क्रेटा-फॉर्च्यूनर और मारुति मालिक सावधान! देश में कार चोरी दोगुनी, ऐसे चल रहा हाई-टेक गैंग का खेल
भारत में कार चोरी का ग्राफ खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। पिछले दो साल में वाहन चोरी की घटनाएं दोगुनी हो गई हैं। खासकर SUVs जैसे ह्युंडई क्रेटा और टोयोटा फॉर्च्यूनर चोरों की पहली पसंद बन चुकी हैं। हाई-टेक गैजेट्स और इंटरस्टेट नेटवर्क की मदद से संगठित गैंग मिनटों में गाड़ियां उड़ा रहे हैं।
अरुणाचल की ईटानगर पुलिस की हालिया कार्रवाई में एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ, जिसमें करीब 70 चोरी की कारें जब्त की गईं। इनमें 30 से ज्यादा क्रेटा और कम से कम 15 फॉर्च्यूनर शामिल थीं। कई गाड़ियों पर दिल्ली, हरियाणा और यूपी के फर्जी नंबर प्लेट लगे थे। जब्त लॉट में किया सेल्टॉस, मारुति ब्रेज़ा, टाटा सफारी, हैरियर, फोर्ड एंडेवर और महिंद्रा थार जैसी गाड़ियां भी शामिल थीं।

मारुति बनी चोरों की पहली पसंद
SUVs भले ही हॉट फेवरेट हों, लेकिन चोरी की घटनाओं में मारुति सुजुकी सबसे ज्यादा शिकार बनी है। बीमा कंपनियों के मुताबिक, चोरी हुई कुल गाड़ियों में लगभग आधी मारुति की थीं। वैगनआर, स्विफ्ट और बलेनो सबसे आसान टारगेट साबित हो रही हैं। वहीं होंडा सिटी और मारुति डिजायर जैसी सेडान कारें भी लिस्ट में शामिल हैं।
बीमा रिपोर्ट का बड़ा खुलासा
एको डिजिटल इंश्योरेंस (Acko Digital Insurance) की रिपोर्ट 'Theft & the City 2024' के मुताबिक, 2023 में वाहन चोरी के मामले पिछले साल की तुलना में 2.5 गुना बढ़ गए। हैरानी की बात यह है कि कुछ गाड़ियां तो बेचे जाने के 3-4 घंटे के भीतर ही चोरी हो गईं। चोरी के बाद ज्यादातर कारें यूपी और राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर पर मौजूद गैरकानूनी स्क्रैप यार्ड्स में काट-छांट दी जाती हैं।
हाई-टेक चोरों का नया तरीका
अब चोरी सिर्फ ताले तोड़ने तक सीमित नहीं रही। संगठित गैंग की-लेस एंट्री सिस्टम को हैक करने वाले डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं। इससे गाड़ियां खुद ही अनलॉक हो जाती हैं। चोरी के बाद ये या तो छोटे शहरों में बेच दी जाती हैं या फिर पार्ट्स के लिए तोड़ दी जाती हैं।
दोपहिया और कमर्शियल गाड़ियां भी निशाने पर
सिर्फ कारें ही नहीं, बल्कि बजाज पल्सर, हीरो स्प्लेंडर, रॉयल एनफील्ड और होंडा एक्टिवा जैसे टू-व्हीलर भी चोरी हो रहे हैं। वहीं कमर्शियल व्हीकल्स जैसे मारुति अर्टिगा और पिकअप वैन भी चोरों की लिस्ट में शामिल हैं।
क्रॉस-बॉर्डर नेटवर्क की चुनौती
बीमा इंडस्ट्री के एक अधिकारी के मुताबिक, 'दिल्ली से चोरी हुई गाड़ी आधे घंटे में यूपी की सीमा पार कर जाती है और कागजी कार्रवाई शुरू होने से पहले ही उसे काट-छांट दिया जाता है।' यानी चोरी रोकना तो मुश्किल है ही, रिकवरी लगभग नामुमकिन हो चुकी है।












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