आरोपी इंस्पेक्टर ने कोर्ट को बताया, सोहराबुद्दीन एनकाउंटर को सही बताने के लिए मुझ पर दबाव डाला गया
नई दिल्ली। राजस्थान पुलिस में इंस्पेक्टर अब्दुल रहमान ने मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत के सामने दर्ज कराए अपने बयान में कहा है कि सोहराबुद्दीन एनकाउंटर की सही बताए जाने के लिए उस पर दबाव डाला गया था। सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में रहमान भी आरोपी हैं। रहमान ने कहा है कि सीनियर्स ने मुझ पर दबाव बनाया कि वो एनकाउंटर की कहानी को सच बताए, वहीं एनकाउंटर में उन्होंने खुद को निर्दोष बताया।

राजस्थान पुलिस के इंस्पेक्टर अब्दुल रहमान ने अपने आप को निर्दोष बतात हुए कहा, सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में दर्ज एफआईआर मेरी नहीं है, यह पूरी तरह फर्जी है। मैंने कभी इस केस में एफआईआर दर्ज नहीं करवाई। इस केस में किसी ने मेरे नाम का गलत इस्तेमाल किया है। रहमान ने बताया कि एफआईआर गुजराती में हुई जबकि उन्हेंगुजराती भाषा आती ही नहीं है।
अब्दुल रहमान ने कहा कि एनकाउंटर केस में जांच एजेंसी सीबीआई ने झूठा फंसाया। इसमें सीआईडी ने तीन चार्जशीट पेश की, जिनमें उनका नाम ही नहीं थी। सीआईडी ने अपनी जांच में आरोपी नहीं बनाया लेकिन सीबीआई ने इस केस में झूठा फंसाने के लिए झूठे सबूत और गवाह तैयार किए।
सोहराबुद्दीन और तुलसी प्रजापति मुठभेड़ मामले में गवाहों के बयान खत्म होने के बाद कोर्ट में आरोपी पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। सोमवार को पुलिस इंस्पेक्टर एनएच डाबी ने बयान दर्ज कराए थे। मंगलवार को छह पुलिस वालों के बयान दर्ज हुए थे। सभी आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया है और मामले में पुलिस और राजनेताओं के कनेक्शन की बात कही है।
सोहराबुद्दीन शेख और कौसर बी नवंबर 2005 में कथित एनकाउंटर हुआ था। इस मामले की जांच और सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि गुजरात में इस केस की जांच को प्रभावित किया जा रहा था और केस को 2012 में मुंबई ट्रांसफर कर दिया था।












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