Mansa Devi मंदिर की भगदड़ से जाग उठीं 22 साल में मरी 1250 'आत्माएं'! पढ़ें कैसे कब और कहां आई थी मौत?
Haridwar Mansa Devi Stampede 2025: हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में 27 जुलाई 2025 को हुई एक भयावह भगदड़ में 6 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। इस घटना ने एक बार फिर धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन की लचर व्यवस्था को उजागर कर दिया। यह घटना भारत में मंदिरों और धार्मिक समारोहों में होने वाली भगदड़ की लंबी और दुखद कड़ी का हिस्सा है।
2025 में ही मंदिरों, रेलवे स्टेशनों और महाकुंभ जैसे आयोजनों में भगदड़ से 70 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। पिछले दो दशकों में ऐसी त्रासदियों ने सैकड़ों जिंदगियां छीन ली हैं। आइए, नजर डालते हैं भारत में हुई कुछ प्रमुख भगदड़ की घटनाओं पर, जो लापरवाही और अव्यवस्था की कहानी बयां करती हैं...

2025: भगदड़ का खौफनाक साल
- 27 जुलाई, हरिद्वार, उत्तराखंड: मनसा देवी मंदिर में सैकड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ में मची भगदड़ में 6 लोगों की जान चली गई। घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन भीड़ प्रबंधन की कमी ने इस त्रासदी को और गंभीर बना दिया।
- 4 जून, बेंगलुरु, कर्नाटक: चिन्नास्वामी स्टेडियम के पास RCB की IPL जीत के जश्न में उमड़ी भीड़ में भगदड़ मच गई। इस हादसे में 11 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए। प्रशासन की लापरवाही और सुरक्षा इंतजामों की कमी ने उत्सव को मातम में बदल दिया।
- 3 मई, गोवा: शिरगाओ गांव में श्री लयराई देवी मंदिर के वार्षिक उत्सव में तड़के भगदड़ मचने से 6 लोगों की मौत और करीब 100 लोग घायल हुए। संकरी गलियों और अपर्याप्त सुरक्षा ने इस त्रासदी को जन्म दिया।
- 15 फरवरी, नई दिल्ली: नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर महाकुंभ के लिए ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्रियों में भगदड़ मचने से 18 लोगों की मौत हो गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे। अव्यवस्थित भीड़ प्रबंधन ने इस हादसे को और भयावह बना दिया।
- 29 जनवरी, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश: महाकुंभ के संगम क्षेत्र में 'अमृत स्नान' के दौरान लाखों तीर्थयात्रियों की भीड़ में भगदड़ मचने से 30 लोग मारे गए और 60 घायल हुए। सुरक्षा बलों की कमी और अपर्याप्त व्यवस्था इस त्रासदी का कारण बनी।
- 8 जनवरी, तिरुपति, आंध्र प्रदेश: तिरुमाला हिल्स में भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में वैकुंठ द्वार दर्शनम के टिकटों के लिए धक्का-मुक्की में 6 श्रद्धालु मारे गए और दर्जनों घायल हुए। भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासन की नाकामी साफ दिखी।
पिछले वर्षों की प्रमुख भगदड़
- 4 दिसंबर 2024, हैदराबाद, तेलंगाना: संध्या थिएटर में अल्लू अर्जुन की फिल्म पुष्पा 2 के प्रीमियर के दौरान उमड़ी भीड़ में भगदड़ मचने से एक 35 वर्षीय महिला की मौत हो गई और एक बच्चा घायल हुआ। थिएटर में अपर्याप्त सुरक्षा इंतजाम इस हादसे का कारण बने।
- 2 जुलाई 2024, हाथरस, उत्तर प्रदेश: स्वयंभू बाबा भोले बाबा के सत्संग में भगदड़ मचने से 100-120 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे। संकरे रास्ते और भीड़ प्रबंधन की कमी ने इस त्रासदी को जन्म दिया।
- 31 मार्च 2023, इंदौर, मध्य प्रदेश: राम नवमी के मौके पर एक मंदिर में हवन के दौरान पुरानी बावड़ी की स्लैब ढहने से 36 लोगों की मौत हो गई। सुरक्षा मानकों की अनदेखी इस हादसे का मुख्य कारण थी।
- 1 जनवरी 2022, जम्मू-कश्मीर: माता वैष्णो देवी मंदिर में नववर्ष के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ में भगदड़ मचने से 12 श्रद्धालु मारे गए और एक दर्जन से अधिक घायल हुए।
- 29 सितंबर 2017, मुंबई, महाराष्ट्र: एल्फिंस्टन रोड रेलवे स्टेशन के संकरे फुटओवर ब्रिज पर भगदड़ में 23 लोग मारे गए और 36 घायल हुए। बारिश और भीड़ की अव्यवस्था ने इस हादसे को और गंभीर बना दिया।
- 14 जुलाई 2015, राजमुंदरी, आंध्र प्रदेश: गोदावरी पुष्करम उत्सव के उद्घाटन के दौरान पवित्र स्नान स्थल पर भगदड़ में 27 तीर्थयात्री मारे गए और 20 घायल हुए।
- 3 अक्टूबर 2014, पटना, बिहार: गांधी मैदान में दशहरा समारोह के बाद भगदड़ में 32 लोग मारे गए और 26 घायल हुए। अफवाहों और खराब भीड़ प्रबंधन ने इस त्रासदी को जन्म दिया।
- 13 अक्टूबर 2013, दतिया, मध्य प्रदेश: रतनगढ़ मंदिर के पास नवरात्रि के दौरान एक नदी पुल के टूटने की अफवाह से मची भगदड़ में 115 लोग मारे गए और 100 से अधिक घायल हुए।
- 19 नवंबर 2012, पटना, बिहार: छठ पूजा के दौरान अदालत घाट पर अस्थायी पुल ढहने से मची भगदड़ में 18 लोगों की मौत हुई।
- 8 नवंबर 2011, हरिद्वार, उत्तराखंड: हर-की-पौड़ी घाट पर गंगा स्नान के दौरान भगदड़ में 20 लोग मारे गए।
- 14 जनवरी 2011, इडुक्की, केरल: सबरीमाला तीर्थयात्रा के दौरान एक जीप के श्रद्धालुओं से टकराने से मची भगदड़ में 104 लोग मारे गए और 40 घायल हुए।
- 4 मार्च 2010, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश: कृपालु महाराज के राम जानकी मंदिर में भगदड़ से 63 लोग मारे गए।
- 30 सितंबर 2008, जोधपुर, राजस्थान: चामुंडा देवी मंदिर में बम फटने की अफवाह से मची भगदड़ में 220-250 श्रद्धालु मारे गए और 60 से अधिक घायल हुए।
- 3 अगस्त 2008, बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश: नैना देवी मंदिर में चट्टान खिसकने की अफवाह से मची भगदड़ में 162 लोग मारे गए और 47 घायल हुए।
- 25 जनवरी 2005, सतारा, महाराष्ट्र: मंधारदेवी मंदिर में फिसलन भरी सीढ़ियों पर गिरने से मची भगदड़ में 340 श्रद्धालु कुचले गए।
- 27 अगस्त 2003, नासिक, महाराष्ट्र: कुंभ मेले में पवित्र स्नान के दौरान भगदड़ में 39 लोग मारे गए और 140 घायल हुए।
क्यों बार-बार हो रही हैं ये त्रासदियां?
इन भगदड़ों के पीछे प्रमुख कारणों में शामिल हैं:-
- खराब भीड़ प्रबंधन: अधिकांश घटनाओं में अपर्याप्त सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के इंतजाम।
- संकरे रास्ते और अव्यवस्थित संरचनाएं: मंदिरों और घाटों पर संकरी गलियां और पुरानी संरचनाएं खतरे को बढ़ाती हैं।
- अफवाहें और पैनिक: बम, पुल टूटने या चट्टान खिसकने की अफवाहें भगदड़ का कारण बनती हैं।
- अधिक भीड़: धार्मिक आयोजनों में अनियंत्रित भीड़ का जुटना।
क्या होगा आगे?
इन त्रासदियों ने भारत में धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। क्या प्रशासन अब सख्त कदम उठाएगा? क्या भीड़ प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित सुरक्षा बलों का इस्तेमाल होगा? फिलहाल, हरिद्वार में जांच शुरू हो चुकी है, और घायलों का इलाज जारी है। लेकिन ये घटनाएं समाज और प्रशासन के लिए एक चेतावनी हैं कि लापरवाही की कीमत अब और नहीं चुकाई जा सकती।
आपके मुताबिक, भगदड़ रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए? कमेंट्स में बताएं!
(PTI इनपुट के साथ)
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