आयकर विभाग ने अटैच किया शाहरुख खान का फॉर्महाउस, खेती की जमीन के दुरुपयोग का मामला
आयकर विभाग डिपार्टमेंट ने शाहरुख खान का अलीबाग स्थित फार्महाउस अटैच किया है। शाहरुख का ये फार्महाउस बेनामी संपत्ति लेनदेन अधिनियम के तहत अटैच किया गया है। शाहरुख ने अलीबाग में खेती के लिए जमीन खरीदी थी लेकिन उसके बजाय उन्होंने वहां एक बड़ा सा फार्महाउस बना लिया।
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मुंबई। आयकर विभाग डिपार्टमेंट ने शाहरुख खान का अलीबाग स्थित फार्महाउस अटैच किया है। शाहरुख का ये फार्महाउस बेनामी संपत्ति लेनदेन अधिनियम के तहत अटैच किया गया है। शाहरुख ने अलीबाग में खेती के लिए जमीन खरीदी थी लेकिन उसके बजाय उन्होंने वहां एक बड़ा सा फार्महाउस बना लिया। शाहरुख का ये फार्महाउस अलीबाग में 19,960 स्कायर मीटर में फैला है।

खेती की जमीन पर बनाया फार्महाउस
शाहरुख के खिलाफ प्रमुख आरोप यह है कि उन्होंने खेती के लिए जमीन खरीदने के लिए एक आवेदन किया था, लेकिन बाद में निजी इस्तेमाल के लिए अलीबाग में एक फार्महाउस का निर्माण किया। बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी खबर के अनुसार, 'यह लेनदेन पीबीपीटी अधिनियम की धारा 2(9) के अनुसार बेनामी लेनदेन की परिभाषा के अंतर्गत आता है, जहां शाहरुख के फायदे के लिए डेजा वू फर्म्स ने बेनामिदार के रूप में काम किया है। इस प्रकार शाहरुख निर्धारित कानून के तहत एक लाभार्थी है।'

कंपनी को दिया 8 करोड़ से ज्यादा का लोन
जमीन को खरीदने के लिए डेजा वू फार्म्स का निर्माण किया गया। इस कंपनी को शाहरुख ने 8 करोड़ रुपये से ज्यादा का अनसिक्योर लोन भी दिया था। इसके कृषि भूमि होने के कारण इसे शुरुआती तीन साल में कृषि के लिए इस्तेमाल किया जाना था। आईटी की जांच में पता चला है कि कंपनी ने कृषि से अभी तक कोई कमाई नहीं दिखाई है। जांच में इस बात के भी संकेत मिल रहे हैं कि शाहरुख द्वारा दिए गए सभी लोन से डेजा वू ने जमीने खरीदीं हैं।

शाहरुख की तरफ से नहीं आया कोई जवाब
कंपनी के डायरेक्टर रमेश छिब्बा, सविता छिब्बा और नमिता छिब्बा शाहरुख के रिश्तेदार हैं। इस बात का खुलासा तब हुआ जब जिलाधिकारी विजय सूर्यवंशी ने दावा किया कि अलिबाग में शाहरुख का बंग्ला उन 87 फार्महाउस के साथ था जिनपर उनके कार्यालय ने कानूनी राय मांगी थी ताकि वह कोस्टल रेगुलेट्री जोन (CRZ) के उल्लंघन के तहत कार्रवाई कर सकें। इस सिलसिले में शाहरुख खान की कंपनी रेड चीलीज एंटरटेनमेंट और कोलकाता नाइट राइडर्स के सीईओ वैंकयी मैसूर को 24 जनवरी को ईमेल भी भेजा गया लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया।












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