Indus Treaty: भारत कैसे सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का पानी पाकिस्तान जाने से रोकेगा? क्या कहते हैं एक्सपर्ट
Indus Waters Treaty (IWT): 'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकता', सिंधु जल संधि का जिक्र करते हुए 2016 में पाकिस्तान प्रायोजित उरी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये बात कही थी। लेकिन इस संधि को खत्म करने का फैसला नहीं लिया था। इस हमले में 18 भारतीय सैनिक मारे गए थे। अब 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पहली बार सिंधु जल समझौता (IWT) को खत्म कर दिया है।
भारत ने साफ कह दिया है कि भारत से पानी की एक भी बूंद पाकिस्तान में नहीं जाएगी। लेकिन ऐसे कुछ अहम सवाल उठ रहे हैं, अब जब भारत ने सिंधु जल संधि पर रोक लगा दी है, जिसके तहत पाकिस्तान को सिंधु प्रणाली की पश्चिमी नदियों सिंधु, चिनाब और झेलम पर नियंत्रण दिया गया था...तो इन नदियों का पानी भारत पाकिस्तान जाने से कैसे रोकेगा? क्या भारत सच में सिंधु, झेलम और चिनाब नादियों के पानी को रोक सकता है और इसका इस्तेमाल कर सकता है? भारत कब तक पाकिस्तान का पानी बंद करेगा? आइए समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर ये सब कैसे होगा? सरकार का प्लान ऑफ एक्शन क्या है?

सिंधु जल संधि को लेकर सरकार का क्या है प्लान ऑफ एक्शन?
🔵 पीटीआई-भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने कहा कि केंद्र तीन नदियों के पानी की मात्रा का उपयोग अधिकतम करने के तरीकों पर विचार करने के लिए एक अध्ययन करने की योजना बना रहा है, जिसका उपयोग पाकिस्तान ने पहले सिंधु जल संधि के तहत किया था। यह प्रस्ताव शुक्रवार (25 अप्रैल) को गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक में किया गया, जिसमें 1960 की सिंधु जल संधि पर भविष्य की कार्रवाई पर चर्चा की गई है।
🔵 विश्व बैंक की मध्यस्थता वाली संधि के तहत भारत को पूर्वी नदियों, सतलुज, ब्यास और रावी के पानी पर विशेष अधिकार दिए गए थे, जो औसतन लगभग 33 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) का वार्षिक प्रवाह है। पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी, जिसका औसत वार्षिक प्रवाह लगभग 135 एमएएफ है, बड़े पैमाने पर पाकिस्तान को आवंटित किया गया था।
🔵 संधि के स्थगित होने के बाद सरकार सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी का उपयोग करने के तरीकों पर विचार कर रही है। उच्च स्तरीय बैठक के बाद जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने की रणनीति पर काम कर रही है कि पानी की एक भी बूंद पाकिस्तान में न जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई निर्देश जारी किए हैं और बैठक उन्हीं पर अमल करने के लिए आयोजित की गई है।
🔵 अमित शाह ने बैठक में उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कई सुझाव दिए। बैठक के बाद जल शक्ति मंत्री ने कहा, "हम यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत से पानी की एक भी बूंद पाकिस्तान में न जाए।" सूत्रों ने कहा कि सरकार अपने निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए दीर्घकालिक योजना पर काम कर रही है।
🔵 एक अधिकारी के अनुसार, मंत्रालय को तीन पश्चिमी नदियों के पानी का उपयोग करने के तरीकों पर विचार करने के लिए एक अध्ययन करने के लिए कहा गया है। विशेषज्ञों ने बुनियादी ढांचे की कमी के बारे में बात की है जो संधि को निलंबित करने के फैसले से मिलने वाले पानी का पूरी तरह से उपयोग करने की भारत की क्षमता को सीमित कर सकती है।
सिंधु जल समझौता रोकने पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
🔴 विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि भारत के पास अब पश्चिमी नदियों (सिंधु, चिनाब और झेलम) पर भंडारण और जल मोड़ने संबंधी बुनियादी ढांचे का निर्माण करने के लिए कानूनी और कूटनीतिक गुंजाइश है। लेकिन किस्तान की ओर जाने वाले पानी को अहम रूप से बदलने की इसकी क्षमता मौजूदा बुनियादी ढांचे संबंधी बाधाओं और बड़े पैमाने पर परियोजनाओं को विकसित करने के लिए आवश्यक समय के कारण सीमित है।
🔴 एक्सपर्ट का ये भी कहना है कि भारत द्वारा IWT को स्थगित करने से ये भारत को नए भंडारण और मोड़ विकल्पों की खोज करने की अनुमति मिलेगी। हालांकि, भारत का मौजूदा जलविद्युत बुनियादी ढांचा पश्चिमी नदियों के पानी को रोकने में सफल नहीं हो पाएगा।
🔴 साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल (एसएएनडीआरपी) के हिमांशु ठक्कर ने कहा, "असली मुद्दा पश्चिमी नदियों के साथ है, जहां बुनियादी ढांचे की सीमाएं हमें पानी के प्रवाह को तुरंत रोकने से रोकती हैं। चेनाब बेसिन में हमारे पास कई परियोजनाएं चल रही हैं, जिन्हें पूरा होने में पांच से सात साल लगेंगे। तब तक, गुरुत्वाकर्षण द्वारा पानी पाकिस्तान में बहता रहेगा। एक बार जब ये चालू हो जाएंगे, तो भारत के पास नियंत्रण तंत्र होगा जो वर्तमान में मौजूद नहीं है।
🔴 पर्यावरण कार्यकर्ता और मंथन अध्ययन केंद्र के संस्थापक श्रीपद धर्माधिकारी ने भी यह मानने के खिलाफ चेतावनी दी है कि भारत पानी के प्रवाह को तेजी से मोड़ सकता है। उन्होंने कहा, "वर्तमान में, हमारे पास पाकिस्तान में पानी के प्रवाह को रोकने के लिए आवश्यक प्रमुख बुनियादी ढांचे का अभाव है।''
सिंधु जल समझौता के खत्म होने से पाकिस्तान क्यों घबराया हुआ है?
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के प्रमुख बिलावल भुट्टो द्वारा दी गई धमकी से पता चलता है कि सिंधु जल प्रणाली पाकिस्तान के अस्तित्व के लिए कितना जरूरी है। भुट्टो ने कहा, "या तो हमारा पानी इसमें बहेगा या उनका खून बहेगा।"
सिंधु नदी प्रणाली के लगभग 93% पानी का उपयोग पाकिस्तान द्वारा सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। इसकी लगभग 80% सिंचित भूमि इसके जल पर निर्भर है। इसकी अर्थव्यवस्था मुख्यत कृषि पर आधारित है।












Click it and Unblock the Notifications