Chandrayaan 2: आखिरी के 15 मिनट में कैसे रास्ते से भटक गया इसरो का लैंडर विक्रम?
आखिर कैसे चांद से महज 2.1 किलोमीटर दूर पहुंचकर लैंडर विक्रम का भारतीय स्पेस स्टेशन से संपर्क टूट गया है, It was about 15 minutes after the Vikram began its descent that communication with the Chandrayaan 2 lander was lost.
बेंगलुरु। चांद से महज 2.1 किलोमीटर दूर पहुंचकर लैंडर 'विक्रम' का भारतीय स्पेस स्टेशन से संपर्क टूट गया। शुरुआत के अपने सभी चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद ठीक लैंडिंग से पहले लैंडर तय मार्ग से भटक गया। जिसके बाद इसरो के सेंटर में सन्नाटा छा गया। चंद्रयान-2 मिशन के लिए उत्सुक पीएम मोदी भी इसरो सेंटर पहुंचे थे लेकिन अचानक संपर्क टूटने के बाद पूरे हॉल के अंदर मायूसी छा गई।

लैंडर विक्रम का इसरो से संपर्क टूट गया
इस बात की आशंका पहले से ही थी कि लैंडर विक्रम के चांद की सहत पर पहुंचे से पहले के 15 मिनट काफी अहम होंगे, लैंडर विक्रम को देर रात लगभग 1 बजकर 38 मिनट पर चांद की सतह पर लाने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन चांद की सतह पर पहुंचने से करीब 2.1 किलोमीटर पहले ही उसका इसरो से संपर्क टूट गया, हालांकि अभी भी विक्रम और प्रज्ञान से संपर्क की उम्मीदें बाकी हैं लेकिन यह किसी चमत्कार से कम नहीं होगा।
चलिए जानते है कि आखिर 15 मिनट में क्या हुआ और कैसे इसरो का संपर्क लैंडर विक्रम से टूट गया...

आखिर 15 मिनट में क्या हुआ...
- रात करीब 1 बजकर 38 मिनट पर लैंडर विक्रम को चांद की सतह पर लाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
- 1: 44 मिनट पर लैंडर विक्रम ने 'रफ ब्रेकिंग के चरण को पार किया था।
- 1:49 मिनट पर विक्रम लैंडर ने सफलता पूर्व अपनी गति कम कर ली थी।
- 1:52 मिनट पर चांद पर उतरने के अंतिम चरण में चंद्रयान-2 पहुंच चुका था लेकिन उसके बाद चंद्रयान का संपर्क धरती पर मौजूद स्टेशन से टूट गया।

चांद से महज 2.1 किलोमीटर दूर था लैंडर विक्रम,
जिस वक्त ये हुआ उस वक्त लैंडर विक्रम, चांद से महज 2.1 किलोमीटर दूर था, इसके बाद इसरो चेयरमेन ने अपनी घोषणा में बेहद दुखी मन से कहा कि विक्रम की लैंडिंग जैसी होनी चाहिए थी नहीं हो सकी। आपको बता दें कि विक्रम के अंदर मौजूद प्रज्ञान को लैंडिंग के कुछ घंटो बाद चांद की सतह पर उतारा जाना था, वही चांद की सतह पर चलकर वहां से आंकड़े एकत्रित करता।

विक्रम अपने लैंडिंग पथ से भटक गया...
मिशन कंट्रोल रूम में लगे ट्रेक डाटा पर नजर डालेंगे तो पता चल जाएगा कि आखिरी समय में विक्रम अपने लैंडिंग पथ से भटक गया था, हो सकता है कि विक्रम की लैंडिंग किसी ऐसे क्रेटर में हो गई हो जिसकी वजह से वह खुद को संभाल नहीं पाया हो और कहीं फंस गया हो या फिर विक्रम को क्षति भी पहुंची हो, इसे सांइंस की भाषा में क्रैश लैडिंग कहते हैं।

पीएम मोदी ने कहा-हमें नाउम्मीद नहीं होना चाहिए
इसके बाद पीएम मोदी ने कहा कि इसरो के वैज्ञानिकों को इससे निराश नहीं होना चाहिए। सफलता और विफलता हर किसी के जीवन में आती रहती है, लेकिन इससे निराश नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसरो के हर वैज्ञानिक पर देशवासी को गर्व है। हमें नाउम्मीद नहीं होना चाहिए, मुमकिन है हम दोबारा विक्रम से संपर्क स्थापित करने में सफल हो जाएं।












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