क्या पैंगोंग झील पर पुल बना रहा है चीन ? जानिए PLA की संभावित चाल

नई दिल्ली, 3 दिसंबर: चीन का मंसूबा कभी ठीक नहीं रहा है। इसलिए अगर वह भारतीय सीमा के पास किसी भी तरह की हरकत को अंजाम देता है तो उसे नजरअंदाज करने की भूल नहीं की जा सकती। क्योंकि, यह 1962 से ऐसा दुश्मन रहा है, जिसने दोस्ती करके हर बार दगा देने में विश्वास किया है। अब खबरें आ रही हैं कि ड्रैगन पैंगोंग त्सो पर अपने कब्जे वाले हिस्से में पुल का निर्माण कर रहा है। जाहिर है कि 2020 के अगस्त में भारतीय सेना ने पीएलए को साउथ बैंक पर जो शिकस्त दी थी, उसकी चोट उसे गहरी लगी है। बाद में दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच हुई बातचीत के बाद दोनों देशों की सैन्य टुकड़ियां गतिरोध वाले इलाके से पीछे जरूर हट गई थीं। लेकिन, बाद में ऐसी रिपोर्ट आई कि चीन ने उस इलाके में अपना इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना नहीं छोड़ा।

पैंगोंग झील पर अपने इलाके में पुल बना रहा है चीन-रिपोर्ट

पैंगोंग झील पर अपने इलाके में पुल बना रहा है चीन-रिपोर्ट

ऑनलाइन समाचार पोर्टल द प्रिंट की एक खबर के मुताबिक चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के उसपार अपने इलाके में पैंगोंग झील पर एक पुल का निर्माण कर रहा है। दावे के मुताबिक चीन अपने खुरनक इलाके में जिस जगह पर पुल बना रहा है, वह झील का सबसे संकरा हिस्सा है। पोर्टल ने रक्षा और सुरक्षा संस्थानों के सूत्रों के हवाले से कहा है कि ड्रैकन पूर्व-निर्मित संरचनाओं के साथ इस मकसद के साथ पुल निर्माण कर रहा है, ताकि वह 2020 के अगस्त जैसे भारतीय सेना के ऑपरेशन वाली स्थिति से भविष्य में अपनी सेना का बचाव कर सके। तब भारतीय सेना ने पैंगोंग त्सो के दक्षिणी किनारे पर स्थित सभी महत्वपूर्ण चोटियों पर कब्जा जमा लिया था और ऊंचाइयों पर इसकी मौजूदगी की वजह से चीन की पीएलए को सांप सूंघ गया था। (पहली तस्वीर-पैंगोंग झील की प्रतीकात्मक तस्वीर)

पिछले साल फरवरी में दोनों सेनाएं पीछे हट गई थीं

पिछले साल फरवरी में दोनों सेनाएं पीछे हट गई थीं

दावे के मुताबिक निर्माणाधीन पुल के तैयार होने के बाद खुरनक से रुडोक के जरिए पैंगोंग के दक्षिण किनारे तक की दूरी 180 किलोमीटर कम हो जाएगी। मतलब तब खुरनक से रुडोक की दूरी पहले के करीब 200 किलोमीटर की जगह लगभग 40-50 किलोमीटर ही रह जाएगी। बता दें कि करीब 160 किलोमीटर लंबी पैंगोंग त्सो झील लद्दाख और तिब्बत दोनों के हिस्से में पड़ता है, जिनमें से एक-तिहाई से ज्यादा हिस्सा भारत में है और बाकी तिब्बत का है, जो अभी चीन के कब्जे में है। 2020 के जून में जब गलवान घाटी में चीन की सेना ने आक्रमकता दिखाई थी, उस दौर से यह इलाका भी भारत और चीन के बीच तनाव का कारण बन गया था। हालांकि पिछले साल फरवरी में दोनों देशों की सेनाएं आपसी चर्चा के बाद झील के दोनों किनारों से पीछे हट गई थीं।

पैंगोंग किनारे की चोटियों पर मात खा चुकी है पीएलए

पैंगोंग किनारे की चोटियों पर मात खा चुकी है पीएलए

सूत्रों के मुताबिक चीन तिब्बत के इलाके में लगातार सड़कों और पुलों का निर्माण कर रहा है, ताकि वह सेना और सैन्य सामग्रियों को तेजी से पहुंचा सके। चीन ऐसा क्यों कर रहा है इसकी जानकारी देते हुए सूत्र ने समझाया कि, 'अगस्त, 2020 में साउदर्न बैंक पर हमने उनकी कवच में एक खामी का इस्तेमाल किया था। चाइनीज तेजी से हमारी मूवमेंट और तैनाती से हक्के-बक्के रह गए थे। उन्हें ताकत जुटाने में 24 से 48 घंटे लग गए, और तबतक बहुत देर हो चुकी थी कि हमारा सामना कर सकें।' सूत्र ने आगे बताया कि 'शायद उन्होंने सबक सीख लिया है और क्योंकि वे अपनी गलतियों को सुधारने में तेज हैं, इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं कि उस क्षेत्र में उनका तेजी से मूवमेंट हो सके और बड़े पैमाने पर मौजूदगी बढ़ाने में सक्षम हों।'

चीन की संभावित चाल समझिए

चीन की संभावित चाल समझिए

सूत्र का यह भी कहना है कि जब 2020 के सितंबर के बाद से वहां दोनों देशों के बीच तनाव बरकरार था, तभी चीनियों ने महत्वपूर्ण चोटियों पर भारतीय सैनिकों की मौजूदगी के बावजूद उनकी नजरों से छिपाकर मोल्डो तक नया रोड बना लिया था। एक सूत्र के अनुसार, ' चीन ने सड़क का शुरुआती काम तनाव के दौरान ही कर लिया था और ब्लैक टॉपिंग का काम 2021 के मध्य में किया है।' सूत्रों का कहना है कि भविष्य में साउथ बैंक पर भारतीय सेना के संभावित ऑपरेशन को काउंटर करने के लिए पीएलए इस तरह के नए निर्माण कार्य में लगा हुआ है।

सैटेलाइट तस्वीरों में भी दिखी चीन की चाल

एक फॉरेन पॉलिसी मैगजीन के रिपोर्टर जैक डेट्स्च ने 21 दिसंबर, 2021 को सैटेलाइट तस्वीरों के साथ एक ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने लिखा था, 'अक्टूबर में सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें दिखाती हैं कि चीन पैंगोंग त्सो में अपनी मौजूदगी बढ़ाना जारी रखे हुए है, भारतीय सैनिकों के साथ पीछे हटने पर राजी होने के महीनों बाद भी।' इससे पहले लगातार ऐसी खबरें मीडिया में आती रही हैं कि एलएसी के उस पार चीन अपनी गतिविधियों को लगातर अंजाम देने में लगा हुआ है, जिसमें वह निर्माण की गतिविधियों को तो अंजाम दे ही रहा है, भारी हथियार भी जुटा रहा है।

भारत ने भी पैंगोंग झील तक बनाई है ये सड़क

भारत ने भी पैंगोंग झील तक बनाई है ये सड़क

वैसे भारत भी एलएसी के नजदीक अपनी तैयारियों को पुख्ता कर रहा है, जिसमें सड़कों, सुरंगों और बाकी रक्षा जरूरत संबंधी निर्माण शामिल हैं। पिछले नवंबर में ही पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के किनारे 28.10 किलोमीटर लंबी सभी मौसम में काम आने वाली सड़क के एक हिस्सा के निर्माण का काम पूरा हुआ था। करीब 11 किलोमीटर का काम और बाकी था। हालांकि, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्मित इस सड़क का निर्माण मूल रूप से स्थानीय निवासियों और सैलानियों की सुविधा के लिए किया जा रहा है, लेकिन चीन जैसे पड़ोसी के रहते इसकी सामरिक महत्त्व को भी समझा जा सकता है।

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