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हाथरस कांड वाले 'भोले बाबा' को क्यों मिली क्लीनचिट! यूपी सरकार की 'मजबूरी' की इनसाइड स्टोरी

Hathras News: यूपी के हाथरस में एक सत्संग के दौरान मची भगदड़ के मामले में सूरजपाल सिंह उर्फ स्वयंभू 'भोले बाबा' उर्फ नारायण साकार हरि को एसआईटी की जांच में क्लीनचिट मिलने पर सवाल उठ रहे हैं। बसपा प्रमुख मायावती ने इसे सीधे-सीधे 'राजनीति से प्रेरित' बताया है।

एसआईटी रिपोर्ट के आधार पर इस कांड के लिए जिम्मेदार मानते हुए सस्पेंड हुए एक अधिकारी ने भी दावा किया है कि सूरजपाल को क्लीनचिट दिया गया है।

hathras stampede

मायावती ने योगी सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने एक्स पर लिखा है 'एसआईटी द्वारा सरकार को पेश रिपोर्ट घटना की गंभीरता के हिसाब से नहीं होकर राजनीति से प्रेरित ज्यादा लगती है, यह अति-दुःखद।'

इसे भी पढ़ें- हाथरस मामले में बड़ा एक्शन, SDM और CO समेत 6 अधिकारी सस्पेंड, SIT रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई

क्लीनचिट देने का प्रयास चर्चा का विषय-मायावती
हाथरस कांड में 121 बेगुनाह महिलाओं और बच्चों की दर्दनाक मौत को लेकर उन्होंने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए आगे कहा है, 'इस अति-जानलेवा घटना के मुख्य आयोजक भोले बाबा की भूमिका के सम्बंध में एसआईटी की खामोशी भी लोगों में चिन्ताओं का कारण। साथ ही, उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के बजाय उसे क्लीनचिट देने का प्रयास खासा चर्चा का विषय।'

एसआईटी ने आयोजकों और स्थानीय प्रशासन को माना है हादसे का जिम्मेदार
2 जुलाई को हुए इस भगदड़ कांड में उत्तर प्रदेश सरकार ने दो सदस्यीय एसआईटी की 300 पन्नों की रिपोर्ट के आधार पर 6 अधिकारियों को सस्पेंड किया है। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में हादसे के लिए सत्संग के आयोजकों (सेवादारों) की गलती और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार माना है।

'निश्चित तौर पर भोले बाबा को क्लीनचिट दे दी गई है'
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना के लिए निलंबित हुए एक अधिकारी ने कहा है, 'एसआईटी की रिपोर्ट से निश्चित तौर पर घटना में भोले बाबा को क्लीनचिट दे दी गई है। अधिकारियों और आयोजकों (ज्यादातर सेवादार (स्वंयसेवक) हैं जो कि गिरफ्तार हो चुके हैं) के खिलाफ कार्रवाई की गई है।'

'फर्जी बाबाओं' की लिस्ट में शामिल होगा सूरजपाल
जबकि, इस घटना की गंभीरता को देखते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने सूरजपाल समेत अन्य 20 'फर्जी बाबाओं' को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी शुरू कर दी है। सैद्धांतिक तौर पर इसपर सहमति बन चुकी है और 18 जुलाई को इसपर औपचारिक मुहर लगने की संभावना है।

इसके बाद परिषद प्रयागराज में महाकुंभ मेला के अधिकारियों को भी सूचना देगा कि इन्हें संत न मानें और इस आधार पर इन 'फर्जी बाबाओं' को भूमि आदि आवंटित ना करें। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद देश में हिंदू साधु-संतों का सर्वोच्च संगठन है।

दलित वोट बैंक बन गया योगी सरकार की मजबूरी?
हाथरस कांड में अबतक जिस तरह से सूरजपाल बचा हुआ है, उसको लेकर निलंबित हुए एक और वरिष्ठ अफसर ने दावा किया है कि 'भोले बाबा का दलित समुदाय में बहुत ही ज्यादा प्रभाव है....उसके खिलाफ कार्रवाई करने में कुछ चिंताएं हो सकती हैं। इसके अलावा बाबा के खिलाफ कार्रवाई से शांति भड़कने की भी आशंका हो सकती है। अभी तक उसपर कोई आरोप नहीं है।'

हादसे को लेकर सूरजपाल पर उठ रहे हैं कई सवाल
पहले की रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले की जांच कर रही तीन सदस्यीय जुडिशल पैनल से हादसे के कुछ चश्मदीदों ने भी कहा था,'अगर भोले बाबा अपने पैर के नीचे की मिट्टी उठाने को नहीं कहते तो भगदड़ को टाला जा सकता था।' एक और चश्मदीद के मुताबिक, 'वह माइक से भक्तों को शांत रहने को कह सकते थे। लेकिन वे तो कार में बैठक आयोजन स्थल छोड़कर चले गए।'

यूपी सरकार की 'मजबूरी' की इनसाइड स्टोरी
हाथरस से करीब 65 किलोमीटर दूर कासगंज में सूरजपाल के एक भक्त मुकेश वर्मा को लगता है, 'बाबा गरीबों और वंचितों से जुड़े हुए हैं। वैसे वे राजनीति से नहीं जुड़े हैं, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई राजनीतिक रूप से सरकार को महंगी पड़ सकती है।'

लोकसभा चुनाव में बीजेपी से दलित वोट छिटकने की चर्चा
हाल में हुए लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में बीजेपी का प्रदर्शन पिछले तीन लोकसभा और दो विधानसभा चुनावों में सबसे खराब रहा है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि इस चुनाव बीजेपी से वह दलित वोट बैंक छिटक गया है, जिसने पिछले चार चुनावों में उसकी बहुत ज्यादा सहायता की थी।

प्रदेश में विधानसभा की 10 सीटों पर उपचुनाव भी होने हैं और लगता है कि राज्य सरकार इस घटना को लेकर कोई ऐसा कदम नहीं उठाना चाहती, जिससे उसे कोई और बड़ा सियासी नुकसान भुगतना पड़ जाए। शायद यही वजह है कि इस घटना पर बसपा को छोड़कर अन्य सारे विपक्षी दल भी कसूरवार के तौर पर सूरजपाल का नाम लेने से भी डरते नजर आ रहे हैं।

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