हमारी और आपकी भारतीय रेल की 20 ख़ास बातें
नई दिल्ली। मयंक दीक्षित- यदि आप रेल बजट की जटिल खबरों और ब्रेकिंग न्यूज़ में उलझ चुके हैं तो पढ़िए भारतीय रेलवे की लंबी यात्रा बेहद सरल और संक्षिप्त वर्जन में। पटरी से इंजन, इंजन से डिब्बे, डिब्बों से जनरल, जनरल से सलीपर क्लास और स्लीपर क्लास से ए.सी. तक का सुहाना सफर-

सत्रहवीं शताब्दी का ख्याल
सत्रहवीं शताब्दी में माल ढुलाई से लेकर यात्रा के लिए लॉर्ड डलहौजी ने देश में एक इंडियन रेलवे नेटवर्क शुरू करने का विचार किया था।

सबसे पहली ट्रेन
16 अप्रैल 1853 को मुंबई से ठाणे के बीच पहली ट्रेन चली। इस सफर की दूरी 35 किलोमीटर थी।

पहली पैसेंजर ट्रेन
15 अगस्त 1854 में हावड़ा से हुगली के बीच पहली पैसेंजर ट्रेन चलाई गई। 3 मार्च 1859 में इलाहाबाद और कानपुर के बीच रेल सेवा की शुरुआत हुई।

स्टीमर पर लादनी पड़ी ट्रेन
1 अगस्त 1864 को कलकत्ता से दिल्ली आई पहली ट्रेन। खास बात यह रही कि इलाहाबाद में स्टीमर पर लाद कर पार कराई गई गंगा।

कब आया फर्स्ट क्लास डिब्बा
1872 में फर्स्ट क्लास के डिब्बों में एयर कूलर की सुविधा की शुरुआत हुई। जिसके बाद से आधुनिकता की नई परिभाषा रची गई।

इतना हुआ विस्तार
सन 1880 का समय आते-आते रेलवे का विस्तार लगभग 14,400 किलोमीटर तक हो चुका था।

डिब्बों में शौचालय
1891 में रेलवे की तरफ से लोगों की सुविधा के लिए एक पहल की गई। प्रथम श्रेणी के डिब्बों में शौचालयों की व्यवस्था कराई गई, लेकिन निचली श्रेणी के डिब्बों में शौचालय की व्यवस्था करने में काफी समय लग गया।

पहला रेल इंजन
1899 में ‘लेडी कर्जन' नाम का पहला रेल इंजन अजमेर में बना। जिसके बाद से तकनीकी कुशलता का जमकर प्रयोग किया जाने लगा।

निचली श्रेणी के डिब्बों में शौचालय
1907 में निचली श्रेणी के डिब्बों में शौचालयों की व्यवस्था कराई गई। जिसके बाद से जनसाधारण सुविधाओं पर ज़ोर दिया जाने लगा।

आम बजट से रेल बजट अलग
1924 में एक्वर्थ ने आम बजट से रेल बजट को अलग करने का प्रस्ताव रखा, जो स्वीकार कर लिया गया और रेल के बजट को आम बजट से अलग कर दिया गया।

नए रूप में पेश हुआ बजट
1925 में आम बजट से रेल बजट के अलग हो जाने के बाद नए रंग-रूप में पहला रेल बजट पेश किया गया।

ए.सी. वाली रेलगाड़ी
1936 में लोगों को आरामदायक सफर देने के लिए एयर कंडीशनर डिब्बों की व्यवस्था की गई। जिसके बाद से लग्ज़री की डिमांड रेलवे में बढ़ने लगी।

बनने लगे इंजन
26 जनवरी 1950 पर जहां गणतंत्र की नींव रखी जा रही थी तब चितरंजन लोको वर्क्स की स्थापना की गई। पहला स्टीम इंजन ‘देशबंधु' यहीं पर बना था। अब यहां पर इलेक्ट्रिक इंजन बनाए जाते हैं।

सफर आनंददायक
1952 में पैसेंजर श्रेणी डिब्बों में लाइट और पंखों की व्यवस्था की गई, जिससे यात्रियों को रेल का सफर आनंददायक हो।

सेकेंड क्लास स्लीपर
1967 में लंबी दूरी के ट्रेनों में सेकेंड क्लास के स्लीपर डिब्बों की व्यवस्था की गई, ताकि लोगों को आराम मिल सके।

स्टीम इंजनों का उत्पादन बंद
1972 में स्टीम इंजनों का उत्पादन बंद कर दिया गया था। इसकी जगह डीजल व विद्युत इंजनों ने ले ली थी।

दिल्ली में कम्प्यूटरीकृत आरक्षण
1986 का दौर था जब रेलवे में टेक्नोलॉजी ने अपने कदम जमा लिए। 1986 में दिल्ली में कम्प्यूटरीकृत आरक्षण शुरू हो गया।

विश्व धरोहर
2 दिसंबर 1999 में दार्जीलिंग हिमालयन रेलवे को विश्व धरोहर का दर्जा दिया गया।

दूरंतो एक्सप्रेस
2009-10 में तत्कालीन रेलवे मंत्री ममता बनर्जी ने दूरंतो एक्सप्रेस के साथ युवा एक्सप्रेस की शुरुआत की। हालांकि खबरें हैं कि इस एक्सप्रेस के ठहरावों को बढ़ाया जाएगा।

बजट 2014
2013-14 यह इस बार का अहम बजट वर्ष है, जिसमें बुलेट ट्रेनों से लेकर कई सेमी हाईस्पीड ट्रेनों की शुरुआत पर ज़ोर दिया गया है।












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