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ऑनलाइन निवेश बना ठगी का जाल, कैसे नए जमाने के फ्रॉड भारतीयों को बना रहे निशाना, सरकार क्या कर रही है?

Investment scams India: देशभर में निवेश से जुड़े ऑनलाइन घोटाले तेज़ी से बढ़ते जा रहे हैं। साइबर क्राइम यूनिट्स के आंकड़े बताते हैं कि हर महीने हजारों लोग फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स, नकली निवेश योजनाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जाल में फंस रहे हैं।

बीते कुछ महीनों में सामने आए कई बड़े मामलों ने दिखाया है कि कैसे सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर आम लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया जा रहा है।

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हैदराबाद से पुणे तक, करोड़ों की ठगी

तेलंगाना के हनुमकोंडा जिले के पार्कल इलाके में दो डॉक्टरों से 2.5 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी का मामला सामने आया। इन्हें एक प्रोफेशनल दिखने वाले स्टॉक ट्रेडिंग ऐप के जरिए निवेश के लिए राजी किया गया था। यह ऐप इंस्टाग्राम विज्ञापनों और व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए प्रमोट किया जा रहा था। शुरुआत में ऐप पर लगातार मुनाफा दिखाया गया, लेकिन जैसे ही डॉक्टरों ने पैसे निकालने की कोशिश की, उनसे अतिरिक्त भुगतान मांगा गया और बाद में ऐप तक उनकी पहुंच ही ब्लॉक कर दी गई। शिकायत साइबर क्राइम पुलिस तक पहुंची, जिसके बाद जांच शुरू हुई।

ऐसा ही मामला पुणे में सामने आया, जहां हिंजवाड़ी के एक 43 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर से करीब 60 लाख रुपये की ठगी हुई। सोशल मीडिया पर मिले लिंक से डाउनलोड किए गए एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप ने निवेश को 12 करोड़ रुपये तक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया। निकासी के समय 'टैक्स' के नाम पर पैसे मांगने के बाद ठग फरार हो गए। पुणे के ही चिखली इलाके में एक महिला से 55 लाख रुपये की ठगी 'ओटीसी ट्रेडिंग' के नाम पर की गई, जो एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ग्रुप्स के जरिए चलाई जा रही थी।

क्रिप्टो और शेल अकाउंट्स का इस्तेमाल

गुजरात में पुलिस ने हाल ही में एक आरोपी को गिरफ्तार किया, जिसने एक डॉक्टर से 1.11 करोड़ रुपये की ठगी की थी। जांच में पता चला कि रकम को कई बैंक खातों में घुमाकर और आंशिक रूप से क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर छिपाने की कोशिश की गई। हालांकि, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल कम्युनिकेशन के विश्लेषण से आरोपी तक पहुंच बनाई गई।

आंकड़े डराने वाले

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के अनुसार, सिर्फ छह महीनों में 30,000 से अधिक लोग निवेश घोटालों का शिकार हुए और करीब 1,500 करोड़ रुपये की चपत लगी। बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर और हैदराबाद सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों में शामिल हैं।

निवेश घोटाला होता क्या है?

निवेश घोटालों में ठग खुद को फाइनेंशियल एक्सपर्ट, ट्रेडर या किसी नामी कंपनी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को फर्जी योजनाओं में पैसा लगाने के लिए उकसाते हैं। व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर अचानक मिलने वाले मैसेज, हाई रिटर्न के वादे और यहां तक कि मशहूर हस्तियों के डीपफेक वीडियो तक का इस्तेमाल किया जा रहा है। ठग पहले भरोसा जीतते हैं, फिर ज्यादा निवेश के लिए दबाव बनाते हैं और अंत में गायब हो जाते हैं।

सरकार और एजेंसियों की कार्रवाई

बढ़ते मामलों को देखते हुए गृह मंत्रालय और I4C ने कई राज्यों में संयुक्त कार्रवाई तेज़ की है। साइबर क्राइम विंग्स ने फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स और निवेश नेटवर्क से जुड़े दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में जांच कर रहा है और कई खातों को फ्रीज़ किया गया है। इसके साथ ही, आम लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार एडवाइजरी जारी की जा रही है।

सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों का कहना है कि नए जमाने के निवेश घोटाले बेहद परिष्कृत हो चुके हैं। इसलिए जरूरी है कि निवेश से पहले प्लेटफॉर्म की वैधता जांची जाए, गारंटीड रिटर्न के वादों से बचा जाए और सोशल मीडिया पर मिले लिंक पर भरोसा न किया जाए। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल या पुलिस को सूचना देना ही नुकसान कम करने का सबसे कारगर तरीका है।

डिजिटल अर्थव्यवस्था के इस दौर में जहां अवसर बढ़े हैं, वहीं जोखिम भी। सरकार अपनी तरफ से कार्रवाई कर रही है, लेकिन जागरूक और सतर्क नागरिक ही इन नए जमाने के निवेश घोटालों से सबसे बड़ी सुरक्षा हैं।

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