G7 Summit 2024: मोदी की जी-7 को क्यों है जरूरत? लगातार 5वीं बार हुए शामिल, 5 प्वाइंट्स में समझें
PM Narendra Modi Apulia G7 Summit News Update: इटली के अपुलिया में शुक्रवार को आयोजित 50वें ग्रुप ऑफ सेवन (G7) समिट में हिस्सा लेने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहुंचे हैं। यहां पीएम ने जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को हाथ जोड़कर अभिवादन करते हुए नमस्ते किया। उन्होंने शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में पोप फ्रांसिस से भी मुलाकात की।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम के इतर विश्व नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं। प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाकात की। खास बात यह है कि जी-7 देशों का हिस्सा न होने के बावजूद भारत को न्योता मिला। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के न्योते पर नरेंद्र मोदी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। आइए जानते हैं जी-7 क्लब का सदस्य न होने के बावजूद क्यों भारत को बुलाया गया और पीएम मोदी की जी-7 को उनकी जरूरत क्यों है?

जी 7 को मोदी की जरूरत क्यों है?
मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन में इसलिए भाग ले रहे हैं क्योंकि भारत एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति है और उसके पास वैश्विक मुद्दों पर महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता है। जी-7 (Group of Seven) एक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संगठन है, जिसमें दुनिया की सात सबसे विकसित और उन्नत अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। जिसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका को शामिल किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत पिछले कुछ सालों में जी7 की बैठकों में नियमित रूप से आमंत्रित किया जाता रहा है। भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत इसे प्रमुख वैश्विक मुद्दों के केंद्र में रखती है, जबकि इसका मजबूत लोकतंत्र, जिसे हाल के चुनावों में रेखांकित किया गया है, इसे पश्चिम के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार बनाता है। भारत जल्द ही जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था अमेरिका और जर्मनी को छोड़कर सभी जी 7 देशों से बड़ी हो जाएगी।
विदेश सचिव विनय क्वात्रा का कहना है कि इस जी 7 शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी भारत में जी 20 की अध्यक्षता के संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है। उस दौरान भारत ने कई विवादास्पद मुद्दों पर वैश्विक सहमति बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई थी। जैसा कि सभी जानते हैं, भारत ने अब तक वॉयस ऑफ द ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन के दो सत्रों का आयोजन किया है, जिसका उद्देश्य ग्लोबल साउथ के हितों, प्राथमिकताओं और चिंताओं को वैश्विक मंच पर लाना है।
आगे कहा कि जी7 में भी, हमने हमेशा ग्लोबल साउथ के मुद्दों को सबसे आगे रखा है। भारत को G7 देशों से बहुत लाभ होगा, जो अपने आर्थिक संबंधों को चीन से हटाकर मित्र देशों की ओर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। रूस के साथ चीन के मजबूत होते संबंधों और संभावित सैन्य सहयोग पर बढ़ती पश्चिमी चिंताएं भारत को उसकी तटस्थता के बावजूद एक प्रमुख पश्चिमी सहयोगी बनाती हैं।
लगातार 5वीं बार पीएम मोदी की भागीदारी
पश्चिमी दुनिया भारत को अपने साथ चाहती है। देश की बढ़ती आर्थिक ताकत को देखते हुए, भारत पश्चिम का सामना करने वाले प्रमुख नीतिगत मुद्दों से बाहर नहीं रह सकता है। यह G7 शिखर सम्मेलन में भारत की 11वीं भागीदारी होगी और G7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी की लगातार पांचवीं भागीदारी होगी ।
प्वाइंट्स में समझें जी-7 को मोदी जी की जरूरत क्यों?
- आर्थिक साझेदारी और व्यापार: भारत एक तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है। जी-7 देशों के साथ व्यापार और आर्थिक सहयोग भारत और इन देशों के लिए लाभदायक हो सकता है।
- वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श: जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य संकट (जैसे कि COVID-19), आतंकवाद और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण महत्वपूर्ण हो सकता है।
- टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन: भारत में तकनीकी नवाचार और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अद्वितीय क्षमता है। इस क्षेत्र में सहयोग से जी-7 देशों को भी लाभ हो सकता है।
- जियो पॉलिटिकल सिचुएशन: भारत की भौगोलिक स्थिति और इसकी विदेश नीति का वैश्विक राजनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव है। भारत के साथ संबंध बनाकर जी-7 देश एशिया में अपने प्रभाव को मजबूत कर सकते हैं।
- वैश्विक स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन: भारत ने COVID-19 महामारी के दौरान अपनी वैक्सीन उत्पादन क्षमता और आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे वैश्विक स्वास्थ्य मुद्दों पर भारत के सहयोग जरूरत है।
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