अगर किसानों का मुद्दा नहीं सुलझा तो......पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह को किस बात की है चिंता ?
नई दिल्ली- पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को इस बात की चिंता सता रही है कि अगर किसानों का मुद्दा जल्द नहीं सुलझा तो कहीं यह दूसरा खतरनाक शक्ल ना अख्तियार कर ले। उन्होंने एक इंटरव्यू में मोदी सरकार से कहा है कि वह पंजाब के किसानों को दरकिनार करने की ना सोचे। उनका कहना है कि करीब 75 फीसदी पंजाबी किसी ना किसी रूप में खेती से जुड़े हैं और भले ही उनका देश की आबादी में हिस्सा महज दो फीसदी है, लेकिन वह देश का 40 फीसदी खाद्यान पैदा करते हैं। इसलिए, उनकी मांगों को सरकार नजरअंदाज नहीं कर सकती।

'पंजाब में ड्रोन से हथियार गिराए जा रहे हैं'
अंग्रेजी मैगजीन इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 18 दिनों से जारी किसान आंदोलन को लेकर कई बड़ी बातें कही हैं और इसके जल्द नहीं सुलझने की स्थिति में इसके भयंकर परिणामों की आशंकाओं की ओर भी इशारा करने की कोशिश की है। उन्होंने बताया कि हाल में उनकी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से दो मुद्दों को लेकर मुलाकात हुई थी। पहला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा था। उन्होंने कहा है कि सीमा पार से (पाकिस्तान से) रोजाना ड्रोन भेजे जा रहे हैं, जिनसे पंजाब में हथियार गिराए जा रहे हैं; और दूसरा मसला कृषि कानूनों से जुड़ा था, जिसपर उन्होंने गृहमंत्री से कहा कि सरकार के लिए फैसला लेने का समय आ चुका है। उन्होंने कहा कि इस तनाव को कम करने के लिए जो भी किया जा सकता है, वह किया जाना चाहिए। उन्होंने एमएसपी, मंडी और अढ़तिया व्यवस्था की वकालत करते हुए कहा कि पंजाब के 75 फीसदी लोग खेती से जुड़े हैं।
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'पंजाब को नजरअंदाज नहीं कर सकते'
उन्होंने कहा है कि जब देश को जरूरत थी तो पंजाब के लोगों ने खाद्यान के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने हरित क्रांति 1.0 में पंजाब के किसानों के योगदान का हवाला देकर कहा कि अब जब इलाका विकसित हो चुका है तो इससे अचानक मुंह नहीं फेरा जा सकता है। वे बोले कि देश की सिर्फ 2 फीसदी आबादी वाला पंजाब देश के फूड पूल का 40 फीसदी उत्पादित करता है। अगर कल को अकाल पड़ता है तो आज भी पंजाबी किसान ही आपको बचाएगा। इसलिए आज के भरोसे ना रहें, कल को जरूरत पड़ सकती है। पंजाब को नजरअंदाज नहीं कर सकते।

...तो पंजाब सरकार इसलिए कर रही है विरोध ?
जब उनसे पूछा गया कि केंद्र सरकार ने साफ किया है कि निजी मंडी और और एपीएमसी सिस्टम (एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमिटी) साथ-साथ चलेंगे तो फिर दिक्कत क्या है। इस पर उन्होंने कहा है कि मैं मानता हूं कि वो दोनों साथ-साथ चलेंगे, लेकिन वह अढ़तिया और मंडी व्यवस्था बंद करना चाहते हैं। अब उन्होंने (मुख्यमंत्री ने) अपने दिल की बात जुबान पर ला दी। उन्होंने कहा कि अढ़तिया और मंडी व्यवस्था से राज्य सरकार को 2 से 3 फीसदी कमाई होती है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि इसका इस्तेमाल 65,000 किलोमीटर गांवों के संपर्क मार्ग के विकास के लिए होता है। 'अब मुझे यह पैसे कहां से मिलेंगे? हर साल इसी 2-3 फीसदी कटौती से हम सड़कों की मरम्मत करते हैं, ड्रेनेज और सीवेज को मेंटेन करते हैं। ग्रामीम विकास शुल्क को भी रोका जा रहा है, यह सरकार को हर से प्रभावित कर रहा है।'

'जब मामला गर्माता है तो कुछ भी हो सकता है'
जब उनसे यह पूछा गया कि आपने राष्ट्रीय सुरक्षा की बात की, सीमा पार से ड्रोन आने की बात बताई। क्या इसका मतलब अगर आंदोलन का हल नहीं निकला तो इस बात की भी चिंता है कि पंजाब में एक बार फिर से उग्रवाद लौट सकता है? इसके जवाब में कैप्टन अमरिंदर बोले- 'मैं उम्मीद करता हूं कि नहीं। लेकिन, आप जानते है कि जब मामला गर्माता है तो कुछ भी हो सकता है। मैंने इसे लंबे समय तक होते देखा है। मैंने इसे 1980 के दशक में होते देखा जब हमारे एक मुख्यमंत्री की हत्या हो गई थी। मुद्दे अचानक सुलग उठते हैं। इसलिए, मैं आशा करता हूं कि ऐसा नहीं होने वाला है। मैं उम्मीद करता हूं कि केंद्र किसानों के मुद्दे का हल करे और हम फिर से उन हालातों में नहीं पहुंचना चाहते।'












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