लोकसभा में गृह मंत्रालय ने बताया, 3 सालों में पुलिस हिरासत में 348 लोगों की मौत, 1189 को झेलनी पड़ी यातना
नई दिल्ली, 03 अगस्त: गृह मंत्रालय ने मंगलवार को लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि साल 2018-19 और 2020-21 के बीच पुलिस हिरासत में 348 लोगों की मौत हुई हैं। वहीं इन्हीं तीन सालों के दौरान पुलिस हिरासत में 1189 लोगों को प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

एक प्रश्न के लिखित जवाब में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) से प्राप्त जानकारी के अनुसार 2020-21 में पुलिस हिरासत में 100 मौतें और पुलिस हिरासत में यातना के 236 मामले दर्ज किए गए। ऐसे ही 2019-20 में पुलिस हिरासत में 112 मौतों और यातना के 411 मामले और साल 2018-19 में 136 लोगों की मौत और 542 यातनाओं के मामल सामने आए।
दरअसल, यह सवाल शिवगंगा के सांसद कार्ति चिदंबरम द्वारा पूछा गया, जिसमें बताया कि कोरोना लॉकडाउन को लागू करने में नागरिकों के खिलाफ पुलिस की हिंसा से संबंधित है। इस पर राय ने उत्तर दिया कि भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार 'पुलिस' और 'सार्वजनिक व्यवस्था' राज्य के विषय है, जिसमें जांच, पंजीकरण और अपराधों के अभियोजन, अभियुक्तों की सजा, संरक्षण सहित कानून और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है।
वहीं हिरासत में हुई मौतों और यातनाओं के लिए दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण मांगने वाले उप-प्रश्न के संबंध में गृह मंत्रालय ने दोहराया कि 'पुलिस' और 'सार्वजनिक व्यवस्था' राज्य के विषय हैं, राज्य सरकारों को ऐसे अपराधों से निपटने का अधिकार है, जो कानून के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार उनके संज्ञान में आएं। उन्होंने कहा कि कानून के विभिन्न पहलुओं पर पुलिस को संवेदनशील बनाने की कवायद एक सतत प्रक्रिया है।












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