Bachchan + Banerjee: मुंबई में ममता बनर्जी की राखी राजनीति ! क्या तोहफे में मिलेगी पीएम पद की दावेदारी?
Bachchan + Banerjee: साल 2024 के लोकसभा चुनाव में देश की डबल इंजन की सरकार को हटाने के लिए विपक्ष एड़ी-चोटी का दम लगा रहा है। आज विपक्षी दलों के गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस यानी I.N.D.I.A. की तीसरी बैठक मुंबई में हो रही है, जिसमें 28 पार्टियों के 62 नेता शामिल हो रहे हैं।

इसी मीटिंग में शामिल होने के लिए पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी बुधवार को मुंबई आईं लेकिन वो एयरपोर्ट से सीधे गेस्ट हाउस ना जाकर बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के घर 'जलसा' पहुंचीं और सिनेस्टार को राखी बांधी। आपको बता दें कि ममता बनर्जी बच्चन परिवार के घर अभिनेत्री-सांसद जया बच्चन के निमंत्रण पर आई थीं।
अमिताभ को 'भारत रत्न' कहकर संबोधित किया
इस मुलाकात के बाद सीएम ममता ने अमिताभ के घर के बाहर एक छोटा सा भाषण भी दिया, जिसमें उन्होंने बच्चन परिवार को दुनिया का नंबर वन परिवार बताया और अमिताभ को 'भारत रत्न' कहकर संबोधित किया।
'मैं उन्हें भाई बुलाती हूं इसलिए मैंने उन्हें राखी भी बांधी'
उन्होंने कहा कि 'मैं उन्हें भारत रत्न ही बुलाती हूं, मेरे बस में होता तो मैं ये उन्हें ये पुरस्कार बहुत पहले ही दे देती, आज रक्षाबंधन का पर्व है, मैं उन्हें भाई बुलाती हूं इसलिए मैंने उन्हें राखी भी बांधी है और उन्हें दुर्गा पूजा और अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भाग लेने के लिए बंगाल में आमंत्रित भी किया है।'
जया बच्चन और ममता बनर्जी के संबंध काफी पुराने
गौरतलब है कि ममता बनर्जी की पार्टी की ओर से इस मुलाकात के बारे में पहले ये बयान दिया गया था कि ' जया बच्चन और ममता बनर्जी के संबंध काफी पुराने हैं और जया पहले भी कई बार सीएम से अपने घर आने का आग्रह कर चुकी हैं इसलिए जब सीएम ममता बनर्जी को इस बार मुंबई आने का मौका मिला है तो उन्होंने जया बच्चन का निमंत्रण स्वीकार करते हुए उनके घर जाने का फैसला किया है।'
एक 'नए खेला' की ओर इशारा ?
लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को लेकर काफी खलबली मची हुई है क्योंकि अमिताभ बच्चन सिनेमा जगत का काफी लोकप्रिय चेहरा हैं और उनकी पत्नी जया बच्चन सपा पार्टी से राज्यसभा सांसद है, जो कि इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस का पार्ट है, ऐसे में ममता बनर्जी का महाबैठक से ठीक पहले अमिताभ से मिलना, उन्हें 'भाई' बोलना, 'भारत रत्न' कहना और सबसे बड़ी बात उन्हें 'राखी बांधना' एक 'नए खेला' की ओर इशारा कर रहा है।
अमिताभ बच्चन कभी गांधी परिवार के काफी करीबी थे
आपको बता दें कि अमिताभ बच्चन कभी गांधी परिवार के काफी करीबी थे। वो और देश के पूर्व पीएम राजीव गांधी बचपन के दोस्त थे, दोनों के परिवारों के बीच काफी गहरे रिश्ते थे,जिसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि साठ के दशक में जब राजीव गांधी से शादी करने के लिए सोनिया गांधी अपने परिवार के साथ इटली से भारत आई थीं तो शादी से पहले कुछ दिन बच्चन परिवार के घर पर ही रही थीं। यहां तक कि उनका कन्यादान अमिताभ के मम्मी-पापा हरिवंशराय बच्चन और तेजी बच्चन ने ही किया था।
राजीव गांधी के ही कहने पर अभिनेता से नेता बने थे अमिताभ
अपने दोस्त के ही कहने पर अमिताभ अभिनेता से नेता बने थे और उन्होंने साल 1984 में इलाहाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ा था और हेमवती नंदन बहुगुणा जैसे दिग्गज नेता को एक लाख से ज्यादा वोटों से हराकर बंपर जीत दर्ज की थी।
'राजनीति मुझे रास नही आई'
लेकिन साल 1987 में जब राजीव गांधी सरकार पर बोफोर्स घोटाले के आरोप लगने लगे और उसके छीटें अमिताभ के दामन पर भी पहुंचें तो उन्होंने 'राजनीति मुझे रास नही आई' कहकर संसद सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था और वापस अभिनय की दुनिया में लौट गए थे। राजीव गांधी की मृत्यु के बाद गांधी परिवार और बच्चन परिवार एक-दूसरे से काफी दूर हो गए और इसी बीच अमिताभ का एक्टिंग ग्राफ तेजी से बढ़ता चला गया और वो सिनेजगत के 'महानायक' बन गए ।
'कुछ दिन तो गुजारो गुजरात में...'
लेकिन इसी बीच उनके संबंध सपा पार्टी के पूर्व मुखिया और दिवंगत नेता मुलायम सिंह यादव से प्रगाढ़ हुए, उनकी पत्नी आज भी सपा में हैं लेकिन अमिताभ खुद को राजनीति के मंच से दूर ही रखते आए लेकिन इसके बाद वो साल 2009 में आज के पीएम और तब के गुजरात के सीम नरेंद्र मोदी के भी काफी क्लोज रहे, मोदी के आग्रह पर ही अमिताभ गुजरात राज्य के ब्रांड एंबेसडर भी बने और उनका उस वक्त का विज्ञापन 'कुछ दिन तो गुजारो गुजरात में' काफी लोकप्रिय भी हुआ था ।
दीदी ने महागठबंधन की बैठक से ठीक पहले 'भाई' बोला
खुद पीएम मोदी ने कई बार खुले मंच से अमिताभ की तारीफ की , जिसका बाद राजनीतिक गलियारों में बातें होने लगी थीं कि कांग्रेस के करीबी अमिताभ आज भाजपा और मोदी के घनिष्ट हो गए हैं, फिलहाल सिने स्टार ने इन बातों पर कभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। लेकिन बुधवार को जब सीएम ममता ने उन्हें मोदी के खिलाफ खड़े हुए महागठबंधन की बैठक से ठीक पहले 'भाई' बोला तो एक बार फिर से बच्चन को लेकर बातें शुरू हो गई हैं।
मुंबई में ममता बनर्जी की राखी राजनीति !
क्य़ा बच्चन और बनर्जी मिलकर नया कोई राजनीति खेला करने जा रहे हैं? क्या ये राखी की राजनीति है? इन सवालों का जवाब तो आने वाला वक्त देगा लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि 'ये मुलाकात इतनी सिंपल भी नहीं जितनी दिख रही है।' वैसे आपको बता दें कि अमिताभ बच्चन ठाकरे परिवार ( उद्धव ठाकरे) के भी काफी नजदीक हैं और ये गुट भी इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस का अहम अंग है, इसी दल ने आज सभी पिवक्षी दलों के नेताओं के डिनर का आयोजन किया है।
क्या तोहफे में दीदी को मिलेगी पीएम पद की दावेदारी?
मालूम हो कि इस महागठबंधन में बहुत सारे नेता पीएम पद के दावेदार हैं, जो कि खुद तो मुंह से कुछ नहीं बोल रहे लेकिन हां अपने नेताओं से जरूर ये बात कहलवा रहे हैं। पीएम पद की दावेदारी में ममता बनर्जी भी शामिल हैं अब देखते हैं कि राखी वाली राजनीति से उनकी दावेदारी आसान होती है या नहीं।












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