अध्यादेश पर राहुल जी से बात करूंगा लेकिन मैं इस्तीफा क्यों दूं?
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को कहा कि दोषी जनप्रतिनिधियों से जुड़े अध्यादेश पर कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी जी की चिंताओं पर वह चर्चा करेंगे। अमेरिका से वापस लौटते समय विशेष विमान पर सवार प्रधानमंत्री ने मीडिया कर्मियों से कहा, "मैंने राहुल गांधी जी का बयान देखा है। जब एक लोकतांत्रिक राजनीति में मुद्दे उठाए जाते हैं, तो सही तरीका उन पर चर्चा करना है।"
लेकिन विपक्ष की ओर से चिल्लाने के बावजूद मैं इस्तीफे का बारे में सोच भी नहीं रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात और संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र को संबोधित कर लौटने के क्रम में विशेष विमान में उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "इस्तीफा देने का सवाल ही पैदा नहीं होता।" उन्होंने यह भी कहा कि वे 'तुरंत खफा' हो जाने वालों में से नहीं हैं।
मालूम हो कि दोषी ठहराए जाने वाले सांसदों को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की आंच से बचाने के लिए मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल द्वारा पारित अध्यादेश को राहुल ने 'पूरी तरह बकवास' और उसे 'फाड़कर फेंकने लायक' बताया था।
जिसके बाद विपक्ष ने मनमोहन सिंह के अस्तित्व पर ही सवाल उठा दिया था। पीएम का कहना है कि किसी मुद्दे पर अगर किसी की सहमति नहीं बनती हैं तो उसे वह सोच-समझकर सुलझाने और बात-चीत से हल करना चाहते हैं। वह इस्तीफा क्यों दे?













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