सुंजवान आतंकी हमला: जैश-ए-मोहम्मद ने लिया अफजल की मौत का बदला!
जम्मू के सुंजवान स्थित आर्मी कैंप पर शनिवार को तड़के आतंकी हमला हुआ। बताया जा रहा है कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का हाथ है। इस हमले में भी सभी आतंकी पाकिस्तानी हैं। नौ फरवरी को संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की मौत की बरसी थी।
जम्मू। जम्मू के सुंजवान स्थित आर्मी कैंप पर शनिवार को तड़के आतंकी हमला हुआ। बताया जा रहा है कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का हाथ है। इस हमले में भी सभी आतंकी पाकिस्तानी हैं। नौ फरवरी को जब संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की मौत की बरसी थी उसके बाद ही इस हमले को अंजाम दिया गया। हमले के लिए 10 फरवरी की तारीख को चुना गया क्योंकि 11 फरवरी को मकबूल भट की बरसी है। मकबूल भट जम्मू कश्मीर लिब्रेशन फोर्स (जेकेएलएफ) का फाउंडर था और उसे 11 फरवरी 1984 को तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी। इस हमले में दो जेसीओ शहीद हो चुके हैं और चार जवान घायल हैं। जिस जगह पर हमला हुआ वहां पर बड़ी संख्या में जवान अपने परिवार के साथ रहते हैं। अब इस ऑपरेशन को अपने मिशन पर पहुंचाने के लिए कमांडो ऑपरेशन की तैयारी की जा रही है।

दी गई थी चेतावनी
इंटेलीजेंस की ओर से चेतावनी दी गई थी कि जैश के आतंकी अफजल गुरु की पांचवीं बरसी पर सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि इस हमले को जैश आतंकियों की ओर से ही अंजाम दिया गया है। फिलहाल इस हमले से जुड़ी और ज्यादा जानकारी का इंतजार है। कैंप के 500 मीटर के दायरे में स्थित सभी स्कूलों को बंद कर दिया गया है।

सेना की 36वीं ब्रिगेड पर हमला
सुंजवान में जहां हमला हुआ है वहां पर जम्मू कश्मीर लाइट इंफ्रेंट्री की 36वीं ब्रिगेड स्थित है। यह आर्मी कैंप श्रीनगर-जम्मू-पठानकोट हाइवे पर स्थित है और यहां काफी घनी आबादी है। साफ है कहीं न कहीं आतंकियों का मकसद बड़ी तबाही मचाना था। सेना के मुताबिक गोलियों की आवाज आखिरी बार सुबह 6 बजे सुनी गई थी। फिलहाल इस इलाके को पूरी तरह से घेर लिया गया है। आईजीपी जामवाल के मुताबिक जिस समय संदिग्ध गतिविधियां देखी गईं उस समय आतंकियों की ओर से फायरिंग हुई और फिर इसका जवाब दिया गया। शुरुआती गोलीबारी में हवलदार और उसकी बेटी घायल हो गए हैं। अभी ऑपरेशन जारी है और आतंकी एक क्वार्टर में छिप हुए हैं।

बनाई गई अफजल गुरु स्क्वायड
जैश के सरगना मौलाना मसूद अजहर की ओर से अक्टूबर 2017 में एक अफजल गुरु स्क्वायड की शुरुआत की गई थी। मसूद ने इस बात का ऐलान अफजल गुरु पर लिखी किताब को लॉन्च करते हुए किया था। इंटेलीजेंस ब्यूरों के अधिकारियों के मुताबिक अफजल गुरु स्क्वायड काफी खतरनाक है और इस स्क्वायड ने मोहरा, तंगधार, सांबा और कठुआ में स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इस स्क्वायड का संचालन मोहम्मद भाई और अब्दुल मतीन कर रहे हैं।

सेना पर हमले की पूरी साजिश
जम्मू कश्मीर में अफजल गुरु और मकबूल भट की बरसी की लेकर एक एडवाइजरी भी बुधवार को जारी की गई थी। जेकेएलएफ की ओर से नौ और 11 फरवरी को विरोध प्रदर्शन का ऐलान करनके बाद यह एडवाइजरी जारी हुई थी। अधिकारियों को इस बात का पूरा यकीन था कि जैश-ए-मोहम्मद नौ फरवरी और 11 फरवरी को जम्मू कश्मीर के सेना के संस्थानों पर फिदायीन हमले की योजना बना रहा है। इंटेलीजेंस ब्यूरों की ओर से जारी एक एडवाइजरी में कहा गया था आतंकी सैन्य ठिकनों या फिर सैन्य काफिलों पर ग्रेनेड अटैक कर सकते हैं या फिर आईडी ब्लास्ट को अंजाम दे सकते हैं।












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