देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रह रहे अवैध रोहिंग्या, सरकार को नहीं पता सटीक आंकड़ा
राज्यसभा में रोहिंग्याओं से जुड़े एक सवाल पर गृह मंत्रालय ने अपना जवाब दिया। सदन में बुधवार को बताया गया कि अवैध रोहिंग्या दिल्ली, यूपी, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सहित 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रह रहे हैं।
Home Ministry On Illegal Rohingya : राज्यसभा में बजट सत्र (Budget session 2021) के दौरान भारत में पड़ोसी देश म्यांमार से आए रोहिंग्याओं से जुड़े एक सवाल पर गृह मंत्रालय ने अपना जवाब दिया। सदन में बुधवार को बताया गया कि अवैध रोहिंग्या दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सहित 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रह रहे हैं, हालांकि उनकी निर्धारित संख्या केंद्र सरकार के पास नहीं है।

सांसद किरोड़ी लाल मीणा (MP Kirori Lal Meena) के सवाल पर मंत्रालय ने कहा कि साल 2014 और साल 2019 में सभी राज्यों को रोहिंग्याओं (rohingya muslims) को वापस भेजने के लिए निर्देश दिए गए। मंत्रालय ने बताया कि जिस शख्स के पास उचित दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें वापस भेजने के नियम हैं।
ये है गृह राज्यमंत्री का जवाब
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय (Nityananda Rai) का कहना है कि अवैध रूप से रोहिंग्या (Illegal Rohingya) भारत में ज्यादातर जम्मू कश्मीर, तेलंगाना, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, कर्नाटक और केरल में रह रहे हैं। वहीं निर्धारित संख्या पर उन्होंने कहा कि इनके पास कोई भी वैध कागजात नहीं हैं, इसलिए रोहिंग्याओं के बारे में केंद्र सरकार के पास कोई सटीक आंकड़ा नहीं है।
राय ने कहा कि विदेशी नागरिकों के निर्वासन और प्रत्यावर्तन के संबंध में सभी निर्देश 24 अप्रैल, 2014 और 1 जुलाई, 2019 को सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी किए गए थे। जिस किसी शख्स के पास उचित कागजात नहीं हैं उन्हें वापस भेजने के नियम हैं।
पाकिस्तान ने 5133 बार किया संघर्षविराम का उल्लंघन
मंगलवार को गृह मंत्रालय की ओर से पिछले 3 सालों में जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की ओर से सीजफायर उल्लंघन और आतंकी हमलों के आंकड़ों को पेश किया गया था। इन आंकड़ों में साल 2018 से लेकर साल 2020 तक तीन वर्षों में पिछले साल सबसे ज्यादा संघर्षविराम का उल्लंघन किया गया। साल 2020 में पाकिस्तान ने 5133 बार युद्धविराम का उल्लंघन किया।












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