'मैने अपना सुझाव देना चाहा लेकिन वो सुनना नहीं चाहते', मणिपुर को लेकर हुई बैठक में बोले पूर्व सीएम ओकराम इबोबी

मणिपुर के पूर्व सीएम ओकराम इबोबी सिंह ने आरोप लगाया कि उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया। वो सिर्फ पांच मिनट अपनी बात कहने के लिए समय मांगते रहे।

बीते दो महीने से मणिपुर के हालत काफी खराब बने हुए हैं। मेइती और कुकी समुदाय में जातीय संघर्ष 3 मई से अब तक चल रहा है। वहीं, इस हिंसा में अब तक 100 लोगों की मौत हो चुकी है। गंभीर होती स्थिति के कारण गृहमंत्री अमित शाह सर्वदलीय बैठक कर रहे हैं। इसमें मणिपुर के पूर्व सीएम ओकराम इबोबी सिंह भी शामिल हुए।

मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता ओकराम इबोबी ने हालात पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि मैने अपने सुझाव देने चाहे लेकिन, सर्वदलीय बैठक में उनकी बात को वो (अमित शाह) सुनना नहीं चाहते हैं।

former CM Okram Ibobi

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में मणिपुर के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता ओकराम इबोबी सिंह ने कहा कि जब मैने अपना सुझाव देना शुरू किया तो मुझे लगता है कि वो सुनना नहीं चाहते थे। मैने ये भी कहा कि ये मुद्दा राजनीतिकरण करने का समय नहीं है। राज्य में सामान्य स्थिति लाने की जरूरत है। मैने उनसे इस मुद्दे पर बोलने के लिए कम से कम 5 मिनट का समय मांगा। लेकिन, उन्होंने मुझसे अलग से मिलने की बात कही।

गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में बुलाई गई इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी, नित्यानंद राय, संसदीय मंत्री प्रहलाद जोशी के साथ ही मणिपुर के पूर्व सीएम इबोबी सिंह, समाजवादी पार्टी से रामगोपाल यादव, तृणमूल कांग्रेस से डेरेक ओ ब्रायन, डीएमके से तिरुचि शिवा, शिवसेना उद्धव से प्रियंका चतुर्वेदी, आम आदमी पार्टी से सांसद संजय सहित दो दर्जन पार्टियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

वहीं, इस बैठक में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ने मांग की है कि अगले एक सप्ताह में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल मणिपुर भेजा जाए। केंद्र सरकार की ओर से अब तक का संदेश की अनदेखी हो रही है। इसे उपचार, देखभाल, शांति और सद्भाव बहाल करने के लिए बदलने की जरूरत है।

बता दें कि मणिपुर में आदिवासियों को लेकर कुछ खास कानून हैं, जिसके तहत वे पहाड़ी इलाकों में रह सकते हैं। वहीं, मैतई समाज को अनुसूचित जनजाति का दर्जा न मिलने के कारण वो पहाड़ी इलाकों में नहीं बस सकते हैं। जिसके लिए मैतेई समाज खुद को अनुसूचित जाति का दर्जा हासिल करवाने की मांग कर रही है।

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