Mohan Lal Badoli: लोकसभा चुनाव हारे, फिर भी मोहन लाल बड़ौली को बीजेपी ने क्यों बनाया हरियाणा का प्रदेश अध्यक्ष
Haryana Vidhan Sabha Chunav: बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी एमएलए मोहन लाल बड़ौली को हरियाणा का पार्टी अध्यक्ष नियुक्त किया है। बड़ौली के ऊपर यह बहुत ही बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि अक्टूबर में ही वहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।
चुनावी राज्य में मोहन लाल बड़ौली को प्रदेश की कमान सौंपने का फैसला इसलिए चौंकाने वाला है, क्योंकि वह हाल ही में सोनीपत से लोकसभा का चुनाव कांग्रेस के हाथों हार चुके हैं।

कौन हैं मोहन लाल बड़ौली?
मोहन लाल बड़ौली हरियाणा की राई विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के एमएलए हैं। 1989 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ने वाले बड़ौली शुरू से ही भाजपा में समर्पण के साथ डटे रहे हैं। वे 1995 में मुरथल का मंडल अध्यक्ष चुने गए थे और फिर जिला परिषद के लिए भी उनका चुनाव हुआ।
2019 का चुनाव उनका पहला विधानसभा चुनाव था। लेकिन, पहले ही चुनाव में उन्होंने राई सीट बीजेपी को दिलाई, जहां पार्टी पहले कभी नहीं जीती थी। 1963 में सोनीपत के बड़ौली गांव में जन्मे मोहन लाल ने अपना व्यावसायिक करियर कपड़े का दुकान चलाकर शुरू किया था।
विधायक बनने के साथ ही पार्टी में बढ़ने लगा बड़ौली का कद
विधायक बनने के बाद पार्टी संगठन में उनका कद और भी तेजी से बढ़ने लगा और 2020 में वे सोनीपत के जिलाध्यक्ष बने। इसके बाद 2021 में वे प्रदेश महामंत्री नियुक्त हुए थे। उसी साल वह प्रदेश में पार्टी की कोर टीम का हिस्सा बन गए।
बड़ौली को बीजेपी ने क्यों बनाया हरियाणा का अध्यक्ष?
बड़ौली हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के बहुत ही करीबी माने जाते हैं। वह ब्राह्मण समाज से हैं। उन्हें प्रदेश की कमान सौंपने का मतलब है कि पार्टी हरियाणा में ओबीसी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, पंजाबी नेता मनोहर लाल खट्टर के साथ-साथ ऊंची जाति के नेता पर दांव खेलना चाहती है।
राज्य में अनुमानित तौर पर 27% जाट वोटर हैं। माना जाता है कि इनका एक वर्ग विभिन्न वजहों से अभी पार्टी से दूर है। ऐसे में भाजपा ने ओबीसी, पंजाबी और ऊंची जाति के नेताओं के बीच समीकरण बिठाकर अपनी स्थिति को और मजबूत करने की कोशिश की है।
लोकसभा चुनावों के बाद बीजेपी को पड़ी रणनीति मजबूत करने की जरूरत
लोकसभा चुनावों में बीजेपी को हरियाणा में भले ही 10 में से सिर्फ 5 सीटें मिली हैं, लेकिन 90 विधानसभा क्षेत्रों में से उसे 44 सीटों पर बढ़त मिली है। भाजपा इस स्थिति को अपने हक में और बेहतर करने के उपायों की तलाश में जुटी हुई है।
सोनीपत में बहुत ही कम मार्जिन से लोकसभा चुनाव हारे हैं मोहन लाल बड़ौली
लोकसभा चुनावों में सोनीपत सीट पर वे कांग्रेस के सतपाल ब्रह्मचारी से चुनाव हारे जरूर हैं, लेकिन हार का अंतर बहुत ही कम यानी 21,816 वोटों का रहा है।
अभी तक हरियाणा में बीजेपी अध्यक्ष के पद की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री सैनी ही संभाल रहे थे। लेकिन, विधानसभा चुनावों को देखते हुए किसी फुल टर्म अध्यक्ष की जरूरत महसूस की जा रही थी।












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