ज्ञानवापी विवाद: ओवैसी ने शेयर की 2700 साल पुराने फव्वारे की तस्वीर, बोले- संघी जीनियस बिजली पूछ रहे हैं
हैदराबाद, 21 मई: उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर की ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़ा विवाद इन दिनों चर्चा में है। कुछ लोगों ने दावा किया है कि मस्जिद में अदालत के आदेश पर हुए सर्वे के दौरान टीम को कथित तौर पर एक शिवलिंग मिला है। जिस पर दूसरे पक्ष ने सफाई दी है कि जिसे शिवलिंग कहा जा रहा है वो वजूखाने में लगा फव्वारा है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर जोरदार बहस देखने को मिल रही है। फव्वारे और शिवलिंग की इस बहस पर हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी का भी ट्वीट आया है। ट्वीट में ओवैसी ने उन लोगों को जवाब दिया है जो कह रहे हैं कि बिना बिजली के फव्वारा नहीं चल सकता है।
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ज्ञानवापी मस्जिद में कई सौ साल पुराना फव्वारा होने के दावे पर एक पक्ष ने कहा है कि जब बिजली नहीं थी तो फव्वारा कैसे चलता था। ऐसे में इसे फव्वारा नहीं कहा जा सकता है। इस पर असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को ट्वीट करते हुए एक तस्वीर और इससे जुड़ी खबर शेयर की है। इस खबर में कहा गया है कि आज भी चल रहा दुनिया का सबसे पुराना फव्वारा संभवत: 2700 साल पुराना है।
एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने ट्वीट में लिखा है- संघी जीनियस पूछ रहे हैं कि बिना बिजली के फव्वारा कैसे था? इसे ग्रेविटी कहा जाता है। माना जाता है कि दुनिया का सबसे पुराना फव्वारा 2700 साल पुराना है, जो चल रहा है। प्राचीन रोमन और यूनानियों के पास पहली और छठी शताब्दी ईसा पूर्व के फव्वारे थे। उन्होंने आगे लिखा, कम से कम 7वीं शताब्दी के बाद से फव्वारे इस्लामी वास्तुकला का एक बेहद अहम हिस्सा रहे हैं। शाहजहाँ के शालीमार बाग में 410 फव्वारे लगे हैं। संघियों को विकिपीडिया लिंक के साथ छोड़ रहा हूं क्योंकि इससे अधिक कुछ भी उनके लिए बहुत मुश्किल हो जाएगा।












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