अब ट्रेनों में यात्रियों को नहीं मिलेंगे गंदे और बदबूदार कंबल, रेलवे ने लिया बड़ा फैसला
ट्रेनों में सफाई की व्यवस्था को ध्यान में रखने के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। अब एसी कोच में मिलने वाले कंबलों की धुलाई अब महीने में दो बार होगी। रेलवे ने कंबल को धुलने के अनुकूल बनाने के लिए हाल ही में उसके कपड़े में बदलाव किया है।

नई दिल्ली। ट्रेनों में सफाई की व्यवस्था को ध्यान में रखने के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। अब एसी कोच में मिलने वाले कंबलों की धुलाई अब महीने में दो बार होगी। रेलवे ने कंबल को धुलने के अनुकूल बनाने के लिए हाल ही में उसके कपड़े में बदलाव किया है। इसके अलाव अब कंबल को दो सालों पर बदल दिया जाएगा, जो पहले चार सालों पर बदला जाता था। रेलवे ने ये कदम गंदे कंबल मिलने की बढ़ती शिकायतों के बाद उठाया है।

अब महीने में दो बार धुलेंगे कंबल
अब एसी कोच में मिलने वाले कंबल की धुलाई महीने में दो बार होगी। अभी तक ये कंबल दो महीने में एक बार धोए जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। रेलवे ने कंबलों की गुणवत्ता में सुधार करने के साथ-साथ इसकी सफाई के लिए भी बड़े कदम उठाए हैं। ट्रेनों के एसी कोच में मिलने वाले कंबल के कपड़े में बदलाव किया गया है, ताकी उसे धुलाई के अनुकूल बनाया जा सके। नए कंबल वुलन और नाइलॉन का मिक्स होंगे जिससे उनमें किसी तरह की बदबू नहीं आएगी।

नए कंबलों का डबल होगा दाम
रेलवे अभी इन कंबलों की कॉस्ट 400 रुपये प्रति कंबल पड़ती है। वहीं कपड़े में बदलाव के बाद नए कंबलों की कॉस्ट काफी हद तक कम हो जाएगी, लेकिन ये आपकी जेब पर भारी पड़ेंगे। ट्रेनों में जो नए कंबल दिए जाएंगे उसका दाम यात्रियों को मौजूदा कंबल से डबल पड़ेगा। रेलवे ने पिछले 10 सालों से कंबलों के रेट में बढ़ोतरी नहीं की है। इसलिए नए कंबल नए रेट के साथ ही जारी किए जाएंगे।

कैग ने अपनी रिपोर्ट में लगाई थी फटकार
इसके अलावा इन कंबलों का जीवनकाल भी ज्यादा होगा। पहले के कंबल चार वर्षों के लिए दिए जाते थे, वहीं नए कंबल केवल दो वर्षों के लिए दिए जाएंगे। रेलवे के एक अधिकारी ने कहा, 'हमारा मकसद सभी ट्रेनों में यात्रियों को साफ-धुले हुई बेडिंग देना है। यात्रियों को अच्छी क्वालिटी की बेडिंग देने की दिशा में काम किया जा रहा है।' हाल ही में कैग ने रिपोर्ट में रेलवे में मिलने वाले गंदे कंबलों के बारे में कहा था। कैग की रिपोर्ट में कहा गया था कि कुछ कंबलों को देखकर ऐसा लगता है कि वो 6 महीने से नहीं धुले हैं।

नियमित आधार पर स्वच्छ किया जाएगा
रेलवे को फिलहाल रोजाना 3.90 लाख कंबलों की जरूरत पड़ती है। इसकी धुलाई को ध्यान मं रखते हुए रेलवे कई स्टेशनों में मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री खोलने का भी फैसला लिया है। फिलहाल ऐसी 50 लॉन्ड्री हैं और 10 नई लॉन्ड्री और खोली जाएंगी। कंबल के जीवनकाल और फील्ड एक्सीपीरियंस को देखते हुए कंबलों में एक साल बाद फिर बदलाव किया जाएगा। इसके अलावा आगे उपयोग के लिए दिए जाने से पहले इस्तेमाल किए गए कंबलों को नियमित आधार पर स्वच्छ किया जाएगा।
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