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Indias Citizenship Give Up: 5 सालों में 9 लाख भारतीयों ने क्यों छोड़ी नागरिकता?आंकड़े-वजह चौंकाने वाले

Indias Citizenship Give Up Explainer: अपना देश छोड़ना और हमेशा के लिए उसकी नागरिकता त्यागना कोई आसान फैसला नहीं होता। फिर भी, पिछले कुछ सालों में हजारों भारतीय हर साल विदेशी नागरिकता अपनाने के लिए अपना भारतीय पासपोर्ट सरेंडर कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2020 से 2024 तक करीब 9 लाख (8,96,843) भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ दी।

यह ट्रेंड कोविड महामारी के बाद और तेज हुआ है, जहां 2022 से हर साल 2 लाख से ज्यादा लोग नागरिकता त्याग रहे हैं। आइए, इस पूरे मुद्दे को विस्तार से समझते हैं - आंकड़े क्या कहते हैं, मुख्य वजहें क्या हैं और इसका भारत पर क्या असर पड़ रहा है...

India citizenship give up

Indias Citizenship Give Up Timeline Breakdown: आंकड़े क्या बताते हैं? साल-दर-साल ब्रेकडाउन

विदेश मंत्रालय (MEA) ने राज्यसभा और लोकसभा में लिखित जवाब में साल 2011 से 2024 तक के आंकड़े पेश किए। इनमें साफ दिखता है कि कोविड से पहले संख्या स्थिर थी, लेकिन पोस्ट-कोविड दौर में उछाल आया:-

क्रमांक साल नागरिकता त्यागने वालों की संख्या
1
2020 85,256
2
2021 1,63,370
3
2022 2,25,620
4
2023 2,16,219
5
2024 2,06,378
6
कुल (2020-2024) 8,96,843 (करीब 9 लाख)
  • कुल 2011 से 2024 तक: 20.6 लाख (2.06 मिलियन) से ज्यादा भारतीयों ने नागरिकता छोड़ी।
  • 2011 से 2019 तक: औसतन 1.2 लाख से 1.45 लाख प्रति वर्ष (कुल करीब 11.89 लाख)।
  • कोविड वर्ष 2020 में गिरावट आई (ट्रैवल रेस्ट्रिक्शंस और कांसुलेट बंद होने से), लेकिन 2021 से तेज बढ़ोतरी।
  • 2024 में थोड़ी कमी आई, लेकिन फिर भी महामारी से पहले के स्तर से काफी ज्यादा।

यह डेटा विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में पेश किया। मंत्रालय के अनुसार, ये आंकड़े पासपोर्ट सरेंडर और नागरिकता त्याग के प्रमाणपत्रों पर आधारित हैं।

Indias Citizenship Give Up Reasons: नागरिकता छोड़ने की मुख्य वजहें क्या हैं?

सरकार का कहना है कि 'कारण व्यक्तिगत हैं और सिर्फ व्यक्ति को ही पता होते हैं' । कई लोग 'व्यक्तिगत सुविधा' के लिए विदेशी नागरिकता लेते हैं। लेकिन विशेषज्ञ और रिपोर्ट्स से कुछ प्रमुख वजहें सामने आती हैं:-

  • दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है: भारत दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं देता। अगर कोई अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या यूके जैसी देशों की नागरिकता लेता है (जहां ड्यूल सिटीजनशिप नहीं चलती), तो भारतीय पासपोर्ट सरेंडर करना जरूरी होता है।
  • बेहतर अवसर और जीवन स्तर: विदेशों में बेहतर नौकरियां, शिक्षा, हेल्थकेयर, सोशल सिक्योरिटी और स्थायी बसावट के लिए। खासकर हाई-स्किल्ड प्रोफेशनल्स (IT, मेडिसिन, इंजीनियरिंग) ब्रेन ड्रेन का शिकार हो रहे हैं।
  • परिवार और स्थायित्व: विदेश में बसे परिवारों के साथ रहने, बच्चों की बेहतर परवरिश और लंबे समय की स्थिरता के लिए। OCI (Overseas Citizen of India) कार्ड मिलता है, जो वीजा-फ्री ट्रैवल और कुछ अधिकार देता है, लेकिन वोटिंग, सरकारी नौकरी या चुनाव लड़ने का हक नहीं।
  • पोस्ट-कोविड उछाल: महामारी के दौरान इमिग्रेशन प्रोसेस रुके थे, लेकिन बाद में बैकलॉग क्लियर होने से संख्या बढ़ी।

मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत 'ज्ञान अर्थव्यवस्था के युग में वैश्विक कार्यक्षेत्र की क्षमता को मान्यता देता है' और प्रवासी भारतीयों से जुड़ाव बढ़ा रहा है।

पॉपुलर डेस्टिनेशंस कौन से?

ज्यादातर लोग इन देशों की नागरिकता ले रहे हैं:

  • अमेरिका
  • कनाडा
  • ऑस्ट्रेलिया
  • यूनाइटेड किंगडम
  • यूरोपीय देश

ये देश मजबूत पासपोर्ट, बेहतर सैलरी और लाइफस्टाइल ऑफर करते हैं।

भारत पर क्या असर?

  • ब्रेन ड्रेन: 1970 के दशक से चला आ रहा यह ट्रेंड 2020 के दशक में पीक पर है। हाईली एजुकेटेड और अमीर भारतीय (HNIs) विदेश जा रहे हैं।
  • रेमिटेंस का फायदा: विदेशी भारतीयों से भारत को रेमिटेंस (2023 में करीब 125 बिलियन डॉलर) मिलता है, जो अर्थव्यवस्था को बूस्ट देता है।
  • चिंता का विषय: जीवन गुणवत्ता, वेतन समानता और सोशल सिक्योरिटी में सुधार की जरूरत। कई लोग भावनात्मक रूप से जुड़े रहना चाहते हैं, लेकिन मजबूरी में नागरिकता छोड़ते हैं।

Online Application Process: क्या है ऑनलाइन अप्लाई का प्रोसेस?

  • ऑनलाइन अप्लाई करें (indiancitizenshiponline.nic.in)।
  • पासपोर्ट सरेंडर करें, फीस चुकाएं।
  • जिला कलेक्टर या कांसुलर ऑफिसर वेरिफाई करते हैं।
  • त्याग के बाद OCI कार्ड के लिए अप्लाई कर सकते हैं।

यह ट्रेंड बताता है कि ग्लोबलाइजेशन के दौर में लोग बेहतर अवसरों की तलाश में हैं। सरकार इसे व्यक्तिगत फैसला मानती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू सुधारों से इसे रोका जा सकता है। फैंस और एनालिस्ट्स इस पर बहस कर रहे हैं कि क्या भारत को ड्यूल सिटीजनशिप पर विचार करना चाहिए? आगे की घटनाएं बताएंगी।

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