जामिया की छात्राओं का आरोप, पुलिस ने प्राइवेट पार्ट पर मारी लात, फाड़े हिजाब

नई दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की छात्रों के एक ग्रुप ने बुधवार को आरोप लगाया कि सोमवार को जब वे संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ संसद तक मार्च निकालने की कोशिश कर रहे थे तब दिल्ली पुलिस ने छात्राओं के प्राइवेट पार्ट पर लात मारी, कपड़े और हिजाब तक फाड़ दिए। उन्हें गालियां दीं और उनकी देशभक्ति पर सवाल खड़े किए। दिल्ली पुलिस ने हालांकि, इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा, "प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई बल प्रयोग नहीं किया गया था।

सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों में झड़प

सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों में झड़प

सोमवार को सीएए और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिकता पंजीकरण के खिलाफ जामिया के सैकड़ों छात्रों और आसपास के लोग संसद तक मार्च करने की कोशिश कर रहे थे लेकिन पुलिस ने रास्ते में ही उन्हें रोक दिया था, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों में झड़प हो गई थी। जिसमें कई छात्रों के घायल भी हुए थे। वहीं जामिया कॉर्डिनेश कमेटी (जेसीसी) ने 10 फरवरी को प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर उन्हें रोकने की कोशिश में छात्रा-छात्राओं के निजी अंगों को चोटिल करने का आरोप लगाया है।

कई के टूटे हाथ-पैर

कई के टूटे हाथ-पैर

जामिया के जेसीसी ऑफिस में बुधवार को प्रेस वार्ता कर छात्राओं ने पुलिस पर अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल कर हाथ-पैर तोड़ने का भी आरोप लगाया है। 20 छात्र बुधवार को मीडिया के सामने आए और उस दिन पुलिस द्वारा कथित तौर पर की गई बर्बरता की कहानी को बयां किया। इन छात्रों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने सोमवार को उन्हें होली फैमिली अस्पताल के पास रोका और जूते, डंडे, छड़ और लोहे के बने कवच से पिटाई की।

पुलिस ने आरोपों को किया खारिज

पुलिस ने आरोपों को किया खारिज

छात्रों ने दावा किया कि उनमें से 50 से अधिक लोगों को हाथापाई के दौरान उनके सीने, पेट और उनके निजी अंगों पर चोटें आई हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें जामिया नगर और अल शिफा अस्पताल में एमए अंसारी अस्पताल ले जाया गया। बारह छात्र आईसीयू में हैं। कई छात्र और छात्राओं के इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी का आरोप है कि जो छात्र सीएए-एनआरसी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे उनके परिवारवालों को पुलिस झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दे रही है। छात्रों का दावा है कि पुलिस उन पर गलत आरोप लगाकर प्रदर्शन खत्म करने की धमकी देती है। दक्षिण-पूर्व जिला डीसीपी आरपी मीणा ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि पूरे प्रदर्शन की रिकॉर्डिंग हो रही है। इस तरह का कार्य किसी पुलिसकर्मी द्वारा नहीं किया गया है। जो छात्र बेहोश हुए हैं वह भगदड़ की वजह से हुए हैं। छात्र ही भगदड़ मचा रहे थे।

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