Coronavirus Impact: भारत को मिला बड़ा मौका, दवा बाजार पर चीन की पकड़ होगी कमजोर!
नई दिल्ली। भारत इस समय अमेरिका, ब्राजील और इजरायल समेत दुनिया के 30 देशों को मलेरिया की दवाई हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन सप्लाई कर रहा है। कोरोना वायरस महामारी के बीच ही इस दवा की मांग में तेजी से इजाफा हुआ है। भारत अब दुनियाभर के लिए दवाईयों का बड़ा बाजार बन, चीन को इस लिस्ट से हटाने की कोशिशों में लग गया है। भारत प्रयास कर रहा है दवाईयों के निर्माण में प्रयोग होने वाले कच्चे माल का उत्पादन तेजी से किया जा सके ताकि लोग देश को चीन के विकल्प के तौर पर देखें।

चीन में बंद पड़ी हैं दवा फैक्ट्रियां
चीन में कोविड-19 की वजह से फैक्ट्रियां बंद हैं और ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दवाईयों का प्रोडक्शन करने वाली कंपनियों पर खासा असर पड़ रहा है। भारत सरकार ने इस मौके को समझकर एक ऐसी नीति को लागू करना शुरू कर दिया है जिसके बाद लोकल लेवल पर आउटपुट में तेजी आ सकेगी। ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में इस योजना को जानने वाले लोगों परनजर रखने वाले कुछ लेगों के हवाले से लिखा कि इस 'चाइना प्लस वन' रणनीति के तहत दवाईयों के लिए जरूरी पदार्थों, घरेलू मैन्यूफैक्चर्स को प्रोत्साहित करना और बीमार पड़ चुके राज्य स्तर के दवा निर्माताओं को फिर से जीवित करना शामिल है।

चीन पर निर्भरता को कम करने की कोशिशें
जानलेवा कोरोना वायरस की वजह से चीन की अर्थव्यवस्था पर खासा असर पड़ रहा है। ग्लोबल सप्लाई चेन लगभग खत्म होने के कगार पर आ चुकी हैं क्योंकि एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था खामोश है। ऐसे में भारत के पास अच्छा मौका है जो दुनिया को जेनेरिक दवाईयों की सप्लाई करने वाला अकेला देश है। कोरोना वायरस की वजह से कच्चे माल की कमी सामने आई और साथ ही इस बात की पता लगा कि कैसे आज भी हम इस मामले में चीनी आयातित सामानों पर निर्भर हैं। भारत, दवाईयों के निर्माण में प्रयोग होने वाले कच्चे माल के लिए चीन पर ही निर्भर है। चीन से आने वाले सामान की वजह से भारत दुनिया में दवाईयों को निर्यात कर पाता है।

70 प्रतिशत कच्चा माल आता चीन से
दवाईयों को बनाने में जिस केमिकल का प्रयोग होता है, भारत उसका 70 प्रतिशत हिस्सा चीन से आयात करता है। सिर्फ इतना ही नहीं इसका एक बड़ा हिस्सा उसी हुबेई प्रांत से आता है जहां पर कोरोना वायरस ने सबसे पहले दस्तक दी थी। संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक साल 2018 और 2019 में भारत ने इस तरह के उत्पादों के आयात में 3.56 बिलियन डॉलर खर्च किए, जिसमें से चीन का हिस्सा 2.4 बिलियन डॉलर था। वर्तमान संकट ने भारत को मौका दिया है कि दवाईयों के निर्माण में तैयार होने वाले उत्पादों के क्षेत्र में चीन की मजबूत पकड़ को चुनौती दे सकता है।

सरकार ने तय किया 140 अरब का फंड
भारत की तरफ से पिछले माह 140 अरब रुपयों के साथ फंड निर्धारित किया गया था। इस फंड की मदद से दवाईयों का निर्माण करने वाली तीन मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स को स्थापित किया जाएगा। सरकार ने 53 अहम शुरुआती पदार्थों की पहचान की और एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रिडियंट्स यानी एपीआई को भी चिन्हित किया गया। उत्पादों को प्राथमिकता के आधार पर तैयार किया जाएगा। इसमें बुखार की दवा पैरासिटामोल और एंटी-बायोटिक्स जैसे पेनिसिलीन और सिप्रोफ्लोक्सिन शामिल है।












Click it and Unblock the Notifications