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महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी में कैसे शुरू हुई तू तू मैं मैं? सुअर शब्द से बिगड़ी बात, मामला जान चौंक जाएंगे

Kalyan Banerjee Vs Mahua Moitra: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के भीतर मचे सियासी घमासान को शांत करने की कोशिश की। तृणमूल कांग्रेस के दो वरिष्ठ सांसद-महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी-के बीच चले तीखे जुबानी हमले ने जब सुर्खियां बटोरीं, तो ममता बनर्जी को हस्तक्षेप करना पड़ा।

इस विवाद में "सुअर", "महिला विरोधी", "घर तोड़ने वाली" जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल हुआ, जिसने पार्टी की छवि को झटका दिया। इसके बाद तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने पार्टी के लोकसभा में चीफ व्हिप के पद से इस्तीफा दे दिया है।

Kalyan Banerjee Vs Mahua Moitra

कल्याण बनर्जी ने बताया क्यों दिया चीफ व्हिप के पद से इस्तीफा?

कल्याण बनर्जी ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा, "मैंने लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दे दिया है क्योंकि 'दीदी' (मुख्यमंत्री ममता बनर्जी) ने वर्चुअल मीटिंग में कहा कि पार्टी सांसदों के बीच समन्वय की कमी है। इसलिए इसकी जिम्मेदारी मेरी है। मैंने यह पैसला खुद लिया है।"

महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी में विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

विवाद की चिंगारी तब भड़की जब महुआ मोइत्रा ने इंडिया टुडे को दिए पॉडकास्ट इंटरव्यू में कल्याण बनर्जी पर तीखा हमला करते हुए उन्हें "सुअर" कहा। महुआ मोइत्रा ने कहा, ''आप सुअर से कुश्ती नहीं कर सकते और ना ही करना चाहिए क्योंकि सुअर को यह पसंद आता है और आप गंदे हो जाते हैं।" इतना ही नहीं महुआ मोइत्रा ने यह भी कहा था कि कल्याण बनर्जी को sexually frustrated भी कह दिया था।

ये बयान उन्होंने तब दिया जब कल्याण बनर्जी ने उनकी शादी पर टिप्पणी करते हुए उन्हें "महिला विरोधी" और "घर तोड़ने वाली" बताया था। उन्होंने महुआ मोइत्रा पर आरोप लगाया था कि उन्होंने एक 65 वर्षीय पुरुष पूर्व बीजेडी सांसद पिनाकी मिश्रा से शादी कर एक 40 साल पुराना परिवार तोड़ दिया है।

कल्याण बनर्जी का जवाब- 'महुआ मोइत्रा ने मुझे अपशब्द कहा है'

महुआ मोइत्रा के इन बयानों के जवाब में कल्याण बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर लंबा पोस्ट लिखते हुए कहा,

"एक पुरुष सहकर्मी को 'sexually frustrated' कहना न तो साहस है और न ही नारीवाद, बल्कि यह सीधा अपशब्द है। अगर यही भाषा किसी महिला के लिए इस्तेमाल होती, तो पूरे देश में आक्रोश फैल जाता-और सही भी होता। लेकिन जब एक पुरुष को टारगेट किया जाता है, तो लोग उसे नजरअंदाज कर देते हैं या ताली बजाते हैं। हमें यह साफ समझना होगा कि गाली, गाली होती है - चाहे वो किसी भी जेंडर के लिए हो।''

कल्याण बनर्जी ने लिखा,

''मैंने महुआ मोइत्रा द्वारा हाल ही में एक सार्वजनिक पॉडकास्ट में दिए गए व्यक्तिगत और आपत्तिजनक बयानों को गंभीरता से लिया है। महुआ ने अपने बयान में जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया-जैसे एक सांसद की तुलना "सुअर" से करना-वह न सिर्फ असभ्य है, बल्कि यह साफ दर्शाता है कि उन्हें सार्वजनिक संवाद के बुनियादी शिष्टाचार और गरिमा का कोई सम्मान नहीं है।''

कल्याण बनर्जी बोले- 'जो ये सोचते हैं कि गालियां देकर मुद्दों को दबा सकते हैं, उन्हें...'

कल्याण बनर्जी ने आगे कहा,

''जो लोग सोचते हैं कि गालियां देकर वे मुद्दों को दबा सकते हैं, उन्हें अपनी राजनीति के स्तर पर सोचने की जरूरत है। जब कोई जनप्रतिनिधि व्यक्तिगत कटाक्ष और भद्दे आरोपों का सहारा लेता है, तो यह ताकत नहीं बल्कि उसकी कमजोरी को उजागर करता है। मैंने जो भी बात कही, वह सार्वजनिक जिम्मेदारी और व्यक्तिगत आचरण से जुड़ी थी-जिसे हर नेता, चाहे वह पुरुष हो या महिला, जवाबदेह तरीके से स्वीकार करना चाहिए। अगर किसी को ये सवाल असुविधाजनक लगते हैं, तो उन्हें 'महिला विरोधी' कहकर आलोचना से बचने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।''

'महुआ मोइत्रा की गटर जैसी भाषा है'

कल्याण बनर्जी ने पोस्ट में लिखा,

"महिलाओं के सम्मान की बात करने वाले अगर खुद ऐसी भाषा का इस्तेमाल करेंगे, तो वो खुद ही दोहरे मापदंड को बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसे शब्द पुरुषों को चुप रहने के लिए मजबूर करते हैं, जबकि अगर यही बात किसी महिला के खिलाफ कही जाती, तो बर्दाश्त नहीं की जाती। अगर महुआ मोइत्रा को लगता है कि इस तरह के गटर जैसी भाषा से वे अपने काम की विफलताओं पर पर्दा डाल लेंगी या सवालों से ध्यान भटका लेंगी, तो वह खुद को धोखा दे रही हैं। जो लोग जवाब देने की बजाय गाली का सहारा लेते हैं, वे लोकतंत्र के सच्चे प्रतिनिधि नहीं बल्कि उसकी शर्मिंदगी हैं -और देश की जनता यह सब देख रही है।"

ममता बनर्जी का हस्तक्षेप

इस पूरे मामले पर पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने वर्चुअल मीटिंग में सभी सांसदों को सख्त संदेश दिया कि आपस में लड़ने के बजाय "वोटर रिवीजन (SIR)" और " NRC" जैसे अहम मुद्दों पर केंद्र सरकार से लड़ने पर ध्यान दें।

ममता के दखल और कल्याण के इस्तीफे के बाद फिलहाल पार्टी के भीतर विवाद शांत होता दिख रहा है, लेकिन यह लड़ाई तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति की गंभीर खाई को उजागर करती है।

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