अमरनाथ हमले के बाद बड़ा सवाल, ग्रेड A के अलर्ट के बाद भी कैसे हुआ हमला

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नई दिल्‍ली। सोमवार की रात अमरनाथ तीर्थयात्रियों पर हुआ आतंकी हमला हर किसी को हैरान करने के लिए काफी है। 15 वर्ष बाद आतंकी फिर से इस तीर्थयात्रा को अपना निशाना बनाने में कामयाब हो गए। हमले के बाद अब एक दूसरे को दोष देने और आरोप प्रत्‍यारोप का खेल शुरू हो गया है। वही हर कोई इस बात को लेकर हैरान है कि जब इस तरह के हमले को लेकर एक खास इंटेलीजेंस दी गई थी तो फिर आखिर आतंकी अपने मंसूबों में कैसे कामयाब हो गए?

अमरनाथ हमले के बाद बड़ा सवाल, ग्रेड A के अलर्ट के बाद भी कैसे हुआ हमला

एक हफ्ते पहले जारी हुआ था ए ग्रेड अलर्ट

करीब एक हफ्ते पहले ही अमरनाथ यात्रा को लेकर एक अलर्ट जारी किया गया था। इस अलर्ट में कहा गया था कि लश्‍कर-ए-तैयबा के आतंकी इस यात्रा को निशाना बना सकते हैं। यह अलर्ट इतना ज्‍यादा विशेष था कि इसमें साफ-साफ बता दिया गया था कि लश्‍कर आतंकी हमले को अंजाम दे सकता है। अलर्ट ए ग्रेड का था। लेकिन अब इस हमले के बाद सवाल उठ रहा है कि इस अलर्ट के बाद जब सारे सुरक्षा इंतजाम मौजूद थे और सुरक्षा व्‍यवस्‍था इतनी कड़ी थी तो फिर हमले को कैसे अंजाम दिया गया। सीआरपीएफ के डायरेक्‍टर जनरल आरआर भटनागर ने मीडिया को जानकारी दी कि तीर्थयात्रियों ने खुद को अमरनाथ श्राइन बोर्ड के तहत रजिस्‍टर्ड नहीं करवाया था। सिर्फ इतना ही नहीं वे सभी उस काफिले का हिस्‍सा भी नहीं थे जो सुरक्षाबलों के साए में चल रहा था। उन्‍होंने यह भी कहा कि जिस बस में यात्री थे उसने शाम सात बजे के कर्फ्यू के नियम को तोड़ा था।

हर पहलू से हो रही जांच

अधिकारियों का कहना है कि यह हमला काफी दुखद है और इसे नहीं होना चाहिए था और फिलहाल एक दूसरे पर आरोप लगाने का समय नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक हमला एक बड़ी चूक है। अब देखना होगा कि हमला क्‍यों और कैसे हुआ। फिलहाल हर पहलू से इसकी जांच की जा रही है लेकिन प्राथमिकता आतंकियों को पकड़ने की है। सूत्रों की मानें तो जिन आतंकियों ने तीर्थयात्रियों की बस पर हमला किया उनकी पहचान कर ली गई है। सुरक्षा अधिकारियों की मानें तो जल्‍द ही इन आतंकियों को या तो पकड़ा जाएगा या फिर इनका खात्‍मा किया जाएगा। जम्‍मू कश्‍मीर पुलिस का कहना है कि पीओके का रहने वाला अबु इस्‍माइल इस हमले का मास्‍टरमाइंड है। जिन आतंकियों ने उनकी मदद की उन्‍हें भी पहचान लिया गया है।  

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English summary
A week before the Amarnath yatra commenced, there was a specific intelligence warning about the same being under threat from the Lashkar-e-Tayiba.
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