Tawang clash:क्या औली युद्धाभ्यास से घबरा गया है चीन? PLA की घुसपैठ में उसकी बौखलाहट छिपी है

अरुणाचल प्रदेश के तवांग में चीनी सेना पीएलए की घुसपैठ औली युद्धाभ्यास के मुश्किल से हफ्ते भर बाद हुई है। तब चीन ने भारत-अमेरिका संयुक्त युद्धाभ्यास पर सख्त आपत्ति जताई थी। हो सकता है कि यह उसी बौखलाहट का नतीजा हो।

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Tawang clash India China: उत्तराखंड की औली में पिछले महीने के आखिर में हुए भारत-अमेरिका संयुक्त युद्धाभ्यास चीन की आंखों में ऐसा खटका था कि ड्रैगन तिलमिला गया था। उसने अमेरिका तक को भी गीदड़ भभकी देने की कोशिश में कमी नहीं छोड़ी थी। इस घटना के फौरन बाद चीन की सेना ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग में जो पैंतरेबाजी दिखाने की कोशिश की है, ऐसा लगता है कि यह उसी बौखलाहट का नतीजा है। क्योंकि, चीन अरुणाचल प्रदेश में वास्तिव नियंत्रण रेखा के उसपार लंबे समय से अपना इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने में लगा हुआ है। कई ऐसी सैटेलाइट तस्वीरें भी आ चुकी हैं।

औली संयुक्त युद्धाभ्यास पर दिखी थी चीन की बौखलाहट

औली संयुक्त युद्धाभ्यास पर दिखी थी चीन की बौखलाहट

अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (PLA) ने जो घुसपैठ की हरकत की है, वह औली युद्धाभ्यास (नवंबर, 2022) के महज हफ्ते भर बाद ही हुई है। उत्तराखंड के औली में भारत-अमेरिका संयुक्त युद्धाभ्यास से चीन इतना छटपटा गया था कि उसने अमेरिका तक को धमकाने की जुर्रत दिखाई थी। तब (30 नवंबर, 2022) चीन की ओर से भारत को ज्ञान दिया गया था कि दोनों देशों को 1993-1996 के सीमा समझौतों का पालन करना चाहिए और सीमा पर शांति बनाई रखनी चाहिए। शी जिनपिंग की शासन वाला चीन उस दौर में ऐसी बातें कर रहा था, जब वह लगातार वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर पीएलए की गतिविधियां बढ़ाए जा रहा है; और पश्चिमी सेक्टर से लेकर पूर्वी सेक्टर तक हर जगह चालबाजियों में लगा हुआ है।

तवांग में खदेड़े जाने पर PLA को क्षमता का पता चला

तवांग में खदेड़े जाने पर PLA को क्षमता का पता चला

9 दिसंबर को तवांग सेक्टर में चीनी सेना ने जिस तरह से 300 से ज्यादा जवानों के साथ घुसपैठ कराकर एलएसी पर यथास्थिति बदलने की कोशिश की और भारतीय सेना ने उसे खदेड़ कर भगा दिया, उससे लगता है कि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की सरकार भारत की रेस्पॉन्स कैपिसिटी का आकलन करना चाहती थी। हो सकता है फिलहाल इसके जरिए चीन सर्दी के मौसम में अपनी सैन्य तैयारियों को भी दुरुस्त करना चाहता हो। वैसे, चीन की सेना अपने कब्जे में किए क्षेत्र अक्साई चिन और ताशकुरगन इलाके में पूरी तरह से मुस्तैद है, साथ ही साथ अरुणाचल प्रदेश से सटे इलाके में भी इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में पूरी ताकत झोंकने में व्यस्त है।

भारत-अमेरिका संयुक्त युद्धाभ्यास से घबराया चीन!

भारत-अमेरिका संयुक्त युद्धाभ्यास से घबराया चीन!

नवंबर के आखिर में उत्तराखंड की औली में भारत-अमेरिका संयुक्त युद्धाभ्यास जिस क्षेत्र में हुआ था, वह तो वास्तविक नियंत्रण रेखा से 100 किलोमीटर दूर है। फिर, चीन को किस बात की इतनी घबराट थी? सबसे बड़ी बात ये है कि डोकलाम हो या गलवान या फिर तवांग चीन की सेना ने हमेशा क्षेत्रीय शांति भंग करने की कोशिश की है। लेकिन, जब भारत और अमेरिकी सेना ने द्विपक्षीय युद्धाभ्यास में भाग लिया तो इतनी छटपटाहट दिखाने लगी, जैसे कि उसपर उसी तरह की किसी आक्रमण की तैयारी चल रही हो, जैसे कि वह ताइवान के साथ करता आया है! हालांकि, भारत और अमेरिका दोनों ने ही चीन को तत्काल अपनी हद में रहने को कह दिया था। 9 दिसंबर को जो घटना तवांग में घटी है, उससे यही लग रहा है कि चीन कहीं ना कहीं भारत-अमेरिकी संयुक्त युद्धाभ्यास से अंदर ही अंदर घबराया हुआ है!

चीन में जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने की चाल ?

चीन में जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने की चाल ?

इस तरह की आशंका की वजह ये है कि औली को लेकर चीन की ओर से जिस तरह से मौखिक बौखलाहट दिखाई गई थी, तवांग की घटना उसके तत्काल बाद हुई है। सिर्फ औली ही नहीं, भारत और अमेरिका की नजदीकियां QUAD को लेकर भी बढ़ी हैं। कहीं ना कहीं जिनपिंग की तानाशाही इसे हजम करने के लिए तैयार नहीं है। हो यह भी सकता है कि गलवान की खट्टी यादें भुलाकर पीएलए के जरिए वह तवांग में भारत को सबक सिखाना चाहता हो,ताकि किसी तरह यह अमेरिका के ज्यादा नजदीक ना आए। यही नहीं, घरेलू मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सेना के इस्तेमाल का भी चीन का इतिहास पुराना रहा है। शी जिनपिंग तीसरी बार राष्ट्रपति जरूर बने हैं, लेकिन जीरो कोविड पॉलिसी के खिलाफ वहां उठी जनता की आवाज ने घुटनों पर ला दिया है। एकबार तो ऐसा लगा कि चीन वाकई विद्रोह के कगार पर पहुंच चुका है।

भारत को पड़ोसियों के साथ ही उलझाए रखने की कोशिश ?

भारत को पड़ोसियों के साथ ही उलझाए रखने की कोशिश ?

तथ्य ये है कि चीन खुद को अमेरिका के मुकाबले एक वैश्विक सैन्य शक्ति के रूप में खड़ा करना चाहता है। लेकिन, वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत हो रही मौजूदा छवि जिनपिंग को फूटी आंखों बर्दाश्त नहीं हो रही है। चीन हर स्थिति में भारत को अपने पड़ोसियों के साथ ही उलझाए रखना चाहता है ताकि उसके वैश्विक मंसूबे को भारत ही पलीता ना लगा दे। इसके लिए वह सीमा पर तो भारत को फंसाए रखना ही चाहता है, इसके साथ ही वह एक और मोर्चे पर काम कर रहा है।

भारत के बढ़ते वैश्विक कद से भी टेंशन में जिनपिंग ?

भारत के बढ़ते वैश्विक कद से भी टेंशन में जिनपिंग ?

पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर भारत की पूछ बढ़ी है। खासकर कोविड काल से भारत ने दुनिया को हर विपरीत परिस्थितियों में धैर्य के साथ लड़ने का जो रास्ता दिखाया है, उससे कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के रहनुमाओं की नींद उड़ी हुई है। इसलिए, वह वास्तव में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति नहीं रहने देना चाहता और साथ ही साथ भारत में मौजूद अपने इकोसिस्टम का इस्तेमाल भी इस बात के लिए करना चाहता है कि यहां की सरकार भी वैश्विक स्तर पर सोचने के बजाए पड़ोसियों के साथ उलझे रहने में ही व्यस्त रहे। (तस्वीरें- फाइल)


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