अपने ही बुने जाल में कैसे फंस गए इमरान, भड़काऊ ट्वीट का मोदी ने दिया ट्रंप को हवाला

नई दिल्ली- जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद से ही पाकिस्तान और वहां के प्रधानमंत्री इमरान खान खुद भी भारत के खिलाफ आग उगल रहे थे। भारत ने जम्मू-कश्मीर में जो ऐक्शन लिया, उससे पाकिस्तान की भौगोलिक, राजनीतिक या सामाजिक किसी भी स्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। लेकिन, इमरान खान सारी मर्यादाएं लांघते चले गए। भारत सरकार ने उनके भड़काऊ बयानों पर संयम बरतने की कोशिश की तो उन्हें लगा कि भारत बचाव की मुद्रा में है। उन्होंने अपने शब्द और तीखे कर लिए और न सिर्फ भारत को बल्कि पूरी दुनिया को कभी परमाणु बम के नाम पर तो कभी इस्लाम के नाम पर धमकाना शुरू कर दिया। लेकिन, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के सामने उनकी करतूतों की पोल खोली तो उनके कान खड़े हो गए। उन्होंनें पीएम मोदी से बात खत्म होते ही इमरान को ऐसा हड़काया कि उन्हें अपना बचाव करना मुश्किल हो गया।

ट्रंप ने इमरान को हड़काया

ट्रंप ने इमरान को हड़काया

पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ फोन पर हुई आधे घंटे की बातचीत में इमरान का बिना नाम लिए उनके कुछ हालिया ट्वीट्स का हवाला देते हुए बताया कि "क्षेत्र के कुछ नेताओं का भारत-विरोधी हिंसा को लेकर 'अत्यधिक बयानबाजी और उकसावा' शांति के अनुकूल नहीं था।" पीएम से बात खत्म होते ही ट्रंप ने फौरन हफ्ते में दूसरी बार इमरान को फोन लगाया और उन्हें सख्त चेतावनी दे डाली। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति के दफ्तर ने बताया कि ट्रंप ने इमरान से कहा कि "जम्मू और कश्मीर के हालात को लेकर भारत के साथ नरम बयानबाजी और तनाव कम करने की जरूरत है।"

मोदी की कूटनीति में फंस गए इमरान

मोदी की कूटनीति में फंस गए इमरान

इमरान खान लगातार भारत के खिलाफ आग उगलते रह गए और भारत सरकार ने अपना पूरा ध्यान जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य करने पर फोकस रखा। पीएम मोदी जानते थे कि वे जितनी नरमी बरतेंगे, इमरान खान आपे से बाहर आकर गलतियां करते जाएंगे। क्रिकेटर से नेता बने इमरान के पास राजनीति और राजनयिक दोनों क्षेत्रों में अनुभव का अभाव है और उन्हें पता नहीं है कि उनके भड़कीले ट्वीट्स सभ्य समाज में किस नजर से देखी जा रही है। आखिर वही हुआ, जिसे भारत को अंदाजा था। इमरान गलती पर गलती करते चले गए और आज उन्हीं की गलतियों को आधार बनाकर भारत ने उनके खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर दिया है। इससे इमरान की अपनी छवि के ऊपर तो पानी फिरा ही है, एक बार फिर साबित हो गया है कि पाकिस्तान एक असफल देश तो है ही, कूटनीति के मामले में भी पूरी तरह से फेल हो चुका है।

इमरान के ट्वीट्स ही बने उनके खिलाफ सबूत

पाकिस्तानी पीएम इमरान ने हाल के दिनों में भारत के खिलाफ अनेकों भड़काऊ ट्वीट्स किए हैं। इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार के खिलाफ बहुत ही गलत शब्दों का इस्तेमाल किया है। पिछले रविवार को किए एक ट्वीट में उन्होंने लिखा है- "हिंदू सुप्रीमो मोदी सरकार पाकिस्तान के साथ-साथ भारत के अल्पसंख्यकों के लिए और वास्तव में भारत के नेहरू-गांधी फैब्रिक के लिए भी खतरा है। नाजी विचारधारा और आरएसएस-बीजेपी के संस्थापकों की नस्ली हिंसा और नरसंहार की विचारधारा के लिए सिर्फ गूगल कीजिए। "

दुनिया को चेतावनी

इमरान ने इससे पहले कुछ बेहद खतरनाक ट्वीट्स भी किए थे और लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी खुला चैलेंज दे रहे थे। एक ट्वीट में उन्होंने लिखा कि 'क्या दुनिया चुपचाप स्रेब्रेनिका की तरह नरसंहार देखेगी जहां मुसलमानों का सफाया किया जाएगा। मैं अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चेतावनी देता हूं कि अगर ऐसा हुआ तो मुस्लिम देशों में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिलेंगे और हिंसा की श्रृंखला चल पड़ेगी।'

भारत को युद्ध की धमकी

एक ट्वीट में उन्होंने लिखा, 'फासीवादी हिंदू सुप्रीमो मोदी सरकार को पता होना चाहिए कि सेना और आतंकवादी उनसे भी ताकतवर बल से हार सकते हैं; इतिहास गवाह है कि जब स्वतंत्रता संघर्ष के लिए राष्ट्र एकजुट होता है और मौत से डरता नहीं है तो उसे लक्ष्य प्राप्त करने से कोई भी ताकत रोक नहीं सकती।'

दुनिया को डराने की कोशिश

इमरान यहीं तक नहीं रुके हैं। एक ट्वीट में तो वह भारत के परमाणु हथियारों की सुरक्षा पर ही संदेह जताने की कोशिश करके दुनिया को भी डराने की कोशिश कर चुके हैं। खास बात ये है कि दुनिया के सभी परमाणु शक्ति हमेशा से पाकिस्तान के परमाणु हथियार आतंकियों के कब्जे में जाने की आशंका जताते रहे हैं। लेकिन, इस बार इमरान ने दुनिया को डराने के लिए भारत जैसे जिम्मेदार देश पर ही अपनी कमजोरी थोपने की कोशिश की है। इमरान ने एक ट्वीट किया था, 'दुनिया को फासीवादी, नस्ली हिंदू सुप्रीमो मोदी सरकार के नियंत्रण में मौजूद भारत के परमाणु हथियारों के बारे में भी गंभीरता से सोचना चाहिए। यह ऐसा मुद्दा है जो न सिर्फ क्षेत्र के लिए, बल्कि पूरे विश्व के लिए खतरा है।'

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