भूमि पेडनेकर: 'ऐसी फिल्में नहीं कर सकती जो स्त्री-विरोधी हों'
मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने अपने चार साल के करियर में खुद की एक अलग पहचान बनाई है। साल 2015 में दम लगाके हइशा से फिल्मी दुनिया में कदम रखने वाली भूमि की सारी फिल्में हिट हुई हैं। इस फिल्म के बाद उन्होंने 2017 में टॉयलेट एक प्रेम कथा में काम किया है।

इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसी महिला का किरदार निभाया है, जो अपने अधिकारों के लिए लड़ती है। इस साल आई फिल्म सांड की आंख मे भूमि ने 65 साल की बुजुर्ग महिला का किरदार निभाया है। वह बिल्कुल हटकर रोल मिलने पर जरा भी संकोच महसूस नहीं करती हैं। भूमि ने हाल ही में रिलीज हुई फिल्म बाला में डार्क स्किन वाली लड़की का किरदार निभाया है।

अपने किरदारों पर क्या बोलीं भूमि?
अपने किरदार के बारे में भूमि कहती हैं, 'जो भी किरदार मैंने निभाए वो अधिक चुनौतीपूर्ण थे और मुझे एक बेहतर अभिनेत्री बनाया है। हर समय मैं यही सोचती हूं, अब क्या, कुछ अद्भुत लेखक और निर्देशक मेरे लिए पाथ ब्रेकिंग रोल के साथ आए। ये केवल शुरुआत है और मैं लोगों से कहती हूं कि सांड की आंख और बाला तो मेरी पांचवीं और छठी फिल्म हैं। मेरा सफर छोटा और खूबसूरत है, जो अभी काफी लंबा चलेगा।'

बिकनी पर भूमि ने क्या कहा?
कंफर्ट जोन से बाहर की भूमिका निभाने पर भूमि कहती हैं, 'चाहे मोटे व्यक्ति का किरदार हो या वृद्ध व्यक्ति का। मुझे नहीं लगता कि आपके स्क्रीन पर दिखने के तरीके से इसका कोई लेना-देना है, लेकिन आप कितनी ईमानदारी से कहानी कह रहे हैं, ये जरूरी है।' अभिनेत्रियों के बिकनी पहनने पर भूमि ने कहा, 'मुझे डांस करना पसंद है और मैं आइटम सॉन्ग के विरोध में नहीं हूं। मुझे महिलाओं के स्क्रीन पर बिकनी पहनने से कोई दिक्कत नहीं है। असल में, मैं भी स्क्रीन पर एक दिन पहनूंगी। लेकिन जब महिलाओं को ग्लैमर की एक चीज बना दिया जाता है, यही चीज मुझे पसंद नहीं है।'
भूमि कहती हैं कि आज, एक अभिनेता या अभिनेत्री ऐसे व्यक्ति हैं जो किसी को भी बेहतर होने या करने के लिए प्रेरित करते हैं। मुझे नहीं लगता कि आपके देखने के तरीके से इसका कोई लेना-देना है।

कैसी फिल्में करना पसंद नहीं?
भूमि कहती हैं कि 'मैं ऐसी फिल्में करने में सहज नहीं हूं, जो स्त्री-विरोधी या महिलाओं के खिलाफ हों। या ऐसी फिल्में जो मेरे नैतिक कंफर्ट से बार हों।' भूमि का कहना है कि उनका काम केवल लोगों का मनोरंजन ही नहीं करता बल्कि समाज में भी योगदान कर रहा है। वह कहती हैं, 'अगर थिएटर से बाहर निकलने के बाद दर्शक कुछ अच्छा सीखते हैं, तो मुझे खुशी होगी।'












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