Indus Waters Treaty: भारत ने रोकी सिंधु जल संधि, पाकिस्तान अब क्या करेगा आगे? क्या है उसके पास विकल्प
Indus Waters Treaty: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने कड़ा फैसला लेते हुए सिंधु जल संधि (IWT) को रोक कर अभूतपूर्व और साहसिक कदम उठाया है। पहलगाम हमलों के जवाब में भारत ने पहली बार 1960 की सिंधु जल संधि को रोका है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 23 अप्रैल को कहा, ''1960 की सिंधु जल संधि तत्काल प्रभाव से स्थगित रहेगी, जब तक कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को अपना समर्थन देने से पूरी तरह से और पूरी तरह से इंकार नहीं कर देता।''
उरी हमले में 18 सैनिकों की मौत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंधु जल संधि बैठक में कहा था कि "खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।'' अब जब भारत ने संधि को स्थगित कर दिया है तो ऐसी परिस्थितियों में सवाल उठता है कि पाकिस्तान के पास वास्तव में क्या विकल्प हैं? अब गुरुवार 24 अप्रैल को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में इस्लामाबाद में हुई नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक में इसके बारे में जानकारी दी गई है।

इस बैठक में पाकिस्तान ने भारत के साथ द्विपक्षीय समझौतों को निलंबित करने, हवाई क्षेत्र और सीमाओं को बंद करने और हर तरह के बिजनेस को बंद करने की घोषणा की है। इस बैठक में सिंधु जल संधि को निलंबित करने के भारत के फैसलों को पाकिस्तान की सरकार ने नामंजूर किया है। इसके साथ ही पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने बताया है कि वो सिंधु जल संधि को लेकर अब आगे क्या करने वाले हैं?
सिंधु जल समझौता को लेकर क्या बोला पाकिस्तान?
पाकिस्तान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया है कि सिंधु जल संधि को रोकने के भारत के फैसलों को हम स्वीकार नहीं करते हैं। इस संधि के तहत पाकिस्तान के हिस्से से पानी के प्रवाह को रोकने या मोड़ने की कोई भी कोशिश युद्ध की कार्रवाई मानी जाएगी और पाकिस्तान इसपर पूरी ताकत से जवाब देगा।
बयान में यह भी कहा गया है कि भारत अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों की जानबूझकर अवहेलना कर रहा है। भारत की गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार को देखते हुए हम भी पाकिस्तान शिमला समझौते सहित भारत के साथ सभी द्विपक्षीय समझौतों को निलंबित करने के अधिकार का इस्तेमाल करेंगे।
भारत ने रोका सिंधु जल समझौत: पाकिस्तान के पास क्या है विकल्प?
🔴 विश्व बैंक द्वारा संचालित सिंधु जल संधि में यह जिक्र नहीं किया गया है कि संयुक्त राष्ट्र की न्यायिक शाखा, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ), हस्तक्षेप कर सकती है, इसमें त्रिस्तरीय समाधान तंत्र स्थापित किया गया है।
🔴 त्रिआयामी तंत्र के मुताबिक दोनों देशों के आयुक्तों से मिलकर बना स्थायी सिंधु आयोग (पीआईसी) दोनों देशों के बीच के जल बंटवारे विवादों को हल करने के लिए प्रारंभिक कोशिश कर सकते हैं।
🔴 अगर स्थायी सिंधु आयोग (पीआईसी) द्वारा मुद्दे को हल करने में विफलता मिलती है, तो इसे विश्व बैंक के विशेषज्ञों के पास समझौता के लिए भेजा जाता है। जैसा कि पहले भी किशनगंगा और रातले जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए विवादों में हुआ था। उस दौरान विश्व बैंक के विशेषज्ञों ने नई दिल्ली की स्थिति का समर्थन किया - जो भारत के लिए एक स्वागत योग्य फैसला था।
🔴 भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) के मुताबिक "तटस्थ विशेषज्ञ का अपनी क्षमता के भीतर सभी मामलों पर निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होगा।"
🔴 आखिर में मामले को अनुच्छेद IX के प्रावधानों के तहत हेग में स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (पीसीए) में ले जाया जा सकता है। किशनगंगा और रैटल जलविद्युत परियोजनाओं पर नवीनतम विवाद में, पाकिस्तान तटस्थ विशेषज्ञ के बजाय पीसीए से संपर्क करना चाहता था। एमईए ने कहा, "जब तक कि पक्षों के बीच अन्यथा सहमति न हो, मध्यस्थता न्यायालय में नियुक्त सात मध्यस्थ होंगे।"












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