India को भारत करने के लिए क्या करना होगा, संविधान में कहां और कैसे करना होगा परिवर्तन?
भारत के संविधान के अनुच्छेद-1 की शुरुआत ही इस तरह से होती है- 'इंडिया अर्थात भारत राज्यों का एक संघ होगा।' मतलब साफ है कि अनुच्छेद-1 के अनुसार देश का आधिकारिक नाम इंडिया और भारत दोनों है और देश का संविधान दोनों ही नामों को बराबर मान्यता देता है।
अगर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार संसद के विशेष सत्र के माध्यम से प्रस्ताव लाकर संविधान से आधिकारिक तौर पर 'इंडिया' को हटाकर देश का नाम सिर्फ 'भारत' करना चाहती है तो इसके लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता होगी।

क्यों शुरू हुई देश का नाम सिर्फ 'भारत' करने की चर्चा?
इंडिया का नाम सिर्फ भारत करने की अटकलें इस वजह से शुरू हुई हैं, क्योंकि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से जी20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले मेहमानों के लिए राष्ट्रपति भवन में जो डिनर आयोजित किया गया है, उसमें परंपरागत तौर पर अंग्रेजी में लिखे जाने वाले 'प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया' की जगह 'प्रेसिडेंट ऑफ भारत' लिखा गया है। इसी के बाद इस तरह के दावे हो रहे हैं कि सरकार अब 'इंडिया' की जगह देश का नाम सिर्फ 'भारत' करने वाली है।
नाम बदलने के लिए करना होगा संविधान में संशोधन
संविधान के अनुच्छेद-368 में इसमें संशोधन किए जाने की भी व्यवस्था है। इन संशोधनों के लिए सामान्य बहुमत या विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। जानकारों की राय में संविधान के अनुच्छेद-1 में दर्ज देश के नाम में संशोधन के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होगी।
मौजूदा सरकार के लिए यह मुश्किल काम नहीं- एक्सपर्ट
विशेष बहुमत से संशोधन का मतलब है कि इसे पास कराने के लिए दोनों सदनों में मौजूद और वोटिंग में शामिल कम से कम दो-तिहाई (66%) संसद सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होगी। इसके बारे में पटना हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील आदित्यनाथ झा ने ओआई से कहा है कि 'मौजूदा सरकार के लिए यह कोई मुश्किल काम नहीं है। इसकी संवैधानिक प्रक्रिया भी ज्यादा कठिन नहीं है।'
लेकिन, संविधान विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि अगर संविधान के प्रस्तावना(अंग्रेजी) से अगर 'वी दि पीपुल्स ऑफ इंडिया' की जगह 'वी दि पीपुल्स ऑफ भारत' करना है तो इसके लिए संसद के दोनों सदनों से विशेष बहुतम से पास कराने के साथ-साथ देश के कम से कम 50% विधासभाओं से भी सहमति लेनी पड़ेगी।
सुप्रीम कोर्ट में भी जा चुका है मामला
वैसे मार्च 2016 की बात है, सुप्रीम कोर्ट ने इंडिया का नाम भारत करने की मांग वाली एक जनहित याचिका (PIL)खारिज कर दी थी। तब बेंच की अगुवाई कर रहे तत्कालीन सीजेआई टीएस ठाकुर ने कहा था, 'भारत या इंडिया? आप इसे भारत बुलाना चाहते हैं, बेशक बुलाएं। कोई इसे इंडिया कहना चाहता है, उसे इंडिया कहने दें।'
लेकिन, 2020 में भी इसी तरह की एक याचिका फिर से सुप्रीम कोर्ट के सामने विचार के लिए लाई गई थी। तब भी सुप्रीम कोर्ट ने इसे सुनने से तो मना कर दिया था, लेकिन इसे पूरी तरह अनुचित भी नहीं करार दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को भेजने का दिया था सुझाव
तब के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया शरद अरविंद बोबडे ने कहा था, 'संविधान में भारत और इंडिया दोनों ही नाम दिए गए हैं। संविधान में पहले ही इंडिया को भारत कहा गया है।' उस समय सर्वोच्च अदालत ने नाम बदलने वाली उस याचिका को अभ्यावेदन में बदलकर उचित निर्णय के लिए भारत सरकार के पास भेजने का सुझाव दिया था।
दरअसल, विपक्षी दलों के गठबंधन ने अपना नाम इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव एलायंस या I.N.D.I.A.रखा है। इसके विरोध में अदालतों में कुछ शिकायतें भी की गई हैं। ऐसे समय में राष्ट्रपति भवन से 'प्रेसिडेंट ऑफ भारत' के नाम से निमंत्रण पत्र जारी होने की वजह से सियासी विवाद छिड़ गया है।












Click it and Unblock the Notifications