इजरायली शहर तेल अवीव में है। मोसाद में कई तरह के डिपार्टमेंट हैं, लेकिन इसका स्पेशल ऑपरेशन डिविजन बहुत ही स्पेशल है, जो कि संवेदनशील ऑपरेशन करने और मनोवैज्ञानिक युद्ध जैसे प्रोजेक्ट को अंजाम देने के लिए चर्चित है। (ऊपर की तस्वीर-इजरायली सेना)

क्यों चर्चा में रहता है मोसाद ?
इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष की वजह से मोसाद दुनियाभर के मुस्लिम देशों के निशाने पर रहता है। लेकिन, यह एजेंसी और इसके गिनती के एजेंट अपने काम में इतने माहिर हैं कि दुनियाभर की सुरक्षा एजेंसियां इनसे सीखने के लिए लालायित रहती हैं। इजरायल और मोसाद के खिलाफ आग-उगलने वालों में पाकिस्तान के हुक्कमरान भी सबसे आगे रहते हैं। लेकिन, अभी इजरायली मीडिया (इजरायली अखबार हयोम)ने दावा किया है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के विशेष सलाहकार मियां जुल्फी बुखारी पिछले साल नवंबर में इजरायल का गुप्त दौरा कर आए थे। सबसे बड़ी बात ये ही कि उस दौरान उन्होंने मोसाद के प्रमुख से भी मुलाकात की थी। गौरतलब है कि पाकिस्तान ने इजरायल को मान्यता भी नहीं दी है।(ऊपर की तस्वीर-इजरायली पुलिस फोर्स)












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