Harbhajan Singh Retirement: 'दूसरा फेंकने वाला पंजाबी मुंडा क्यों कहलाया Turbanator'?
नई दिल्ली, 24 दिसंबर। आज भारतीय क्रिकेट जगत के लिए भावुक पल है क्योंकि टीम इंडिया के स्टार खिलाड़ी रहे हरभजन सिंह उर्फ भज्जी ने क्रिकेट के सभी फार्मेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। हालांकि वो साल 2016 से ही टीम इंडिया से बाहर चल रहे थे। भज्जी के संन्यास लेने के ऐलान के बाद से आज उनके 23 साल के स्वर्णिम क्रिकेट करियर का समापन हो गया। आपको बता दें हरभजन सिंह ने अपने शानदार करियर के दौरान 103 टेस्ट में 417 विकेट, 236 वनडे इंटरनेशनल मैचों में 269 विकेट और 28 T20 इंटरनेशनल मुकाबलों में 25 विकेट लिए हैं।

टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक लेने वाले पहले भारतीय
यही नहीं स्पिन के महारथि कहे जाने वाली भज्जी भारत के सबसे सफल गेंदबाजों में से एक हैं। वो टेस्ट में 400 से ज्यादा विकेट लेने वाले दूसरे भारतीय स्पिन गेंदबाज हैं तो वहीं दूसरी ओर वो पहले भारतीय गेंदबाज हैं, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक ली थी।
मैं उस खेल को अलविदा कह रहा हूं ...
हरभजन सिंह ने आज ट्वीट किया कि 'मैं उस खेल को अलविदा कह रहा हूं जिसने मुझे जीवन में सब कुछ दिया है।सभी अच्छी चीजें भी समाप्त हो जाती हैं। मैं उन सभी को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने इस 23 साल के लंबे सफर को बेहतरीन और यादगार बनाया।'

'Turbanator' कहलाने लगे भज्जी
यूं तो पंजाब के जालंधर में जन्मे इस सरदार ने विश्न की हर टीम के खिलाफ जबरदस्त ढंग से परफार्म किया है लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई उनकी पारियां हमेशा कमाल की रही हैं और कंगारुओं के खिलाफ बेहतरीन प्रदर्शन ने ही उनको क्रिकेट जगत का 'Turbanator' बना दिया। जी हां, हरभजन सिंह को ये नाम ऑस्ट्रेलिया मीडिया ने ही पहली बार दिया था।
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में रचा इतिहास
दरअसल ये बात है साल 2001 में भारत में हुए बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी की, जिसे जीतने में स्पिन के जादूगर और 'दूसरा' फेंकने में माहिर हरभजन सिंह का बहुत बड़ा हाथ रहा था। उस वक्त ऑस्ट्रेलिया का परचम क्रिकेट की दुनिया में लहरा रहा था, टीम ने एक के बाद एक लगातार 16 टेस्ट जीतने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। वो इंडिया टेस्ट सीरीज खेलने आई थी, जिसमें पहला मैच उसने मुंबई में भारत से 10 विकेट से जीता था और इस करारी हार के बाद अधिकांश क्रिकेट विश्लेषकों ने टीम इंडिया को जमकर धोया था और कहा था कि अब शायद ही भारत सीरीज में वापसी कर पाए।

कंगारुओं की निकली हवा
लेकिन इसके बाद जो हुआ वो अद्भूत था। इस सीरीज का दूसरा मैच कोलकाता के ईडन गार्डन् के मैदान पर खेला गया, जहां टीम इंडिया ने फॉलो ऑन का पीछा करते हुए एक यादगार जीत हासिल की थी। उस मैच में हरभजन सिंह ने कुल 13 विकेट झटके थे। भज्जी की छनछनाती गेंद के आगे कंगारु चारों खाने चित्त नजर आए थे और फिर भज्जी क्रिकेट की दुनिया में चारों ओर छा गए।
अविस्मरणीय हैट्रिक पूरी की
कोलकाता में लिए गये 13 विकेटों में एक अविस्मरणीय हैट्रिक भी शामिल थी, उस वक्त हरभजन सिंह मात्र 21 साल के थे। उन्होंने रिकी पोटिंग, एडम गिलक्रिस्ट और शेन वॉर्न को आउट करके इतिहास रचा था।
तीसरा मैच चेन्नई में हुआ
सीरीज का तीसरा मैच चेन्नई में हुआ था, जहां उन्होंने 15 विकेट झटके थे। कुल मिलाकर सीरीज में हरभजन ने 32 विकेट लिए थे। भारत ने सीरीज पर कब्जा किया था और इसी जीत में अहम रोल निभाने वाले हरभजन सिंह को 'मैन ऑफ द मैच' के साथ साथ 'मैन ऑफ द सीरीज' चुना गया था।

'Turbanator ने फिर धो डाला'
भज्जी के इस शानदार खेल का कायल आस्ट्रेलिया मीडिया भी हो गया था। सीरीज में दूसरा टेस्ट जीतने के दूसरे दिन ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने एक खबर छापी जिसका शीर्षक था "Harbhajan Singh terminated the whole Australian team" इसके बाद जब भज्जी ने तीसरे टेस्ट में भी कमाल किया तो ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने छापा 'Turbanator ने फिर धो डाला', उन्होंने Turban से 'Turbanator' बना दिया क्योंकि भज्जी सरदार होने की वजह से पगड़ी पहना करते थे।
'Doosra king क्रिकेट जगत का Turbanator बन गया'
और इस तरह से 'Doosra king क्रिकेट जगत का Turbanator बन गया'। मालूम हो कि स्पिन गेंदबाजों द्वारा फेंकी जाने वाली 'दूसरा' गेंद एक बेहद ही कठिन विद्या है, जिसे करना बहुत मुश्किल होता है, भज्जी इस विद्या में पारंगत थे।












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