जानिए कैसे केरल ने कोरोना की रफ्तार पर लगाया ब्रेक, अब WHO भी कर रहा है तारीफ
नई दिल्ली। भारत में कोरोना का पहला मामला केरल में सामने आया था। अब धीरे-धीरे केरल ही कोरोना के खिलाफ जंग में तेजी से जीत रहा है। यहां पॉजिटिव मामलों की संख्या तेजी से घट रही है। जिनके टेस्ट भी किए जा रहे हैं, उसमें भी ज्यादातर निगेटिव ही आ रहे हैं। लेकिन यह सब कैसे संभव हुआ इसके पीछे की अफसरों, डॉक्टरों और कई लोगों की दिन रात की मेहनत है। इस सब में जो नाम जिसकी सबसे अधिक चर्चा में है। वह हैं केरल के पथनमथिट्टा जिले के कलेक्टर पीबी नूह।

पहला केस केरल में आया था सामने
पथनमथिट्टा में इटली से आए एक परिवार से संक्रमण फैला था। पीबी नूह बताते हैं कि, 7 मार्च को सुबह सात बजे मेरे सीनियर का फोन आया। उन्होंने मुझे इस परिवार के बारे में बताया। जो 29 फरवरी को इटली से वापस लौटा था। तीनों ने एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग को अनदेखा किया और यहां से 200 किमी दूर रन्नी में स्थिति अपने घर के लिए टैक्सी लेकर निकल गए। कुछ दिन बाद उनमें कोरोना के लक्षण दिखने लगे लेकिन उन्होंने अस्पताल को संपर्क नहीं किया। वेनिस से लौटने के एक हफ्ते बाद जब तीनों का परीक्षण किया गया तो वे तीनों कोरोना संक्रमित निकले। यही नहीं उनके दो बुजुर्ग रिश्तेदार भी कोरोना संक्रमित पाए गए।

पथनमथिट्टा जिले के कलेक्टर पीबी नूह की रणनीति आई काम
केरल में कोरोना का पहला संक्रमित मरीज वुहान से लौटा मेडिकल का एक भारतीय छात्र था। जो जनवरी के अंत में चीन से भारत आया था। पहले केस के सामने आने के बाद उसी रात 11:30 बजे, नूह ने अपने बॉस और सरकारी डॉक्टरों की टीम के साथ एक वीडियो कॉल पर एक रणनीति बनाई। इनमें कुछ के लिए पहली बार नहीं था जब वे किसी महामारी के खिलाफ लड़ने जा रहे थे। 2018 में केरल ने कोरोना से ज्यादा जानलेवा निपाह वायरस का प्रकोप झेला था। निपाह पीड़ितों की मृत्य दर जहां 70 फीसदी थी, वहीं कोरोना संक्रमित मरीजों में यह दो प्रतिशत के करीब दर्ज की गई है। उस वक्त उठाए गए विभिन्न कदम और उनसे मिले सबक बेहद काम आए।

केरल ने शुरुआत मे बनाई थी 18 टीमें
केरल में कोरोना से 17 लोगों की मौत हुई है। कोरोना का ना तो अभी तक टीका बना है और ना ही कोई इलाज है। लेकिन केरल ने अपने प्रयासों से इस पर कुछ हद तक काबू पा लिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने केरल की प्रशंसा करते हुए कहा कि, सीमित संसाधनों वाली राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली ने संभावित आपदा को अच्छे से संभाला। केरल सरकार ने पहला मामला आने से पहले ही 26 जनवरी को कोरोना से निपटने के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित कर लिया था। डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन जैसे क्वारंटाइन से लेकर आइसोलेशन और कांटेक्ट खोजने के काम के लिए 50 लोगों की 18 समितियों का गठन किया। केरल के स्वास्थ्य विभाग ने लोगों का पता लगाने, रैपिड टेस्टिंग, स्क्रीन टेस्टिंग समेत समेत सभी उपायों को अपनाया। संक्रमण की संभावना, संक्रमित या पाजिटिव के लिए अलग अलग स्तरों के प्रोटोकॉल बनाए। लोगों की बड़े पैमाने पर जांच की।

केरल की स्वास्थ्य मंत्री, केके शैलजा के काम की हो रही प्रशंसा
नूह ने टास्क फोर्स का बाद में और विस्तारित किया। इस टीम ने संक्रमित परिवार के मोबाइल फोन जीपीएस डेटा और हवाई अड्डे, सड़कों और दुकानों से लिए गए निगरानी फुटेज का उपयोग किया गया। इस सब में उन्हें सरकार की ओर भी पूरा साथ मिला। केरल की स्वास्थ्य मंत्री, केके शैलजा जो खुद एक साइंस टीचर रह चुकी हैं। उन्होंने समय रहते इस बीमारी का अंदाजा हो गया था। संकट की त्वरित और कुशल हैंडलिंग के चलते उन्हें मीडिया ने काफी सराहा है। जब देश के अन्य राज्य इस बीमारी को लेकर सक्रिय नहीं तो तब शैलजा ने केरल के चार अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों को जनवरी में यात्रियों की स्क्रीनिंग शुरू करने का आदेश दिया था। लक्षणों वाले सभी लोगों को एक सरकारी सुविधा में ले जाया गया, जहां उनका परीक्षण किया गया और उन्हें क्वारंटाइन किया गया।

एयरपोर्ट को अस्पतालों से जोड़ा
केरल ने जो लोग कोरोना से संक्रमित तीनों मरीजों के संपर्क में आए थे, उन्हें 28 दिनों तक अलग-थलग रखा गया, जबकि डब्ल्यूएचओ ने महज 14 दिनों की पृथक अवधि सुझाई थी। अलग-थलग रखे गए लोगों की सेहत और जरूरतों का पूरा ख्याल रखा गया। इसके अलावा केरल ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, पैरामेडिकल स्टाफ, स्थानीय निकाय सदस्य और डॉक्टरों से लैस त्वरित प्रतिक्रिया दल बनाए। 200 आइसोलेशन वॉर्ड तैयार करने के साथ ही सभी चिकित्साकर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दीं। केरल के सभी हवाईअड्डों को जिला अस्पतालों क आपातकालीन कार्य सेवा से जोड़ा गया है। किसी भी यात्री को बुखार या कोरोना के लक्षण दिखने पर उसे हवाई तुरंत हवाईअड्डे से अस्पताल भेज दिया जाता है।

चिकित्सकों को स्थिति से निपटने की खुली छूट दी
सड़क मार्ग से राज्य में आने वाले लोगों की जांच के लिए डॉक्टर और चिकित्साकर्मियों को लगाय गया है। यात्रियों के शरीर का तापमान जांचने के साथ ही उन्हें वायरस को रोकने के उपायों के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है। कोरोना वायरस से जुड़ी अफवाहों पर लगाम लगाने लगाने के लिए सोशल मीडिया पर कड़ी नजर रखी गई। पहला मामला सामने आने के दो हफ्ते के भीतर ही दस मामले दर्ज कर कई गिरफ्तारियां की गईं। इन कदमों से कोरोना वायरस को लेकर लोगों में हड़कंप नहीं मचा। केरल की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा खुद उन जिलों में पहुंचीं, जहां कोरोना से संक्रमित मरीजों को भर्ती किया गया था। वह स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ दिन में दो बार समीक्षा बैठक कर स्थिति का जायजा लेती थीं। चिकित्सकों को स्थिति से निपटने की खुली छूट दी गई।












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