जॉर्डन में फंसी भारतीय छात्रा की सुरक्षित वापसी में इफको ने निभाई अहम भूमिका
कनाडा से भारत की तनावपूर्ण यात्रा के दौरान, एक भारतीय बेटी जॉर्डन में फंस गई। दिलीपभाई संघानी के नेतृत्व में और के. जे. पटेल और जेआईएफको के समन्वय से, आईएफको ने वीजा, आवास और आवश्यक सहायता सुरक्षित की, जिससे उसकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित हुई। यह घटना मानवीय सहयोग और समय पर सहायता के महत्व को उजागर करती है।
युद्ध जैसे भयावह और अनिश्चित माहौल में जब एक परिवार की उम्मीदें टूटने लगती हैं, तब समय पर मिला सहयोग किसी वरदान से कम नहीं होता। ऐसा ही एक मामला हाल ही में सामने आया, जहां कनाडा से भारत लौट रही देश की एक बेटी जॉर्डन में फंस गई। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच इफको के त्वरित हस्तक्षेप से उसे सुरक्षित सहायता मिल सकी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कनाडा से भारत लौटते समय युवती जॉर्डन में अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण रुक गई। इस स्थिति से चिंतित उसके माता-पिता ने इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी से संपर्क कर अपनी व्यथा साझा की। मामले की गंभीरता को समझते हुए संघाणी ने तत्काल पहल की और संबंधित अधिकारियों से समन्वय स्थापित किया।
इफको के प्रबंध निदेशक के. जे. पटेल तथा जॉर्डन स्थित इफको के संयुक्त उपक्रम जिफको (JIFCO) से संपर्क साधा गया। संघाणी स्वयं भी लगातार फोन पर स्थिति की निगरानी करते रहे। जिफको के अधिकारियों और कर्मचारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वीज़ा, आवास और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कीं।
संगठित प्रयासों के परिणामस्वरूप युवती को सुरक्षित सहयोग मिला और वह अब सुरक्षित है। परिवार ने राहत की सांस ली और इफको के प्रति आभार व्यक्त किया। इस पूरे घटनाक्रम को केवल प्रशासनिक सहायता नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनशीलता और ‘परिवार भाव’ का उदाहरण माना जा रहा है। संकट की घड़ी में तत्परता और समन्वय ने एक परिवार की चिंता को दूर कर मुस्कान लौटाने का कार्य किया।
परिवार की ओर से इफको के अध्यक्ष दिलीपभाई संघाणी, प्रबंध निदेशक के. जे. पटेल, जिफको के सीएफओ दीपक यादव तथा उनकी टीम के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया गया है। गौरतलब है कि हाल ही में जिफको प्रवास के दौरान ली गई एक तस्वीर में इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी, एम.डी. के. जे. पटेल और जिफको के दीपक यादव एक साथ दिखाई दे रहे हैं।












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