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हरियाणा में डेरा और खाप पंचायतों के भरोसे बड़ी जीत की उम्मीद लगा रही है भाजपा ?

नई दिल्ली-90 सीटों वाली हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 75 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य तय किया है। इस टारगेट को पूरा करने के लिए बीजेपी के चुनावी तरकश में इस बार कई तीर हैं। इसमें सबसे बड़ा तो जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल-370 का खात्मा है। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार की लोक-लुभावन योजनाओं पर भी भाजपा नेतृत्व को पूरा भरोसा है। लेकिन अब खबरें मिल रही हैं कि पार्टी ने हरियाणा में हमेशा से प्रभावी माने जाने वाले विभिन्न डेरों और ताकतवर खाप पंचायतों से भी संपर्क साधना शुरू कर दिया है। हरियाणा में राजनीतिक दलों की ओर से चुनाव में डेरों और खापों से मदद मांगना कोई नहीं बात नहीं है और ये हर चुनाव में सभी पार्टियां करती रही हैं। लेकिन, भाजपा के लिए यह खास इसलिए हो जाता है कि वह खुद को 'पार्टी विद डिफरेंस' बताती है और उसे राज्य सरकार और केंद्र सरकार की ओर से हुए विकास कार्यों को लेकर भी बहुत दावा है। फिर भी उन डेरों और खाफों से संपर्क साधने की जरूरत क्यों पड़ रही है, जिनमें से कुछ काफी कुख्यात हैं और उनके नेता जघन्य अपराधों की सजा भी काट रहे हैं?

डेरों और खापों के भरोसे भाजपा?

डेरों और खापों के भरोसे भाजपा?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी कई डेरों और जातीय खापों से चुनाव में समर्थन जुटाने के लिए संपर्क कर रही है। दरअसल, हरियाणा में इन धार्मिक और जातीय समुदायों के वोटर लाखों की तादाद में है और उन्होंने जिस भी पार्टी का समर्थन कर दिया उसका पलड़ा झुक सकता है। खासकर हरियाणा के ग्रामीण इलाकों के वोटरों में इन समुदायों की अच्छी पकड़ रही है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी को लगता है कि 90 में से 75 से ज्यादा सीटें जीतने का बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का टारगेट पूरा करने में ये ग्रुप काफी मददगार साबित हो सकते हैं।

सरकारें बनवाने में भी रही हैं कुछ डेरों की भूमिका

सरकारें बनवाने में भी रही हैं कुछ डेरों की भूमिका

हरियाणा में प्रभावी समुदायों में भी कुछ बहुत ही ज्यादा प्रभावशाली हैं। गुरमीत राम रहीम का डेरा सच्चा सौदा और रामपाल दास का डेरा उन्हीं में से हैं, जो पहले भी हरियाणा में सरकार बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। लेकिन, मौजूदा समय में ये दोनों नाम पूरे देश में बदनाम हो चुके हैं। वैसे हकीकत ये है कि इनके समर्थकों में सारे गुनाहों के बावजूद उनका जलवा काफी हद तक पहले ही की तरह बरकरार है। राम रहीम और रामपाल दोनों इस वक्त जेल में हैं। राम रहीम रेप और हत्या के जुर्म में सजा काट रहा है और रामपाल हिसार सेंट्रल जेल में हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा भुगत रहा है।

बीजेपी ने 75 से ज्यादा सीटें जीतने का रखा है लक्ष्य

बीजेपी ने 75 से ज्यादा सीटें जीतने का रखा है लक्ष्य

इससे पहले भी बीजेपी को इन धार्मिक संगठनों का सहयोग मिल चुका है। 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को डेरा सच्चा सौदा का समर्थन मिला था और पार्टी की सफलता के पीछे इसे एक बड़ा कारण माना गया। हालांकि, इसके अलावा इसबार बीजेपी लोकसभा चुनाव की तरह ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर ही चुनाव मैदान में उतर चुकी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की साफ छवि पर भी बीजेपी को पक्का भरोसा है। पार्टी के लिए राहत की बात ये है कि विपक्षी कांग्रेस और जननायक जनता पार्टी टिकट बंटवारे को लेकर अभी से आपसी गुटबाजी में उलझी हुई है। ऐसे में पार्टी को उम्मीद है कि वह 2014 के 49 सीटों के मुकाबले अपना ग्राफ कहीं ज्यादा बेहतर कर सकती है। क्योंकि, लोकसभा चुनावों में सभी 10 सीटें जीतने से उसका मनोबल पहले से ही बहुत ऊंचा है।

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