अमेरिका में बनी दूसरी पीढ़ी की सस्ती कोरोना वैक्सीन का क्लिनिकल ट्रायल शुरू करेगा भारत
भारत बहुत जल्द अमेरिका के एक्सटन बायोसाइंस की सेकेंड जनरेशन की कोरोना वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल शुरू करेगा।
नई दिल्ली, 2 नवंबर। भारत बहुत जल्द अमेरिका के एक्सटन बायोसाइंस की सेकेंड जनरेशन की कोरोना वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल शुरू करेगा। दरअसल जहां एक तरफ इस वैक्सीन का उत्पादन बेहद सस्ता है, वहीं इम्युनिटी कम होने पर इसे दोबारा भी दिया जा सकता है और इसे सुरक्षित रखने के लिए रेफ्रिजरेटर की भी जरूरत नहीं होती है।

जांच के लिए कसौली स्थित लैब भेजे गए वैक्सीन के सैंपल
वैक्सीन का ट्रायल शुरू करने से पहले वैक्सीन के सैंपलों को सुरक्षा के मद्देनजर जांच के लिए कसौली स्थित सेंट्रल ड्रग्स लैबोरेटरी भेजा गया है। AKS-452 नाम की यह वैक्सीन 25 डिग्री तापमान पर कम से कम 6 महीने तक रह सकती है और एक महीने के लिए 37 डिग्री सेल्सियस पर यह प्रभावशाली बनी रहती है।
देश में 12 जगहों पर शुरू होगा ट्रायल
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इसके सैंपल को कसौली स्थित लैब में भेजा गया है और एक महीने में देश की 12 जगहों पर इसका ट्रायल शुरू हो जाएगा। भारत में दूसरे और तीसरे चरण के तहत इसका कुल सैम्पल साइज 1600 लोग हैं, जिसे पूरा होने में करीब एक साल लग जाएगा।
गरीब देशों के लिए वरदान साबित होगी वैक्सीन
उन्होंने आगे कहा कि शायद भारत को इस वैक्सीन के घरेलू इस्तेमाल की आवश्यकता न पड़े, लेकिन गरीब और मध्यम वर्गीय आय वाले देशों के लिए भारत इसका उत्पादन और निर्यात कर सकता है। इस वैक्सीन का ट्रायल महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, राजस्थान और गुजरात के अस्पतालों में शुरू होने की उम्मीद है।
अगर यह वैक्सीन प्रभावशाली साबित होती है तो ऐसे दोशों में जहां वैक्सीन स्टोरेज के लिए पर्याप्त ढांचा नहीं है, वहां यह वरदान साबित हो सकती है। कंपनी का दावा है कि यह वैक्सीन कमरे के तापमान पर 6 महीने तक स्थिर रह सकती है। वहीं केन्या जैसे गर्म देशों के लिए यह वैक्सीन आदर्श साबित होगी क्योंकि बगैर रेफ्रीजरेटर के यह एक महीने तक सुरक्षित रहसकती है। इसके अलावा इसे आसानी ले लाया और ले जाया जा सकेगा।












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