चाय समोसा बेचकर गुजारा कर रहीं 50 से ज्यादा मेडल जीतने वाली कराटे चैंपियन वंदना सूर्यवंशी
भोपाल। वंदना सूर्यवंशी ने देश-विदेश में राष्ट्र के लिए काफी नाम कमाया। कराटे चैंपियन वंदना ने नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर 50 से ज्यादा मेडल जीते, लेकिन आज उन्हें कोई पूछने वाला नहीं है। हालत यह है कि वंदना को चाय का ठेला लगाकर जीविका चलानी पड़ रही है।

अधिकारी बदलते ही चली गई नौकरी
न्यूज 18 की खबर के मुताबिक, स्पोर्ट्स में वंदना सूर्यवंशी के योगदान को सम्मान देने के लिए आदिम जाति कल्याण विभाग ने उन्हें नौकरी दी थी। काम था आदिम जाति कल्याण विभाग के गर्ल्स हॉस्टल में सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देने का, लेकिन एक वरिष्ठ अधिकारी के बदलते ही वंदना को ट्रेनर पद से हटा दिया गया।

6 महीने का वेतन भी नहीं मिला
रिपोर्ट के मुताबिक, वंदना सूर्यवंशी को बिना कोई कारण बताए नौकरी से हटा दिया गया। इतना ही नहीं, उन्हें छह महीने का वेतन भी नहीं दिया गया। वंदना ने लगातार तीन महीनों तक अफसरों से गुहार लगाई, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। वह एसडीएम से भी मुलाकात कर छह महीने का वेतन देने की मांग कर चुकी है, पर उनकी मेहनत की कमाई भी उन्हीं नहीं दी जा रही है। नौबत अब यहां तक आ गई वंदना पति के साथ चाय और समोसे बेचकर परिवार पाल रही हैं। वह चाहती हैं कि भले ही उन्हें वेतन न दिया जाए, लेकिन छात्राओं की सुरक्षा के लिए ही सही कम से कम उन्हें छात्रावास में ट्रेनिंग की इजाजत ही दे दी जाए।

बेट-बेटी को सिखा रही हैं कराटे
वंदना ने बताया कि उन्हें चाय बेचते हुए कई साल हो गए हैं। उनका एक बेटा है और एक बेटी। वह बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ रही हैं। उन्हें कराटे भी सिखा रही हैं। वह कहती हैं कि वह अब कोचिंग भी कर रही हैं और बच्चों को सिखा रही हैं। उन्होंने कहा, 'मैंने टीवी में देखा उसके बाद कराटे सीखने का मन हुआ।'

परिवार के साथ किराए के घर में रहती हैं वंदना
वंदना सूर्यवंशी के पति ने बताया कि उनकी पत्नी सुबह पांच बजे उठती हैं और रात 1 बजे सोती हैं। वंदना पति और बच्चों के साथ किराए के घर में रहती हैं। उन्होंने बताया कि वह काफी कुछ करना चाहती थीं, लेकिन जल्दी शादी होने की वजह से उनके सपने अधूरे रह गए।












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