Independence Day: पीएम मोदी के भाषण के दौरान खाली पड़ी इस कुर्सी की क्यों हो रही चर्चा

Independence Day: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जब देश को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से संबोधित कर रहे थे तो इस दौरान दर्शक दीर्घा में एक कुर्सी खाली पड़ी थी। आप कहेंगे इसमे क्या बड़ी बात है, कुछ कुर्सियां तो खाली हो सकती हैं। लेकिन यह कोई सामान्य कुर्सी नहीं थी बल्कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए आवंटित कुर्सी थी।

दरअसल गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए देश के सभी बड़े दलों के नेताओं, गणमान्य को न्योता भेजा जाता है। लेकिन इस कार्यक्रम से दूरी बनाकर मल्लिकार्जुन खड़गे ने बड़ा राजानीतिक संकेत देने की कोशिश की है। खड़गे ने ना सिर्फ इस कार्यक्रम से दूरी बनाई बल्कि एक रिकॉर्डेड संदेश के जरिए देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों के योगदान का भी जिक्र किया।

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हालांकि मल्लिकार्जुन खड़गे के स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेने को लेकर कांग्रेस की ओर से सफाई आई है। कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि मल्लिकार्जुन खड़गे स्वस्थ्य नहीं होने की वजह से कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले सके।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने वीडियो संदेश में देशवासियों को इसकी बधाई दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान अनगिनत भारतीयों ने अपना बलिदान दिया था। महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना आजाद, राजेंद्र प्रसाद, सरोजिनी नायडू, बाबा साहब अंबेडकर जैसे हमारे महान पूज्यों ने ना सिर्फ राष्ट्रीय आंदोलन में अपना योगदान दिया बल्कि भारत की मजबूत नींव रखने में अपनी भूमिका निभाई।

खड़गे ने जवाहर लाल नेहरू, राजीव गांधी, पीवी नरसिम्हा राव, मनमोहन सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी सहित सभी प्रधानमंत्रियों ने देश के विकास में अपना योगदान दिया। मुझे कहते हुए यह पीड़ा हो रही है कि आज लोकतंत्र, संविधान, संस्थाओं पर बहुत बड़ा खतरा है।

विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए नए-नए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। संसद में विपक्ष के सांसदों को निलंबित करके उनकी आवाज को कुचलने की कोशिश की जा रही है। किसी का माइक बंद हो रहा है, किसी के शब्द हटाए जा रहे हैं। आने वाले समय में शायद लोग यह विश्वास ना करें कि सत्ता पक्ष के लोग ही संसद की कार्रवाई को बाधित करते थे।

महान लोग नया इतिहास बनाने के लिए पुराना इतिहास नहीं मिटाते हैं। जो लोग आज दिनभर नाम बदलने की बात दोहराते हैं, उन्होंने पुरानी योजनाओं को नया नाम दे दिया। दशकों से चल रही पुरानी संवैधानिक प्रणालियों को तार-तार कर दिया, तानाशाही का नया आयाम स्थापित किया और लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाने का काम किया है। जिन पुराने कानूनों ने देश को स्थिरता-शांति दी उनका नाम बदलकर इतिहास रचने की कवायद कर रहे हैं।

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