• search

अगर पेट्रोल GST के दायरे में आ जाए तो...

Subscribe to Oneindia Hindi
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts
    पेट्रोल-डीज़ल
    BBC
    पेट्रोल-डीज़ल

    चौंकाने वाली बात है कि महंगाई के इस दौर में भी ऐसा कम ही होता कि देश भर में एक ही उत्पाद के दामों को लेकर बवाल मचा हो.

    दिल्ली में प्याज़ का किस्सा शायद आपको याद हो, जिसके दामों ने सरकार के लिए आफ़त कर दी थी.

    आजकल ऐसा ही कुछ पेट्रोल-डीज़ल के साथ है, जिसकी हर रोज़ बढ़ती कीमतों ने जनता को ख़फ़ा कर रखा है और सरकार के सामने सवालों की बाढ़ आ गई है.

    नरेंद्र मोदी फ़िटनेस चैलेंज की बात करते हैं तो राहुल गांधी उन्हें पेट्रोल का दाम घटाने की चुनौती दे डालते हैं.

    चुटकुले भी इसी के इर्द-गिर्द चल रहे हैं. कोई मोटरसाइकिल में पैडल लगवाने की सलाह दे रहा है तो कोई स्कूटर में टंकी फ़ुल कराने पर बीमा कराने जा रहे हैं.

    मोदी सरकार का सिरदर्द

    मोदी
    AFP
    मोदी

    लेकिन पेट्रोल-डीज़ल के दाम कम कैसे होंगे, अभी तक कोई रास्ता नहीं सूझ रहा. मोदी और उनके मंत्री कह रहे हैं कि जल्द ही इस मोर्चे पर राहत दी जाएगी लेकिन वो कैसे आएगी, अभी ख़बर नहीं.

    मोदी सरकार का सिरदर्द बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दाम भी दम साधे बैठे हैं.

    सरकार घटा सकती है तेल की क़ीमत, पर नहीं घटा रही, क्यों?

    पाकिस्तान से 25 रु महंगा पेट्रोल क्यों बेच रहा भारत?

    विपक्षी दलों का कहना है कि अगर मोदी सरकार चाहे तो टैक्स घटाकर पेट्रोल के दामों में काफ़ी कमी ला सकती है. लेकिन वो ऐसा कर नहीं रही है.

    और जैसे ही टैक्स की बात चलती है तो एक बार फिर ये चर्चा चल पड़ती है कि क्या पेट्रोल-डीज़ल को जीएसटी के दायरे में लाना चाहिए ताकि उस पर टैक्स कम लगे और ग्राहकों को भी फ़ायदा हो.

    लेकिन पहले पेट्रोल के दाम और टैक्स के खेल को समझ लिया जाए. 25 मई को इंडियन ऑयल के पेट्रोल का दाम राजधानी दिल्ली में 77.83 रुपए प्रति लीटर था.

    कितना दाम, कितना टैक्स

    अगर पेट्रोल का प्राइस बिल्डअप देखा जाए तो डीलरों को पेट्रोल 38.17 रुपए प्रति लीटर की दर पर मुहैया कराया गया. इसमें 19.48 रुपए प्रति लीटर की एक्साइज़ ड्यूटी और 16.55 रुपए प्रति लीटर का वैट जोड़ा गया.

    साथ में 3.63 रुपए प्रति लीटर का डीलर कमीशन भी इसमें डाला जाए तो दाम 77.83 रुपए प्रति लीटर पहुंच जाते हैं. कांग्रेस छोड़िए, भाजपा के नेताओं को भी इस मामले की संजीदगी पता है.

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फ़ड़नवीस ने कहा कि अगर केंद्र जीएसटी (उत्पाद एवं सेवा कर) पर आम सहमति बना लेता तो पेट्रोल-डीज़ल के दामों में काफ़ी कमी आ सकती है.

    उन्होंने कहा, ''तेल के दाम घटाने को लेकर टास्क फ़ोर्स ने काम करना शुरू कर दिया है. अगर इन पर जीएसटी लगा दिया जाता है तो इसकी ऊपरी सीमा तय हो जाएगी क्योंकि अभी इन पर ऐसा टैक्स लगाता है जो दाम बढ़ाता है.''

    एक्साइज़ ड्यूटी केंद्र सरकार लगाती है जबकि वैट की दर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग हो सकती है. यही वजह है कि राज्यों और उनके शहरों में पेट्रोल या डीज़ल के दाम भी अलग होते हैं.

    तेल का सफ़र

    पेट्रोल-डीज़ल
    BBC
    पेट्रोल-डीज़ल

    जितनी तेल की कीमत होती है लगभग उतना ही टैक्स भी लगता है. कच्चा तेल ख़रीदने के बाद रिफ़ाइनरी में लाया जाता है और वहां से पेट्रोल-डीज़ल की शक्ल में बाहर निकलता है.

    इसके बाद उस पर टैक्स लगना शुरू होता है. सबसे पहले एक्साइज़ ड्यूटी केंद्र सरकार लगाती है. फिर राज्यों की बारी आती है जो अपना टैक्स लगाते हैं. इसे सेल्स टैक्स या वैट कहा जाता है.

    इसके साथ ही पेट्रोल पंप का डीलर उस पर अपना कमीशन जोड़ता है. अगर आप केंद्र और राज्य के टैक्स को जोड़ दें तो यह लगभग पेट्रोल या डीजल की वास्तविक कीमत के बराबर होती है.

    उत्पाद शुल्क से अलग वैट एड-वेलोरम (अतिरिक्त कर) होता है, ऐसे में जब पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ते हैं तो राज्यों की कमाई भी बढ़ती है.

    अब फ़र्ज़ कीजिए कि एक्साइज़ ड्यूटी और वैट, दोनों हटाकर पेट्रोल को भी जीएसटी के दायरे में लाने का फ़ैसला कर लिया जाए तो क्या होगा?

    ये सवाल इसलिए कि ख़ुद भाजपा नेता भी इस बारे में बात करने लगे हैं.

    जीएसटी का मतलब क्या

    पेट्रोल-डीज़ल
    Getty Images
    पेट्रोल-डीज़ल

    अगर पेट्रोल-डीज़ल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है तो आम लोगों की मौज तय है. लेकिन केंद्र और राज्य सरकार को इससे नुकसान हो सकता है.

    25 मई के दाम देखें तो साफ़ है कि अगर टैक्स न लगें तो पेट्रोल के दाम काफ़ी नीचे आ जाएंगे. 77.83 रुपए प्रति लीटर का दाम टैक्स (एक्साइज़ ड्यूटी और वैट) हटने पर 41.8 रुपए प्रति लीटर रह जाएगा.

    और अगर इसमें 28% की दर से जीएसटी जोड़ लिया जाए तो भी ये 53.50 रुपए प्रति लीटर बैठेगा. यानी मौजूदा दर से 24.33 रुपए कम.

    अगर एक लीटर पेट्रोल 77 रुपए के बजाय 53 रुपए में बिकने लगे तो ये कितनी बड़ी राहत होगी, इसका अंदाज़ा लगाना आसान है.

    लेकिन क्या पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाना इतना आसान है? शायद नहीं! क्रिसिल के अर्थशास्त्री सुनील सिन्हा ने बीबीसी से कहा कि अब ये फ़ैसला सिर्फ़ केंद्र सरकार नहीं कर सकती.

    लेकिन क्या ये आसान है?

    पेट्रोल-डीज़ल
    Getty Images
    पेट्रोल-डीज़ल

    ''ये निर्णय अब जीएसटी काउंसिल कर सकती है, जिसमें राज्यों को प्रतिनिधि भी शामिल हैं. इन दिनों भले नेता इस तरह के बयान दे रहे हों, लेकिन वो ज़्यादा से ज़्यादा इस मुद्दे को काउंसिल की बैठक तक ले जा सकते हैं.''

    लेकिन अगर पल भर को मान लिया जाए कि ऐसा होता है, तो क्या होगा?

    उन्होंने कहा, ''अगर सिद्धांत रूप से बात करें तो पेट्रोल के जीएसटी के दायरे में आने पर कीमतों में काफ़ी आनी चाहिए, लेकिन ये इतना आसान नहीं होगा.''

    ''अगर आप देखें तो पाएंगे कि सरकार ने पहले जिन उत्पादों पर जीएसटी लगाया, उन पर उसे इस तरह लागू किया गया कि ग्राहकों तक राहत नहीं पहुंची. सरकार को ग्राहकों से ज़्यादा चिंता टैक्स से होने वाली कमाई की है.''

    जानकारों के मुताबिक पेट्रोल पर जो वैट अभी लगता है, वो पुराने सेल्स टैक्स का नया नाम है. इसका जीएसटी से कोई लेना-देना नहीं है. हर राज्य ख़ुद ये फ़ैसला कर सकता है कि वो पेट्रोल पर कितना वैट लगाना है.

    पेट्रोल: मोदी के गरजने से चुप्पी में जकड़ने तक

    क्या सऊदी अरब बिगाड़ेगा मोदी के बजट का गणित?

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    BBC Hindi
    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    English summary
    If petrol falls within the purview of GST

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    X