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POCSO पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, 'महिला पर भी दर्ज हो सकता है इसके तहत केस, कानून जेंडर न्यूट्रल'

High Court On POCSO Act: बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न के मामलों में सजा देने और इस अपराध पर लगाम लगाने के उद्देश्य से पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) लाया गया है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने 52 साल की महिला पर केस चलाने की अनुमति देते हुए कहा कि यह कानून स्त्री और पुरुष के आधार पर भेद नहीं करती है। कानून जेंडर न्यूट्रल है और इसके तहत महिला पर भी केस चलाया जा सकता है।

हाई कोर्ट के पास 52 साल की एक महिला ने केस खारिज करने की याचिका लगाई थी। कोर्ट में आरोपी महिला ने केस रद्द करने की मांग करते हुए दलील दी थी कि महिला होने की वजह से उन पर केस दर्ज नहीं किया जा सकता है। महिला पर एक नाबालिग ने साल 2020 में जबरन शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने शिकायत में बताया कि उस वक्त उसकी उम्र सिर्फ 13 साल थी।

High Court On POCSO Act

हाई कोर्ट ने कहा, 'POCSO कानून जेंडर न्यूट्रल है'

हाई कोर्ट ने 52 साल की महिला अर्चना पर केस चलाने की अनुमति देते हुए कहा कि कानून अपराधी और पीड़ित दोनों में लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं करता है। यह एक जेंडर न्यूट्रल कानून है। कोर्ट ने कहा, 'पॉक्सो एक्ट की धारा 4 और 6 यह साफ करती है कि किसी भी नाबालिग को पेनेट्रेटिव या अन्य यौन गतिविधियों के लिए मजबूर करना अपराध के दायरे में आता है।' कोर्ट ने इस तर्क को मानने से इनकार कर दिया कि यौन अपराध या बलात्कार के आरोप महिला पर नहीं लग सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि आरोप महिला पर भी लग सकते हैं, कानून के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता।

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यह है पूरा मामला

पीड़ित नाबालिग की शिकायत के मुताबिक, 'साल 2020 में वह आरोपी महिला अर्चना के घर पर गया था। मई और जून में दो बार महिला ने जबरन शारीरिक संबंध बनाए और उसे धमकी दी थी कि इस बारे में घर पर किसी को न बताए।' पीड़ित ने अपनी शिकायत में बताया कि इस घटना की वजह से वह बुरी तरह से डर गया था और लगातार तनाव में रहता था। यहां तक कि बेंगलुरु छोड़कर दुबई आ जाने के बाद भी वह परेशान रहता था। घटना के 4 साल बाद 2024 में उसने परिवार को इस बारे में बताया जिसके बाद परिवार ने केस दर्ज कराने का फैसला किया।

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