कश्मीर मुद्दे पर अकेला हुआ पाकिस्तान, भारत को मिला दुनिया का समर्थन
नई दिल्ली। जुलाई माह में हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद से ही कश्मीर घाटी में अशांति और तनाव की स्थिति है। पाकिस्तान ने इस पूरे एपिसोड को यूनाइटेड नेशंस जनरल एसेंबली (उंगा) में कैश कराने की पूरी तैयारी कर ली थी। अफसोस की बात है पाक का कोई भी दांव काम नहीं आया। इस वर्ष उंगा में साफ हो गया कि पाक इस मसले पर अब अंतराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ चुका है।

फेल हुईं पाक की सारी कोशिशें
संयुक्त राष्ट्रसंघ (यूएन) में भारत के स्थायी सदस्य सैय्यद अकबरुद्दीन ने कहा है कि यूएन में पाक की ओर से कश्मीर मुद्दे के अंतराष्ट्रीयकरण करने की सारी कोशिशें और एक माह के सारे प्रयास विफल हो चुके हैं। यहां पर दुनिया के सारे देशों ने आतंकवाद का मुकाबला करने की रणनीति पर ध्यान दिया।
पाक के मुद्दे पर नहीं दिया किसी ने ध्यान
अकबरुद्दीन ने कहा कि आतंकवाद पर सबने चर्चा की जो कि भारत के लिए एक बड़ा खतरा है न कि उस बिंदु पर ध्यान दिया जिसका जिक्र नवाज शरीफ ने अपनी स्पीच में किया और यह बिंदु है कश्मीर।
अकबरुद्दीन ने मीडिया से कहा कि अगर एक सामान्य बहस में 131 देशों ने अब तक महासभा को संबोधित किया है और 130 देशों ने पाकिस्तान के उस प्राथमिक मुद्दे की ओर जिक्र नहीं किया। तो इसका क्या मतलब है।
भारत को मिला दुनिया का समर्थन
उन्होंने बताया कि 90 प्रतिशत देशों ने इस हफ्ते 71वीं महासभा के दौरान आतंकवाद को अपनी प्राथमिक चिंता बताया और इस पर चिंता जाहिर की।
साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि भारत को जो समर्थन मिला है और आतंकवाद से उसकी लड़ाई के समर्थन में जिन देशों ने आवाज उठाई है भारत, उनका अहसानमंद है।
उन्होंने जानकारी दी कि उरी आतंकी हमले के बाद कई देशों ने भारत के समर्थन में आवाज उठाई। आतंकवाद से पीड़ित भारत और इससे निपटने के तरीकों को अब बड़े पैमाने पर समर्थन मिलने लगा है।












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