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क्या आपको पता है कि कागज का नहीं होता नोट? जानिए रुपए और सिक्कों से जुड़े दिलचस्प तथ्य

नई दिल्ली, 06 सितंबर। करेंसी यानि मुद्रा हर कोई अपने पास अधिक से अधिक इकट्ठा करना चाहता है। लोग इसके इकट्ठा करने के लिए काफी मेहनत करते हैं। लोग कड़ी मेहनत करके इसके कमाते हैं, अपने पास इकट्ठा करते हैं और फिर अपनी जरूरत के अनुसार जो मन आए उसे खरीदते हैं। भारत में करेंसी के इतिहास की बात करें तो यह काफी दिलचस्प और शानदार है। भारत में करेंसी के इतिहास की बात करें तो इसे शुरुआती सभ्यता में ही 7-8वीं ईसा पूर्व में ही सिक्कों की प्रचलन देखने को मिलता है और तबसे भारत में सिक्कों का इस्तेमाल हो रहा है।

दशकों पुराना है सिक्कों का इतिहास

दशकों पुराना है सिक्कों का इतिहास

पिछली कई सदियों में भारतीय सिक्के और करेंसी के इतिहास ने लंबा सफर तय किया है। प्राचीन समय में कौड़ी का इस्तेमाल पैसों के लेन-देन में किया जाता था। इसके बाद सोने कई ईंट और सिक्कों का भी इस्तेमाल किया जाने लगा। दक्षिण के चोल वंश की बात करें तो इस वंश ने सिक्कों की खूबसूरती को सबसे ज्यादा निखारा, जिसे आज भी काफी पसंद किया जाता है। पिछले कई दशक के बात करें तो भारत में पैसे का रूप लगातार बदलता रहा है। अंग्रेजों के शासन में भी सिक्के के अलग-अलग रुप को देखने को मिला।

पहला रुपए का सिक्का 1540 में बना

पहला रुपए का सिक्का 1540 में बना

इन तमाम बदलाव के बीच भारत में रुपए का इतिहास हमेशा बना रहा और इसका मूल रूप हमेशा बरकरार रहा। रूपया शब्द संस्कृत भाषा के रौप्य से लिया गया है। इसका अर्थ होता है चांदी का सिक्का। कई सदियों के बदलाव के बाद आखिरकार शेरशाह सूरी ने पहली बार चांदी का सिक्का जारी किया था। यह चांदी का सिक्का 1540-45 में जारी किया गया था। इसे उस वक्त रूपया का नाम दिया गया। इस सिक्के के साथ ही भारत में आधुनिक सिक्के की शुरुआत हुई।

1949 में छपा पहला नोट

1949 में छपा पहला नोट

सिक्कों के बाद भारत में पहली बार 1949 में रुपए का नोट छापा गया। सबसे पहले भारत में एक रुपए का नोट छापा गया। इसपर लॉयन कैपिटल का भी चिन्ह बना हुआ था। अलग-अलग देशों की करेंसी की बात करें तो उनकी करेंसी का अलग निशान यानि चिन्ह होता है। जैसे डॉलर, यूरो, पाउंड आदि। लेकिन भारत के पास रुपए का अपना चिन्ह नहीं था, जिसके बाद इसके चिन्ह की तलाश की शुरुआत हुई।

रुपए के सिंबल की कहानी

रुपए के सिंबल की कहानी

वर्ष 2010 तक भारत के पास कोई भी रुपए का निशान नहीं था। लेकिन भारत सरकार ने रुपए के निशान का डिजाइन बनाने का फैसला लिया और इसके लिए देशभर के लोगों को आमंत्रित किया। भारतीय डिजाइनर उदय कुमार ने भारतीय रूपए के सिंबल को डिजाइन किया। उन्होंने अंग्रेज के अक्षर 'R' से रुपए के सिंबल को तैयार किया। इस सिंबल को देवनागरी के र और रोमन के R से लिया गया। हालांकि इससे उद्धावर लाइन को हटा लिया गया और इसके उपर दो समानांतर रेखा खींच दी गई। यह समानांत रेखा भारतीय ध्वज का प्रतीक है, जोकि बराबर होती है।

कागज से नहीं बनता है रुपया

कागज से नहीं बनता है रुपया

बहुत ही कम लोगों को पता होगा कि भारतीय रुपया कागज से नहीं बनता है। यह सुनकर आप चौंक गए होंगे लेकिन यही सच है। दरअसल रुपए को कागज से नहीं बल्कि कॉटन से बनाया जाता है और यही वजह है कि इसे पानी पर डालने के बाद भी यह खराब नहीं होता है। अक्सर आपने देखा होगा कि आपका नोट पैंट का कपड़े की किसी जेब में रह जाता है और धुलने के बाद भी यह खराब नहीं होता और सूखने के बाद वापस सामान्य नोट की तरह हो जाता है।

15 भाषाओं में लिखा होता है रुपया

15 भाषाओं में लिखा होता है रुपया

नोट पर छपी भाषा की बात करें तो इसपर 15 अलग-अलग भाषाओं में रुपया लिखा होता है। साथ ही हर नए नोट पर अलग-अलग तस्वीर छपी होती है। नोट पर भारत की सांस्कृतिक प्रतीक, वैज्ञानिक उपलब्धि को छापा जाता है। 2000 रुपए के नोट पर मंगल यान की तस्वीर छपी होती है। जबकि 500 के नोट पर लाल किले की तस्वीर छपी होती है। इसी तरह से अलग-अलग ऐतिहासिक स्थलों की तस्वीर भी नोट पर छपी होती है।

 सिक्कों के बनने की जगह

सिक्कों के बनने की जगह

बहुत कम लोगों ने इस बात पर ध्यान दिया होगा कि भारतीय सिक्कों पर एक चिन्ह बना होता है जिससे इस बात की जानकारी मिलती है कि यह सिक्का कहां पर तैयार किया गया है। सिक्के के नीचे एक गोल सा डॉट बना होता है जिसका मतलब होता है कि यह सिक्का नोएडा में बना है। जबकि सिक्के पर छोटा सा डायमंड प्रतीक बना होता है इसका मतलब होता है कि यह सिक्का मुंबई में तैयार किया गया। जबकि स्टार का मतलब होता है कि हैदराबाद में बना होता है। अगर सिक्के पर कोई निशान ना हो तो यह कोलकाता में बना होता है।

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