Air India विमान हादसे की जांच रिपोर्ट पर भड़का IFALPA, मीडिया और सोशल मीडिया को दे दी नसीहत,जानिए पूरा मामला
IFALPA Air India crash report: 12 जून को अहमदाबाद से लंदन गेटविक जा रहे एयर इंडिया के बोइंग 787-8 विमान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के बाद इस गंभीर हादसे को लेकर जारी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पर अब अंतरराष्ट्रीय पायलट संघटन इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ एयर लाइन पायलट्स एसोसिएशन्स (IFALPA) ने सार्वजनिक रूप से संयम बरतने की अपील की है।
सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में IFALPA ने स्पष्ट किया कि यह प्रारंभिक रिपोर्ट केवल शुरुआती तथ्यों को साझा करने का माध्यम है, न कि दुर्घटना के कारणों पर अंतिम निष्कर्ष।

क्या कहा IFALPA ने?
संगठन ने खासतौर पर मीडिया और सोशल मीडिया में हो रही चर्चाओं पर चिंता जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रहे अफवाहों पर नसीहत देते हुए कहा है कि रिपोर्ट को लेकर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना न केवल गलत है, बल्कि यह जांच प्रक्रिया को प्रभावित भी कर सकता है।
IFALPA ने बयान में कहा, "हम फिर से मीडिया और सोशल मीडिया द्वारा इस रिपोर्ट के आधार पर किए जा रहे जल्दबाजी वाले निष्कर्षों से सावधान करते हैं। याद रहे कि प्रारंभिक रिपोर्ट केवल शुरुआती जांच के दौरान प्राप्त तथ्यों को शीघ्रता से साझा करने का एक माध्यम है, इसमें केवल तथ्यात्मक जानकारी और जांच की प्रगति का संकेत होता है।"
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि रिपोर्ट में फिलहाल किसी भी प्रकार की सुरक्षा सिफारिशें (safety recommendations) नहीं दी गई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि "IFALPA यह भी स्पष्ट करना चाहता है कि रिपोर्ट में यह साफ लिखा है कि इस चरण में कोई सुरक्षा सिफारिश नहीं दी जा रही है। हमारा संगठन भारत के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) के साथ मिलकर इस हादसे के कारणों को समझने और निष्कर्ष पर पहुँचने के प्रयासों में पूरी तरह सहयोग करता रहेगा।"
प्रारंभिक रिपोर्ट में क्या सामने आया?
भारतीय विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (Aircraft Accident Investigation Bureau - AAIB) द्वारा हादसे के एक महीने बाद जारी की गई प्रारंभिक रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया का बोइंग 787-8 विमान अहमदाबाद से उड़ान भरते ही पास के एक मेडिकल हॉस्टल परिसर से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
विमान में सवार 241 लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि जमीन पर मौजूद 19 अन्य लोग भी मारे गए। यह भारत के उड्डयन इतिहास की सबसे भयावह घटनाओं में से एक बन गई है। जांच रिपोर्ट में बताया गया कि टेक-ऑफ के दौरान दोनों इंजन फ्यूल स्विच एक-एक सेकंड के अंतराल में "RUN" से "CUTOFF" पोजीशन में चले गए, जिससे इंजन ने काम करना बंद कर दिया।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से पूछते हुए सुना गया कि 'तुमने कटऑफ क्यों किया?' दूसरे पायलट ने जवाब दिया कि उसने ऐसा नहीं किया। जैसे ही यह रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, मीडिया और सोशल मीडिया पर पायलटों को लेकर कई प्रकार के आरोप लगने लगे। इस पर कई पायलट संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। इंडियन कमर्शियल पायलट्स एसोसिएशन (ICPA) ने इन आरोपों को "पेशे के साथ एक गंभीर अन्याय और घोर अनुचित व्यवहार" बताया है।
ICPA ने कहा पायलटों पर आरोप लगाना गलत
ICPA ने बयान में कहा, "AI171 उड़ान के पायलटों और चालक दल के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप गंभीर पेशेवर उल्लंघन हैं। यह रिपोर्ट अभी पूर्ण नहीं है, और इस समय इस प्रकार के निष्कर्ष निकालना न केवल अनैतिक है बल्कि जांच प्रक्रिया पर भी असर डाल सकता है।"
एयर इंडिया की AI171 उड़ान के हादसे को लेकर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट ने जरूर कुछ तकनीकी पहलुओं को उजागर किया है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में IFALPA और अन्य पायलट संगठनों की यह अपील बेहद महत्वपूर्ण है कि आम जनता, मीडिया और सोशल मीडिया को संयम बरतना चाहिए और जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार के निष्कर्ष या दोषारोपण से बचना चाहिए।
यह हादसा न केवल तकनीकी बल्कि पेशेवर और नैतिक रूप से भी भारत के एविएशन सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती है। अब सभी की नजरें AAIB की फाइनल रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में इस भयावह दुर्घटना की असली वजह सामने लाएगी।












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