हरियाणा में बीजेपी की सरकार बना सकते हैं निर्दलीय, आगे आए 3 निर्दलीय?
बेंगलुरू। हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 में जाटों के पाला बदलने से बीजेपी और कांग्रेस दोनों का अंकगणित बिगड़ गया है। जेजेपी चीफ दुष्यंत चौटाला को अभी तक आए नतीजों और रूझानों में 10 सीटों पर बढ़त कायम है। बीजेपी और कांग्रेस को क्रमशः 39 और 32 सीटों पर बढ़त हासिल है।

रूझानों में बीजेपी और कांग्रेस के सीटों का अंकगणित अगर परिणाम में बदलता है तो दोनों पार्टियों को हरियाणा में सरकार बनाने के लिए जेजेपी की जरूरत होगी, क्योंकि 90 सीटों वाले हरियाणा विधानसभा में बहुमत के लिए कांग्रेस और बीजेपी दोनों को कम से कम 45 सीट जुटानी होगी।

गौरतलब है बीजेपी अगर रूझानों में 39 सीटों पर बढ़त को कायम रखती है, तो उसे सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए 6 सीटों की जरूरत होगी, जिसका इंतजाम बीजेपी जेजेपी के अलावा उन निर्दलीय का समर्थन ले सकती है, जो 10 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं।

हालांकि बीजेपी ने शिरोमणि अकाली दल चीफ और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को जेजेपी से बात करने के लगा दिया है, लेकिन कांग्रेस द्वारा जेजेपी चीफ दुष्यंत चौटाला को मुख्यमंत्री पद का ऑफर देने के बाद बीजेपी का गणित डगमगा गया है। बीजेपी अब सरकार बनाने की कवायद में निर्दलीय उम्मीदवारों को टारगेट कर रही है।
हालांकि बीजेपी जेजेपी चीफ दुष्यंत चौटाला को साधने की कोशिश में लगी हुई है, लेकिन लगता नहीं है कि बीजेपी दुष्यंत चौटाला के मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पर तैयार होगी। बीजेपी ज्यादा से ज्यादा 11 महीने पुरानी पार्टी जननायक जनता पार्टी को डिप्टी सीएम का पद दे सकती है। दुष्यंत चौटाला अभी कांग्रेस और बीजेपी आने वाले ऑफर्स का भी इंतजार करेगी और उसके बाद ही अपने पत्ते खोलेगी।

सूत्रों पर भरोसा करें तो कांग्रेस ने दुष्यंत चौटाल को डिप्टी सीएम का ही ऑफर दिया है, जिसे दुष्यंत चौटाला ठुकरा दिया है। दरअसल, मीडिया में खबर चल रही थी कि कांग्रेस ने दुष्यंत को सीएम पद ऑफर किया है, जिसके बाद से ही कांग्रेस और जेजेपी की हरियाणा में गठबंधन की खबरें तैरने लगीं।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक रूझानों में बढ़त बनाए हुए तीन निर्दलीय उम्मीदवारों ने बीजेपी को समर्थन देने की घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा है कि अगर उनके समर्थन से सरकार बनने की स्थिति रहेगी तो बीजेपी को समर्थन देने से उन्हें परहेज नहीं होगा।

बीजेपी को अब महज 3 और निर्दलीय को जुटाने की जरूरत होगी और अगर बीजेपी तीन और विधायकों को बीजेपी से जोड़ने में कामयाब हो गई तो चुनाव से नंबर एक पार्टी के रूप में उभरी बीजेपी राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश कर देगी। हालांकि अभी यह टेढ़ी खीर है, क्योंकि कांग्रेस नेता व पूर्व सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने बीजेपी पर निर्दलीय को धमकाने का आरोप लगाया है। दीपेंद्र हुड्डा का आरोप है कि बीजेपी निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन हासिल करने के लिए उन्हें धमका रही है।
दीपेंद्र हुड्डा ने दावा करते हुए कहा कि बीजेपी निर्दलीय उम्मीदवारों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है, क्योंकि उनमें से ज्यादातर कांग्रेस के साथ जाना चाहते हैं, लेकिन बीजेपी उन्हें धमका रही है, जिसे लोकतंत्र में स्वीकार नहीं किया जा सकता। बकौल दीपेंद्र हुड्डा, भरोसेमंद उम्मीदवारों को स्वतंत्र रूप से उस पार्टी को चुनने में सक्षम होना चाहिए, जिसे वे समर्थन करना चाहते हैं, मैं मीडिया के माध्यम से चुनाव आयोग से इसके बारे में अपील करना चाहता हूं।'

उधर, हरियाणा में किंगमेकर की भूमिका में उभरे दुष्यंत चौटाला हरियाणा के मुख्यमंत्री बनने की कवायद में जुट गए हैं। हरियाणा की सत्ता की चाभी बन चुके दुष्यंत चौटाला ने सभी विकल्पों के खुले होने का इशारा करते हुए कह चुके हैं कि जो भी दल उन्हें मुख्यमंत्री पद ऑफर करेगा वो उसी के साथ चले जाएंगे।

दिलचस्प बात यह है कि दुष्यंत चौटाला की पार्टी का लोगो भी चाभी भी है, जिसे अब वो हरियाणा की सीएम की कुर्सी पाने के लिए बखूबी इस्तेमाल करने के मोड में भी आ गए हैं। हरियाणा में जेजेपी के उभार के लिए जाट वोट बैंक माना जा रहा है, जिसके चलते दुष्यंत चौटाला की पार्टी 10 सीट जीतकर किंगमेकर बन गई है।
महज 11 महीने पुरानी जेजेपी यानी जननायक जनता पार्टी की बड़ी सफलता के पीछे क्या कारण है। इसके जवाब ढूंढे जा रहे हैं, लेकिन माना जा रहा है कि जेजेपी के उभार के पीछे जाट वोटों का टर्न आउट है। दुष्यंत चौटाला पार्टी के गठन के बाद से ही जाट वोटर्स को साधने लग गए थे और भरोसे को पुख्ता करने के लिए उन्होंने चुनाव के दौरान खूब मेहनत की थी। कहा जाता है कि दुष्यंत चौटाला का चुनावी मैनेजमेंट अच्छा रहा। उन्होंने दूर-दराज के गांवों तक पहुंच कर अपने वोटरों को इकट्ठा किया, जिसका रिजल्ट सबके सामने है, जिसमें युवा जाट वोटरों का बड़ा योगदान है।

उल्लेखनीय है दुष्यंत चौटाला हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 के नतीजों को बहुत पहले ही भांप चुके थे। यही कारण था कि चुनावी कैंपेन के दौरान वो लगातार कहते रहते थे कि चंडीगढ़ की चाबी उनके हाथ में है और अब वो किंगमेकर की भूमिका में पहुंच चुके है तो दुष्यंत चौटाला की एक-एक बात सच साबित हो रही है।
चुनावी कैंपेन के मीडिया से बातचीत में जब चौटाला से पूछा गया कि 11 महीने पुरानी उनकी पार्टी चुनाव में क्या पर पाएग। इस पर जवाब देते हुए दुष्यंत चौटाला ने हा, 'याद रखिए जब अफगानिस्तान की टीम ने क्रिकेट वर्ल्ड कप में डेब्यू किया था. किसी ने नहीं सोचा था कि वो सही से खेल पाएगी और सेमीफाइनल तक पहुंच जाएगी। हम लोग नई पार्टी हैं, लेकिन आप विधानसभा चुनाव के नतीजों को देखकर हैरान होंगे।' निः संदेह नतीजे हैरान करने वाले हैं।
यह भी पढ़ें- हरियाणा में कांग्रेस-जेजेपी सरकार तय, अगले सीएम हो सकते हैं दुष्यंत चौटाला!












Click it and Unblock the Notifications