शिक्षा छोड़, बाकि सभी क्षेत्रों में भारत की स्थिति निराशाजनक - रिपोर्ट

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संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा टोक्यो में जारी की गई सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि मानव विकास सूचकांक में भारत 187 देशों में 135वें स्थान पर है।

मानव विकास सूचकांक किसी देश की औसत आयु, शिक्षा और आय पर निर्भर करता है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2010 से भारत के मानव विकास की गति काफी धीमी हो गयी है। भारत में वर्ष 1990 में औसत आयु 58.5 साल थी, जो 2013 में बढ़कर 66.4 हो गयी है। हांलाकि, ये महत्वपूर्ण विकास है, लेकिन पाकिस्तान और बांग्लादेश की औसत आयु भी भारत से बेहतर है। वहीं, चीन की औसत उम्र 75 वर्ष से अधिक है। जबकि वैश्विक औसत आयु 70.8 वर्ष है।

शिक्षा में भारत बेहतर

वहीं, शिक्षा की दिशा में भारत का प्रदर्शन बेहतर है। रिपोर्ट के अनुसार, विश्व में स्कूली पढ़ाई के औसत वर्ष 12.2 है, जबकि भारत में यह 11.7 है।

लैंगिक असमानता में निराशाजनक

भारत में लैंगिक असमानता कि बात करें तो इस मामले में भारत का स्थान 152 देशों में 127 वां है। भारत लैंगिक असामनता की वजह से मानव विकास में 29 प्रतिशत पिछड़ गया है। इस मामले में भारत बांग्लादेश से भी खराब है। बांग्लादेश जहां 115वें स्थान पर है, वहीं चीन 37वें पायदान पर है। क्योंकि चीन में महिलाओं की बेहतर स्वास्थ्य और काम में महिलाओं की उच्च भागीदारी है।

इसके साथ ही भारत में अगर प्रति व्यक्ति आय देखी जाए तो यह आंकड़े काफी निराशाजनक हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की प्रति व्यक्ति सलाना आय 5, 150 अमरिकी डॉलर है। जबकि, वैश्विक स्तर पर यह औसत 13,723 अमरिकी डॉलर है। वहीं, गरीबी के मामले में भी भारत के आंकड़े सारी स्थिति की पोल खोलती नजर आ रही है। भारत में 55 प्रतिशत लोग गरीब हैं। जबकि ब्राजील में ऐसे लोगों का औसत 3 प्रतिशत, चीन में 6 प्रतिशत और दक्षिण अफ्रीका में 10 प्रतिशत है।

मानव विकास में शीर्ष पर यह पांच देश हैं- नार्वे, ऑस्ट्रेलिया, स्विट्जरलैंड, हॉलैंड और अमेरिका

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